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Gorakhpur News: सरदारनगर-मगहर बाईपास रेल लाइन की डीपीआर तैयार, बनेगा एक पुल और हॉल्ट स्टेशन
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खजनी के पास सहजनवां-दोहरीघाट रेल लाइन के उपर से गुजरेगी लाइन, बनेगा ओवरब्रिज
लखनऊ और वाराणसी की ट्रेनों को चलाने के लिए एक वैकल्पिक रेल लाइन मिल जाएगी
गोरखपुर। गोरखपुर-लखनऊ मेन लाइन पर मगहर से सरदारनगर के बीच बाईपास रेल लाइन बनाने के लिए रेल प्रशासन ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर लिया है। डीपीआर के मुताबिक, खजनी के पास यह बाईपास रेल लाइन सहजनवां-दोहरीघाट नई रेल लाइन के उपर से होकर गुजरेगी। इसके लिए एक रेल पुल बनाया जाएगा। इस रेल लाइन के बनने से लखनऊ, वाराणसी और बिहार की ट्रेनों को चलाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगी।
47.3 किमी लंबाई में बनने वाले इस बाईपास रेल लाइन को चौथी लाइन के रूप में तैयार किया जा रहा है। डोमिनगढ़ से गोरखपुर तक चौथी लाइन बनाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। पहले इस बाईपास रेल लाइन को सरदारनगर से खजनी के बीच बनाया जा रहा था। 34.67 किलोमीटर लंबी लाइन के लिए 945 करोड़ रुपये की लागत आ रही थी लेकिन बाद में इसे मगहर से सरदारनगर तक बनाने के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे कराया गया। अब डीपीआर तैयार हो गया है। इसके मुताबिक, मगहर से गोरखपुर के बाहरी हिस्से से होकर यह रेल लाइन सरदारनगर में गोरखपुर-देवरिया वाली मेन लाइन से जुड़ जाएगी। इस रेल लाइन की कुल लंबाई 47.3 किमी होगी। ट्रेन या मालगाड़ी की स्पीड कम न होने पाए इसलिए कहीं भी रेलवे क्रॉसिंग नहीं बनाया जाएगा।
गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन मार्ग स्थित सेवई बाजार के पास हॉल्ट स्टेशन बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। खजनी के पास एक पुल बनाया जाएगा। रेल प्रशासन ने डीपीआर को रेलवे बोर्ड भेज दिया है। बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद रेल लाइन बिछाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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सीधे निकल जाएंगी मालगाड़ियां
गोरखपुर रेलवे स्टेशन से होकर रोजाना करीब 32 मालगाड़ियां गुजरती हैं। बाईपास लाइन के बनने से ये मालगाड़ियां सीधे निकल जाएंगी। इससे गोरखपुर स्टेशन पर रेल लाइन खाली रहेगी और ट्रेनों को चलाने में सहूलियत होगी। इसके अलावा अगर गोरखपुर जंक्शन पर कोई कार्य करना हुआ तो ट्रेनें निरस्त नहीं होंगी, बाईपास रेल लाइन से चली जाएंगी।
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कोट
यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार किया जा रहा है। इसी क्रम में नई बाईपास लाइन के लिए डीपीआर तैयार कर लिया गया है। इस रेल लाइन के निर्माण से ट्रेन और मालगाड़ी के संचालन में सहूलियत मिलेगी।
- पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनईआर
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लखनऊ और वाराणसी की ट्रेनों को चलाने के लिए एक वैकल्पिक रेल लाइन मिल जाएगी
गोरखपुर। गोरखपुर-लखनऊ मेन लाइन पर मगहर से सरदारनगर के बीच बाईपास रेल लाइन बनाने के लिए रेल प्रशासन ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर लिया है। डीपीआर के मुताबिक, खजनी के पास यह बाईपास रेल लाइन सहजनवां-दोहरीघाट नई रेल लाइन के उपर से होकर गुजरेगी। इसके लिए एक रेल पुल बनाया जाएगा। इस रेल लाइन के बनने से लखनऊ, वाराणसी और बिहार की ट्रेनों को चलाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगी।
47.3 किमी लंबाई में बनने वाले इस बाईपास रेल लाइन को चौथी लाइन के रूप में तैयार किया जा रहा है। डोमिनगढ़ से गोरखपुर तक चौथी लाइन बनाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। पहले इस बाईपास रेल लाइन को सरदारनगर से खजनी के बीच बनाया जा रहा था। 34.67 किलोमीटर लंबी लाइन के लिए 945 करोड़ रुपये की लागत आ रही थी लेकिन बाद में इसे मगहर से सरदारनगर तक बनाने के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे कराया गया। अब डीपीआर तैयार हो गया है। इसके मुताबिक, मगहर से गोरखपुर के बाहरी हिस्से से होकर यह रेल लाइन सरदारनगर में गोरखपुर-देवरिया वाली मेन लाइन से जुड़ जाएगी। इस रेल लाइन की कुल लंबाई 47.3 किमी होगी। ट्रेन या मालगाड़ी की स्पीड कम न होने पाए इसलिए कहीं भी रेलवे क्रॉसिंग नहीं बनाया जाएगा।
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गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन मार्ग स्थित सेवई बाजार के पास हॉल्ट स्टेशन बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। खजनी के पास एक पुल बनाया जाएगा। रेल प्रशासन ने डीपीआर को रेलवे बोर्ड भेज दिया है। बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद रेल लाइन बिछाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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सीधे निकल जाएंगी मालगाड़ियां
गोरखपुर रेलवे स्टेशन से होकर रोजाना करीब 32 मालगाड़ियां गुजरती हैं। बाईपास लाइन के बनने से ये मालगाड़ियां सीधे निकल जाएंगी। इससे गोरखपुर स्टेशन पर रेल लाइन खाली रहेगी और ट्रेनों को चलाने में सहूलियत होगी। इसके अलावा अगर गोरखपुर जंक्शन पर कोई कार्य करना हुआ तो ट्रेनें निरस्त नहीं होंगी, बाईपास रेल लाइन से चली जाएंगी।
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कोट
यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार किया जा रहा है। इसी क्रम में नई बाईपास लाइन के लिए डीपीआर तैयार कर लिया गया है। इस रेल लाइन के निर्माण से ट्रेन और मालगाड़ी के संचालन में सहूलियत मिलेगी।
- पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनईआर