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नमूने फेल : पैकेज्ड पानी भी असुरक्षित...मिला कोलीफाॅर्म बैक्टीरिया

Sat, 13 Sep 2025 02:27 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 13 Sep 2025 02:27 AM IST
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Gorakhpur News: Samples fail: Packaged water is also unsafe... Coliform bacteria found
खाद्य सुरक्षा विभाग ने नौसड़, गीडा और माया बाजार से नमूने भेजे थे जांच के लिए
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इस साल 18 वाटर प्लांटों की जांच हुई, पांच सील, 50 हजार से अधिक पाउच जब्त
गोरखपुर। अगर आप बाजार में बोतल या पाउच वाला पानी शुद्ध समझ कर खरीद रहे हैं तो सतर्क रहें। वह दूषित पानी भी हो सकता है। ऐसा इसलिए कि खाद्य सुरक्षा विभाग की तरफ से पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर और फ्लेवर वाटर की जांच में चार नमूने फेल हो गए हैं। एक में तो कोलीफाॅर्म बैक्टीरिया पाया गया है जो पेट में संक्रमण का कारक माना जाता है।
अन्य तीन नमूने भी मानक पर खरे नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का दूषित पानी पीने से बीमार हो सकते हैं। ऐसे में पानी खरीद रहे हैं तो ब्रांड और आईएसआई मार्का जरूर चेक कर लें।
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खाद्य सुरक्षा विभाग ने गुलरिहा क्षेत्र के गोपालपुर, कोतवाली क्षेत्र के माया बाजार और गीडा क्षेत्र के सेक्टर 15 में चल रही पानी की पैकिंग करने वाली फैक्टरियाें से अलग-अलग तारीखों में पानी के नमूने लिए थे। इन फैक्टरियों से लिए गए चार नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे।
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इसकी रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार तीन नमूनों में मैग्नीशियम और कैल्शियम की मात्रा मानक सीमा से कम पाई गई। इसके अलावा एक नमूने में टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स (टीडीएस) भी मानक से कम पाया गया। एक नमूने में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली। जांच रिपोर्ट के आधार पर पानी को असुरक्षित और अधोमानक घोषित किया गया है।
शहर में कई कंपनियों के पाउच और बोतल बंद मानक पर खरे नहीं हैं। इनकी पैकेजिंग पर आईएसआई मार्क और भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) लाइसेंस नंबर भी स्पष्ट रूप से अंकित नहीं होते हैं। बीते फरवरी में इस तरह की शिकायतें सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने अभियान चलाकर 18 प्लांटों की जांच की थी। तब करीब 50 हजार पाउच पानी जब्त भी किए गए थे।
कोलीफॉर्म बैक्टीरिया से बड़ा खतरा
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार के अनुसार, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी का मतलब है कि पानी दूषित है। ऐसा पानी पीने से पेट में संक्रमण, उल्टी, दस्त और बजैसी जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इसका असर और भी खतरनाक हो सकता है।
वरिष्ठ चिकित्सक प्रशांत अस्थाना का कहना है कि पानी की शुद्धता फिल्टर सिस्टम के साथ-साथ उसे रखने वाले प्लास्टिक के पाउच व बोतल की गुणवत्ता पर भी निर्भर है। अगर पानी शुद्ध नहीं है तो उसकी वजह से टाइफाइड और डायरिया हो सकता है। पूर्वांचल में बीमारियों की सबसे प्रमुख वजह ही अशुद्ध पानी है।
ये हैं शुद्ध पानी के मानक
रसायन विज्ञान के प्रवक्ता बालेश्वर त्रिपाठी के अनुसार, पीने वाले पानी का पीएच मान 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए। इसमें क्लोराइड की मात्रा 250 मिलीग्राम प्रति लीटर, फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर और नाइट्रेट की मात्रा 50 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि शुद्ध पानी में किसी भी तरह के बैक्टीरिया और वायरस नहीं होने चाहिए।


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वर्जन
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से विशेष अभियान के तहत इस साल 18 बोतलबंद पानी और पाउच प्लांट की जांच की गई। अभियान के दौरान पांच प्लांटों को सील कर दिया गया, जबकि 50 हजार से अधिक पैकेज्ड वाटर पाउच जब्त किए गए। जिन चार नमूनों की रिपोर्ट आई है, उसमें से एक असुरक्षित पाया गया है क्योंकि उसमें बैक्टीरिया कोलीफाॅर्म पाया गया है। अन्य तीन भी मानक के अनुरूप नहीं हैं। फैक्टरी संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। उनका पक्ष सुनने के बाद विधिक कार्रवाई होगी।
-डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य
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