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Gorakhpur News: कहीं से भी करा सकेंगे रजिस्ट्री, गवाही भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से
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ऑनलाइन रजिस्ट्री : आधार कार्ड लिंक होने से फर्जीवाड़ा रुकेगा, रजिस्ट्री के सारे दस्तावेज रहेंगे ऑनलाइन
जनसेवा केंद्र की तरह खोले जाएंगे केंद्र, रजिस्ट्री कराएंगे प्राइवेट कर्मी और जांचेंगे सब रजिस्ट्रार
गोरखपुर। रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 में बदलाव से रजिस्ट्री में हो रहे फर्जीवाड़े पर अंकुश के साथ ही लोगों के समय की बचत होगी। एक ही जमीन की बार-बार रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। क्योंकि सारे दस्तावेज डिजिटल होंगे और आधार कार्ड से लिंक रहेंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्री के तहत जनसेवा केंद्र की तरह ब्लॉक स्तर पर केंद्र खोले जाएंगे। इससे तहसीलों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लंबी लाइन से लोग बचेंगे और कहीं से भी रजिस्ट्री करा सकेंगे। इसके लिए गवाही भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हो जाएगी।
117 साल पुराने रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 को बदलने की प्रक्रिया चल रही है। रजिस्ट्री के लिए निजी कंपनियों को अधिकार दिया जाएगा। ये कंपनियां सेवा केंद्र खोलेंगी, जहां से ऑनलाइन रजिस्ट्री होगी। यहां से ही स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क जमा किया जाएगा। तहसीलों पर बैठे सब रजिस्ट्रार के पास पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्री के दस्तावेज जाएंगे। वे इसकी पड़ताल करेंगे और शक होने पर उसे रोक देंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता व्यंक्टेश्वर तिवारी कहते हैं, कानूनी विवादों में साफ और भरोसेमंद दस्तावेज मिलेंगे। रजिस्ट्रेशन अफसरों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होगी और दलालों पर निर्भरता कम होगी।
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सुरक्षित और पारदर्शी हो जाएगी प्रक्रिया
रजिस्ट्री के नियम बदलने से समय की बचत, धोखाधड़ी में कमी, पारदर्शिता में वृद्धि और भ्रष्टाचार में कमी आएगी। नए नियमों से रजिस्ट्री प्रक्रिया सरल, तेज, सुरक्षित और पारदर्शी हो जाएगी, जिससे सभी को लाभ होगा।
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- मनोज शुक्ला, डीआईजी स्टांप
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एक्सपर्ट कमेंट
सहूलियत के साथ चुनौती भी होगी
रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 में बदलाव का जो मसौदा तैयार हो रहा है वह सहूलियत के साथ चुनौती भरा भी होगा। रजिस्ट्री का काम निजी कर्मचारियों के जिम्मे होगा तो उनकी जवाबदेही कैसे तय होगी, यह बड़ा सवाल है। हालांकि, सब रजिस्ट्रार को अधिकार होगा कि शक होने पर रजिस्ट्री रोक दें, ऐसे में फर्जीवाड़ा पर अंकुश तो लगेगा लेकिन विलंब होगा। इसके अलावा समय की बचत होगी, लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। आधार बेस्ड होने से फर्जीवाड़ा रुकेगा और लोगों के गाढ़ी कमाई डूबेगी नहीं पाएगी। वहीं, अधिवक्ताओं के व्यवसाय पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। दस्तावेज लेखक और वेंडर की भी जरूरत नहीं होगी।
रवि श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता
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जनसेवा केंद्र की तरह खोले जाएंगे केंद्र, रजिस्ट्री कराएंगे प्राइवेट कर्मी और जांचेंगे सब रजिस्ट्रार
गोरखपुर। रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 में बदलाव से रजिस्ट्री में हो रहे फर्जीवाड़े पर अंकुश के साथ ही लोगों के समय की बचत होगी। एक ही जमीन की बार-बार रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। क्योंकि सारे दस्तावेज डिजिटल होंगे और आधार कार्ड से लिंक रहेंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्री के तहत जनसेवा केंद्र की तरह ब्लॉक स्तर पर केंद्र खोले जाएंगे। इससे तहसीलों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लंबी लाइन से लोग बचेंगे और कहीं से भी रजिस्ट्री करा सकेंगे। इसके लिए गवाही भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हो जाएगी।
117 साल पुराने रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 को बदलने की प्रक्रिया चल रही है। रजिस्ट्री के लिए निजी कंपनियों को अधिकार दिया जाएगा। ये कंपनियां सेवा केंद्र खोलेंगी, जहां से ऑनलाइन रजिस्ट्री होगी। यहां से ही स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क जमा किया जाएगा। तहसीलों पर बैठे सब रजिस्ट्रार के पास पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्री के दस्तावेज जाएंगे। वे इसकी पड़ताल करेंगे और शक होने पर उसे रोक देंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता व्यंक्टेश्वर तिवारी कहते हैं, कानूनी विवादों में साफ और भरोसेमंद दस्तावेज मिलेंगे। रजिस्ट्रेशन अफसरों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होगी और दलालों पर निर्भरता कम होगी।
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सुरक्षित और पारदर्शी हो जाएगी प्रक्रिया
रजिस्ट्री के नियम बदलने से समय की बचत, धोखाधड़ी में कमी, पारदर्शिता में वृद्धि और भ्रष्टाचार में कमी आएगी। नए नियमों से रजिस्ट्री प्रक्रिया सरल, तेज, सुरक्षित और पारदर्शी हो जाएगी, जिससे सभी को लाभ होगा।
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- मनोज शुक्ला, डीआईजी स्टांप
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एक्सपर्ट कमेंट
सहूलियत के साथ चुनौती भी होगी
रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 में बदलाव का जो मसौदा तैयार हो रहा है वह सहूलियत के साथ चुनौती भरा भी होगा। रजिस्ट्री का काम निजी कर्मचारियों के जिम्मे होगा तो उनकी जवाबदेही कैसे तय होगी, यह बड़ा सवाल है। हालांकि, सब रजिस्ट्रार को अधिकार होगा कि शक होने पर रजिस्ट्री रोक दें, ऐसे में फर्जीवाड़ा पर अंकुश तो लगेगा लेकिन विलंब होगा। इसके अलावा समय की बचत होगी, लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। आधार बेस्ड होने से फर्जीवाड़ा रुकेगा और लोगों के गाढ़ी कमाई डूबेगी नहीं पाएगी। वहीं, अधिवक्ताओं के व्यवसाय पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। दस्तावेज लेखक और वेंडर की भी जरूरत नहीं होगी।
रवि श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता