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रियल टाइम खतौनी: बड़े विवादों की जड़ बनेंगे जमीन के छोटे टुकड़े
Sat, 27 Apr 2024 06:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 27 Apr 2024 06:28 AM IST
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गोरखपुर। विवादों को कम करने के लिए बनाई जा रही रियल टाइम खतौनी में रकबा दर्ज करने में ऐसे तथ्य छूट जा रहे हैं, जो बाद में विवादों की जड़ बन सकते हैं। रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण के बाद खतौनी में हेक्टेयर में रकबा दर्ज किया जा रहा है, जिसमें वर्ग मीटर या वर्ग फुट में हुए बैनामे में पूरा अंश दर्ज नहीं हो पा रहा है। इस समस्या को लेकर लोग, अधिवक्ताओं से संपर्क साध रहे हैं, लेकिन अधिकारी भी इसका समाधान नहीं बता पा रहे हैं।
रियल टाइम खतौनी में बैनामे के बाद अंश निर्धारण भी किया जा रहा है, ताकि सभी खातेदारों का हिस्सा स्पष्ट हो जाए। इससे विवादों में कमी लाने की योजना है, क्योंकि कोई भी खातेदार उतनी ही जमीन बेच पाएगा, जितना अंश उसके खाते में दर्ज होगा। हालांकि, अधिवक्ताओं का कहना है कि वर्ग मीटर के अनुसार हुए बैनामे का रिकॉर्ड हेक्टेयर में दर्ज किया जा रहा है तो दशमलव के बाद वाले अंक छूट जा रहे हैं, इसी कारण रकबा का कुछ अंश छूट जा रहा है।
पहले खतौनी में आदेश दर्ज हो जाता था और अंश निर्धारण नहीं होता था। राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत खातेदार आवेदन करते थे तो उसका अंश बताया जाता था। रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण हो रहा है और अमलदरामद में 2-4 वर्ग फिट जमीन खतौनी में दर्ज होने से छूट जा रही है। एक ही खाते में पूरी जमीन बिक जाने के बाद छोटे-छोटे जमीनों के बिना दर्ज हुए टुकड़े इकट्ठे हो जाएंगे तो वह हिस्सा मूल खातेदार के अंश में दिखेगा और उसे वह बेच देगा तो विवादों की नौबत आएगी। रजिस्ट्री विभागों में हर माह 2000 बैनामे हो रहे हैं, जिसमें 80 प्रतिशत बैनामे छोटे भूखंड के होते हैं।
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ऐसे समझें समस्या
बांसगांव निवासी महेंद्र नाथ यादव ने शाहपुर में 1504.10 वर्ग फुट जमीन खरीदी है। इसे हेक्टेयर में परिवर्तित किया गया तो .0139 हेक्टेयर खतौनी में दर्ज किया गया, जिसमें दशमलव के बाद चार अंक के बाद भी सात अंक छोड़ना पड़ा, जबकि यह वर्ग फिट में 1500 वर्ग फिट हो रहा है।
इसी प्रकार शाहपुर में ही भटौली बाजार की पल्लवी ने 1770.40 वर्ग फुट का प्लाॅट खरीदा है, जिसे 0.0164 हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जिसमें दशमलव के बाद वाले सात अंक छूट गए हैं। यहीं छूटे हुए अंक ही वर्ग मीटर या वर्ग फुट की इकाई में इकट्ठे होंगे तो विवाद बढ़ेगा, जबकि खाताधारक भी संतुष्ट नहीं है कि उन्होंने जितना बैनामा लिया है, उतना खतौनी में दर्ज नहीं है।
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इस कारण आ रही समस्या
खतौनी में हेक्टेयर में रकबा दर्ज किया जा रहा है, जिसमें दशमलव के बाद चार अंकों को लिया जाता है। इसे वर्ग मीटर में परिवर्तित करना आसान है, लेकिन पहले ही दशमलव होने के कारण वर्ग मीटर या फिट के दशमलव वाले अंक छूट जा रहे हैं। खातेदारों का अंश वर्ग मीटर में दर्ज हो तो हिस्सा छूट जाने की समस्या नहीं होगी।
- राजेश शर्मा, अधिवक्ता
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खतौनी में परिवर्तन की जरूरत
रियल टाइम खतौनी में गाटे का क्षेत्रफल हेक्टेयर में होना चाहिए, लेकिन कॉलम नंबर आठ में खातेदार का अंश दर्ज करने की इकाई वर्ग मीटर होनी चाहिए। इससे बैनामे और खतौनी में दर्ज रकबा का अंतर नहीं होगा। हेक्टेयर जमीन की बड़ी इकाई है, जबकि वर्ग मीटर या वर्ग फिट छोटी इकाई है। छोटे प्लाट का बैनामा वर्ग मीटर में होता है।
- अभिनव श्रीवास्तव, अधिवक्ता
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रियल टाइम खतौनी में बैनामे के बाद अंश निर्धारण भी किया जा रहा है, ताकि सभी खातेदारों का हिस्सा स्पष्ट हो जाए। इससे विवादों में कमी लाने की योजना है, क्योंकि कोई भी खातेदार उतनी ही जमीन बेच पाएगा, जितना अंश उसके खाते में दर्ज होगा। हालांकि, अधिवक्ताओं का कहना है कि वर्ग मीटर के अनुसार हुए बैनामे का रिकॉर्ड हेक्टेयर में दर्ज किया जा रहा है तो दशमलव के बाद वाले अंक छूट जा रहे हैं, इसी कारण रकबा का कुछ अंश छूट जा रहा है।
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पहले खतौनी में आदेश दर्ज हो जाता था और अंश निर्धारण नहीं होता था। राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत खातेदार आवेदन करते थे तो उसका अंश बताया जाता था। रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण हो रहा है और अमलदरामद में 2-4 वर्ग फिट जमीन खतौनी में दर्ज होने से छूट जा रही है। एक ही खाते में पूरी जमीन बिक जाने के बाद छोटे-छोटे जमीनों के बिना दर्ज हुए टुकड़े इकट्ठे हो जाएंगे तो वह हिस्सा मूल खातेदार के अंश में दिखेगा और उसे वह बेच देगा तो विवादों की नौबत आएगी। रजिस्ट्री विभागों में हर माह 2000 बैनामे हो रहे हैं, जिसमें 80 प्रतिशत बैनामे छोटे भूखंड के होते हैं।
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ऐसे समझें समस्या
बांसगांव निवासी महेंद्र नाथ यादव ने शाहपुर में 1504.10 वर्ग फुट जमीन खरीदी है। इसे हेक्टेयर में परिवर्तित किया गया तो .0139 हेक्टेयर खतौनी में दर्ज किया गया, जिसमें दशमलव के बाद चार अंक के बाद भी सात अंक छोड़ना पड़ा, जबकि यह वर्ग फिट में 1500 वर्ग फिट हो रहा है।
इसी प्रकार शाहपुर में ही भटौली बाजार की पल्लवी ने 1770.40 वर्ग फुट का प्लाॅट खरीदा है, जिसे 0.0164 हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जिसमें दशमलव के बाद वाले सात अंक छूट गए हैं। यहीं छूटे हुए अंक ही वर्ग मीटर या वर्ग फुट की इकाई में इकट्ठे होंगे तो विवाद बढ़ेगा, जबकि खाताधारक भी संतुष्ट नहीं है कि उन्होंने जितना बैनामा लिया है, उतना खतौनी में दर्ज नहीं है।
इस कारण आ रही समस्या
खतौनी में हेक्टेयर में रकबा दर्ज किया जा रहा है, जिसमें दशमलव के बाद चार अंकों को लिया जाता है। इसे वर्ग मीटर में परिवर्तित करना आसान है, लेकिन पहले ही दशमलव होने के कारण वर्ग मीटर या फिट के दशमलव वाले अंक छूट जा रहे हैं। खातेदारों का अंश वर्ग मीटर में दर्ज हो तो हिस्सा छूट जाने की समस्या नहीं होगी।
- राजेश शर्मा, अधिवक्ता
खतौनी में परिवर्तन की जरूरत
रियल टाइम खतौनी में गाटे का क्षेत्रफल हेक्टेयर में होना चाहिए, लेकिन कॉलम नंबर आठ में खातेदार का अंश दर्ज करने की इकाई वर्ग मीटर होनी चाहिए। इससे बैनामे और खतौनी में दर्ज रकबा का अंतर नहीं होगा। हेक्टेयर जमीन की बड़ी इकाई है, जबकि वर्ग मीटर या वर्ग फिट छोटी इकाई है। छोटे प्लाट का बैनामा वर्ग मीटर में होता है।
- अभिनव श्रीवास्तव, अधिवक्ता