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Gorakhpur News: शहर के नालों से राप्ती और सरयू भी हुई मैली..नहाए तो संक्रमण का खतरा

Wed, 05 Feb 2025 12:54 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 05 Feb 2025 12:54 AM IST
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Gorakhpur News: Rapti and Saryu also become dirty from the drains of the city. If you bathe, there is a risk of infection.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दिसंबर की जांच रिपोर्ट में दोनों को रखा गया है डी श्रेणी में
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शहर के नालों का पानी जाने से दूषित हो रही है राप्ती नदी



गोरखपुर। शहर के नालों में बह रहे काले पानी ने राप्ती और सरयू नदी के पवित्र जल को भी प्रदूषित कर दिया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दिसंबर में आई रिपोर्ट में इन दोनों नदियों को भी डी श्रेणी (केवल मछली पालन लायक) का माना गया है। नवंबर में भी ये दोनों डी श्रेणी में ही थीं। दोनों नदियों के पानी में अगर बार-बार नहाते हैं तो त्वचा संबंधित बीमारियों का खतरा है।
गोरखपुर शहर के पास राप्ती नदी, रोहिन में मिल जाती है। आगे चलकर कौड़ीराम में इसमें आमी नदी मिल जाती है। बड़हलगंज से पहले राप्ती नदी संतकबीरनगर की तरफ से आ रही सरयू नदी में मिल जाती है। इस नदी के किनारे कोई बड़ा औद्योगिक शहर तो नहीं है, लेकिन केवल शहर के नालों के पानी से ही पहले राप्ती और सरयू का पानी प्रदूषित हो गया है।
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दिसंबर 2024 में राप्ती नदी के राजघाट पुल और सरयू नदी में बड़हलगंज के पास नमूने लिए गए थे। दोनों में घुलित ऑक्सीजन तो आठ के आसपास है, लेकिन इन्हें डी श्रेणी में रखा गया है। डी श्रेणी का पानी केवल मछली पालन के लिए उपयुक्त होता है।
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पीने के लिए ए श्रेणी और नहाने के लिए बी श्रेणी के जलस्रोत को उपयुक्त माना जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों का कहना है कि शहर में कई जगह नालों का पानी सीधे नदी में गिराया जा रहा है। इसकी वजह से ही नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। वहीं पहले से प्रदूषित आमी नदी राप्ती में मिलकर उसे और अधिक गंदा बना देती है। राप्ती और आमी का यही प्रदूषण बड़हलगंज के पास सरयू नदी को प्रदूषित कर देता है।
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हर दिन राप्ती में गिर रहा 40 एमएलडी गंदा पानी
शहर के ब्रह्मपुर, डोमिनगढ़ समेत आठ नालों से करीब 40 एमएलडी गंदा पानी सीधे राप्ती नदी में गिराया जा रहा है। राजघाट पुल के पास कच्चा नाला खोदकर पानी गिराया जा रहा है। अन्य जगहों पर भी यही हालत है। पिछले दिनों तकिया नाला के पानी को प्राकृतिक विधि से शोधित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस नाले पर हनुमानगढ़ी मंदिर के सामने इतना प्लास्टिक भर गया है कि पानी का बहाव ही धीमा हो जा रहा है। इसे देखते हुए एक एजेंसी को प्लास्टिक सफाई का जिम्मा सौंपा गया है।

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वर्जन
शहर के आठ नालों पर छह एसटीपी लगाने का प्रस्ताव है। कुल 55 एमएलडी क्षमता के इन एसटीपी के निर्माण में जमीन की बाधा है। इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि एक जगह जमीन मिलने पर वहीं निर्माण कर दिया जाए और शेष नालों को उससे ही जोड़ा जाए।

- अखिलानंद, एक्सईएन जल निगम ग्रामीण
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