{"_id":"68239f8383b048f152038d98","slug":"gorakhpur-news-pre-monsoon-in-gorakhpur-from-27-may-monsoon-rains-will-start-from-18-june-gorakhpur-news-c-7-hsr1010-936299-2025-05-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: गोरखपुर में 27 मई से प्री मानसून, 18 जून से होगी मानसूनी बारिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: गोरखपुर में 27 मई से प्री मानसून, 18 जून से होगी मानसूनी बारिश
विज्ञापन
वर्ष 2021 में प्री मानसून के दौरान हुई थी 347 एमएम बारिश
पिछले तीन साल से 50 एमएम भी नहीं हो रही बारिश
गोरखपुर। सिंचाई के तमाम संसाधनों के बावजूद आज भी धान की खेती मानसून पर ही निर्भर है। अगर प्री मानसून (मई के अंतिम सप्ताह से लेकर जून के पहले सप्ताह तक) के दौरान अच्छी बारिश हो गई तो इसका असर धान के बेहन गिराने से लेकर रोपाई तक पड़ता है। इतनी ही नहीं रोपाई से पहले खेत की अच्छी तैयारी के लिए भी प्री मानसून बहुत जरूरी है। गन्ने की खेती हो या फिर आम और लीची की फसल, सब पर प्री मानसून का बड़ा असर रहता है। पिछले तीन साल से प्री मानसून में बारिश 50 मिलीमीटर से भी कम हुई है। हालांकि, इस साल मानसून समय से पहले केरल तट से टकराने की उम्मीद है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इससे प्री मानसूनी बारिश भी अच्छी होने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार, गोरखपुर में मानसून 18 जून के आसपास दस्तक दे सकता है, जबकि प्री-मानसून बारिश मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। इस पूर्वानुमान का क्षेत्र की कृषि और किसानों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। समय पर मानसून का आगमन खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, अरहर, मूंगफली और गन्ने के लिए लाभकारी होगा। सामान्य बारिश से मिट्टी में नमी बनी रहेगी, जो बुवाई और फसल विकास के लिए अनुकूल होगी।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. आरडी वर्मा ने बताया कि मई में खाली खेत में नमी की कमी होती है। प्री-मानसून बारिश के बाद किसान खेत की गहरी जुताई करते हैं। इससे धूप मिलने पर मिट्टी में दबे सूक्ष्म जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। साथ ही जुताई के बाद बारिश के चलते खर-पतवार भी उग जाते हैं, जिससे धान की रोपाई से पहले खेत में पलेवा लगाकर खर पतवार को नष्ट कर लिया जाता है। इससे निराई-गुड़ाई भी कम करानी पड़ती है।
विज्ञापन
महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, चौकमाफी के वरिष्ठ वैज्ञानिक व केंद्र अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार सिंह ने बताया कि समय पर मानसून और प्री-मानसून बारिश से फसल उत्पादन में वृद्धि होगी। उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि वे कृषि विभाग और मौसम वैज्ञानिकों के साथ समन्वय बनाए रखें, ताकि फसल चक्र को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सके।
-- -- -
क्या है प्री मानसून बारिश
मौसम वैज्ञानिक मो. दानिश ने बताया कि मानसून घोषित होने से पहले जो बारिश होती है। उसे प्री मानसून बारिश कहते हैं। प्री मानसून बारिश क्षेत्र की नमी और वायु दबाव में काम करती है। प्री मानसून बारिश जिले में 27 मई से शुरू हो जाती है। हालांकि इसमें चार या पांच दिन आगे पीछे हो सकता है।
-- -- --
बाजार पर भी पड़ता है सकारात्मक असर
सब्जी विक्रेता रामकृपाल कुशवाहा कहते हैं कि आज भी बारिश का सब्जी और फल की खेती पर बड़ा असर होता है। मई में बारिश होने पर लौकी, करेला, भिंडी, बैगन आदि की बढ़वार अच्छी होती है। वहीं आम और लीची में मिठास आती है। मई-जून में बारिश कम होने पर लीची के फलों में मिठास ही नहीं आता। फल सिकुड जाते हैं। वहीं बारिश होने पर लीची दो दिन में ही पक जाती है, जिससे उसकी अच्छी कीमत मिलती है। साथ ही बाजार में आवग भी रहता है। सब्जी विक्रेता जितेश साहनी ने बताया कि बारिश नहीं होने पर सब्जी व फलों की गुणवत्ता खराब होती है। गर्मी अधिक रहने पर बाजार में आते ही फल व सब्जी सूखने लगती है। वहीं बारिश के बाद नमी रहने पर नुकसान कम होता है।
-- -- -- --
किसानों की राय
मानसून के समय पर आने से धान की नर्सरी समय से डाली जा सकेगी और अन्य फसलों की बुवाई समय पर शुरू हो सकेगी। इससे सिंचाई का खर्च भी बढ़ता है।
- पारसध्वज सिंह, कृषक, बेलघाट खुर्द, जंगल कौड़िया
प्री मानसून की बारिश का असर धान की रोपाई और मूंगफली की बुवाई पर पड़ता है। सब्जी की फसल व पशु के चारे का संकट भी खत्म हो जाता है।
- संतोष, कृषक, रसूलपुर चकिया, जंगल कौड़िया।
-- -- -
मई में पिछले साल कितना रहा तापमान और बारिश
वर्ष तापमान बारिश (एमएम)
2022 40.7 14.4
2023 41.4 26.3
2024 44 4.4
-- -- --
विज्ञापन
पिछले तीन साल से 50 एमएम भी नहीं हो रही बारिश
गोरखपुर। सिंचाई के तमाम संसाधनों के बावजूद आज भी धान की खेती मानसून पर ही निर्भर है। अगर प्री मानसून (मई के अंतिम सप्ताह से लेकर जून के पहले सप्ताह तक) के दौरान अच्छी बारिश हो गई तो इसका असर धान के बेहन गिराने से लेकर रोपाई तक पड़ता है। इतनी ही नहीं रोपाई से पहले खेत की अच्छी तैयारी के लिए भी प्री मानसून बहुत जरूरी है। गन्ने की खेती हो या फिर आम और लीची की फसल, सब पर प्री मानसून का बड़ा असर रहता है। पिछले तीन साल से प्री मानसून में बारिश 50 मिलीमीटर से भी कम हुई है। हालांकि, इस साल मानसून समय से पहले केरल तट से टकराने की उम्मीद है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इससे प्री मानसूनी बारिश भी अच्छी होने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार, गोरखपुर में मानसून 18 जून के आसपास दस्तक दे सकता है, जबकि प्री-मानसून बारिश मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। इस पूर्वानुमान का क्षेत्र की कृषि और किसानों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। समय पर मानसून का आगमन खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, अरहर, मूंगफली और गन्ने के लिए लाभकारी होगा। सामान्य बारिश से मिट्टी में नमी बनी रहेगी, जो बुवाई और फसल विकास के लिए अनुकूल होगी।
विज्ञापन
जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. आरडी वर्मा ने बताया कि मई में खाली खेत में नमी की कमी होती है। प्री-मानसून बारिश के बाद किसान खेत की गहरी जुताई करते हैं। इससे धूप मिलने पर मिट्टी में दबे सूक्ष्म जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। साथ ही जुताई के बाद बारिश के चलते खर-पतवार भी उग जाते हैं, जिससे धान की रोपाई से पहले खेत में पलेवा लगाकर खर पतवार को नष्ट कर लिया जाता है। इससे निराई-गुड़ाई भी कम करानी पड़ती है।
विज्ञापन
महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, चौकमाफी के वरिष्ठ वैज्ञानिक व केंद्र अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार सिंह ने बताया कि समय पर मानसून और प्री-मानसून बारिश से फसल उत्पादन में वृद्धि होगी। उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि वे कृषि विभाग और मौसम वैज्ञानिकों के साथ समन्वय बनाए रखें, ताकि फसल चक्र को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सके।
क्या है प्री मानसून बारिश
मौसम वैज्ञानिक मो. दानिश ने बताया कि मानसून घोषित होने से पहले जो बारिश होती है। उसे प्री मानसून बारिश कहते हैं। प्री मानसून बारिश क्षेत्र की नमी और वायु दबाव में काम करती है। प्री मानसून बारिश जिले में 27 मई से शुरू हो जाती है। हालांकि इसमें चार या पांच दिन आगे पीछे हो सकता है।
बाजार पर भी पड़ता है सकारात्मक असर
सब्जी विक्रेता रामकृपाल कुशवाहा कहते हैं कि आज भी बारिश का सब्जी और फल की खेती पर बड़ा असर होता है। मई में बारिश होने पर लौकी, करेला, भिंडी, बैगन आदि की बढ़वार अच्छी होती है। वहीं आम और लीची में मिठास आती है। मई-जून में बारिश कम होने पर लीची के फलों में मिठास ही नहीं आता। फल सिकुड जाते हैं। वहीं बारिश होने पर लीची दो दिन में ही पक जाती है, जिससे उसकी अच्छी कीमत मिलती है। साथ ही बाजार में आवग भी रहता है। सब्जी विक्रेता जितेश साहनी ने बताया कि बारिश नहीं होने पर सब्जी व फलों की गुणवत्ता खराब होती है। गर्मी अधिक रहने पर बाजार में आते ही फल व सब्जी सूखने लगती है। वहीं बारिश के बाद नमी रहने पर नुकसान कम होता है।
किसानों की राय
मानसून के समय पर आने से धान की नर्सरी समय से डाली जा सकेगी और अन्य फसलों की बुवाई समय पर शुरू हो सकेगी। इससे सिंचाई का खर्च भी बढ़ता है।
- पारसध्वज सिंह, कृषक, बेलघाट खुर्द, जंगल कौड़िया
प्री मानसून की बारिश का असर धान की रोपाई और मूंगफली की बुवाई पर पड़ता है। सब्जी की फसल व पशु के चारे का संकट भी खत्म हो जाता है।
- संतोष, कृषक, रसूलपुर चकिया, जंगल कौड़िया।
मई में पिछले साल कितना रहा तापमान और बारिश
वर्ष तापमान बारिश (एमएम)
2022 40.7 14.4
2023 41.4 26.3
2024 44 4.4