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Gorakhpur News: मां से हर घंटे प्रभात करता था बात, वीडियो कॉल कर लेता था हालचाल

Sat, 21 Dec 2024 01:31 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Dec 2024 01:31 AM IST
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Gorakhpur News: Prabhat used to talk to his mother every hour, used to make video calls to inquire about her well being.
देईपार घटना: दीपक पांडेय को सांत्वाना देने आ रहे लोग।
पिपरौली (गोरखपुर)। प्रभात पांडेय लखनऊ में जरूर रहता था, पर उसकी हर गतिविधियों पर मां माधुरी पांडेय की नजर रहती थी। माधुरी बताती हैं कि प्रभात सुबह और शाम खाना खाते समय वीडियो कॉल कर हालचाल लेता था। जब उसे खाते हुए देख लेती थी तभी तसल्ली मिलती थी। भले ही बेटा दूर था, लेकिन वीडियो कॉल पर उसे देखकर दिल भर जाता था। हर एक घंटे उससे बात होती थी, उसे देखने के लिए आंखें तरस रही हैं, कोई मेरे बेटे को लौटा दे...
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शुक्रवार को देईपार गांव में एक तरफ पिता दीपक पांडेय गुमसुम होकर हाथ में तीर लिए बैठे थे। वहीं एक कोने में प्रभात के बाबा बीमार हाल में उदास बैठे दिखे। दिन भर मिलने जुलने वाले लोग आते जाते रहे। सभी लोग सांत्वना देकर परिवार का हौसला बढ़ा रहे थे। पिता दीपक पांडेय बार-बार यही कह रहे हैं, मेरा सबकुछ खत्म हो गया। सोचा था बेटा अब बड़ा हो गया है, अब सारी परेशानी दूर हो गई।
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सपना था कि बेटे की धूमधाम से शादी करूं, वह भी टूट गया। बचपन में उसे खुश करने के लिए दिन भर कंधे पर बैठाकर घुमाता था। इसी कंधे पर पर उसे फिर ले गया, इस बार वो चुपचाप हमेशा के लिए चला गया। जीवन का अब तक का सबसे कष्टदायी दिन था। जिसके शरीर पर जरा सी खरोच बर्दाश्त नहीं करता था, उसी बेटे का दाह संस्कार अपने हाथों से किया है।
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बाबा की निगाहें अभी भी प्रभात को तलाश रहीं
प्रभात के बाबा उमाकांत पांडेय बताते हैं कि नाती बचपन में मेरे पास हमेशा रहता था। उसे देखकर मेरा सीना चौड़ा हो जाता था। नाती बहुत तेज था। गांव में भी सबकी मदद करता था। उम्र के इस पड़ाव में जब नाती मुझे संभालता, वो छोड़कर चला गया। इसकी भरपाई कोई नहीं कर पाएगा। बाबा की निगाहें अभी भी नाती को तलाश रही हैं।


प्रभात को यादकर रो पड़ रहे ग्रामीण
देईपार गांव में प्रभात की मौत से सन्नाटा पसरा है। प्रभात को यादकर ग्रामीण भी रो पड़ रहे हैं। गांव के शशि प्रकाश पांडेय ने बताया कि प्रभात हम लोगों के बच्चों की तरह था। गांव के बच्चों से अच्छा संबंध था। इतना सरल स्वभाव का था, सबसे हंसकर ही बोलता था। इस दुख की घड़ी में पूरा गांव परिवार के साथ है। इसी तरह गांव के दिलीप कुमार पांडेय ने बताया कि प्रभात का चेहरा ही नहीं भूल पा रहे हैं। बहुत ही मिलनसार था। परिवार से बहुत ही करीब था। किसी के घर शादी विवाह में भी वह हमेशा काम संभाल लेता था।
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