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Gorakhpur News: 19 साल से लापता कुंभकरण को खोजने पंजाब जाएगी पुलिस
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कुंभकरण की तस्वीर लिए बहनें।
गोरखपुर। पीपीगंज के बढ़नी का कुंभकरण जिंदा है या नहीं, इसकी जांच करने के लिए गोरखपुर पुलिस चंडीगढ़ जाएगी। 18 वर्ष की उम्र में 2005 में पंजाब कमाने गया, तब से लौटा नहीं। पंजाब पुलिस ने जांच कर सर्पदंश से मौत बता दिया, लेकिन शव कहां गया, यह नहीं बता पाई।
यही वजह है कि परिवार वाले कुंभकरण को मृत नहीं मानते हैं और उसकी जांच की मांग कर रहे हैं। सीएम पोटर्ल पर शिकायत के बाद एसपी नार्थ ने एक टीम गठित कर चंडीगढ़ भेजने का निर्देश दिया है। कुंभकरण की तलाश में दौड़ रही बहनों को अब एक उम्मीद जगी है कि अब शायद उनका भाई घर वापस आएगा।
सुमित्रा ने दिए प्रार्थना पत्र में लिखा है कि 2005 में उसका भाई कुंभकरण कमाने के लिए पंजाब गया था। बाद में पता चला कि गुलरिहा इलाके की एक युवती भी उसके साथ गई थी। उसने आकर बताया कि कुंभकरण की सर्पदंश से मौत हो गई, लेकिन उसकी लाश नहीं मिली। कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज हुआ तो विवेचक ने भी अपनी चार्जशीट में सर्पदंश से उसकी मौत की बात लिखी, लेकिन उसके शव के बारे में नहीं बता सके। बाद में सुमित्रा को चंडीगढ़ से पता चला कि उसके साथ आए भोला ने पोस्टमार्टम न कराने की बात लिखित में दी थी। सुमित्रा के अनुसार, कुंभकरण जहां काम करता था, वहीं के एक नौकर ने उसे बताया था कि आपके भाई को मालिक ने कहीं दूर भेज दिया था। अब इसी राज का सच जानने के लिए पुलिस चंडीगढ़ जाएगी।
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चार बहनों को भाई का इंतजार
कुंभकरण को खोजने के लिए उसकी चार बहनें सुमित्रा, अंगीरा, कुसुम और सुमन दौड़-भाग कर रही हैं। वहीं उसका एक भाई रामकरण और उसकी मां दुर्गावती को भी यकीन है कि उसका बेटा कुंभकरण जिंदा है। वह एक दिन घर जरूर लौटेगा। भाई को खोजने के दौरान ही कुंभकरण के पिता की मौत हो गई। इसके बाद से ही बहनें चंडीगढ़ और गोरखपुर में अफसरों के दफ्तर के चक्कर लगा रही हैं।
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एक मामला आया है। महिला के प्रार्थना पत्र की जांच के बाद एक टीम चंडीगढ़ भेजी जा रही है। कुंभकरण जिंदा है या मर गया है, इसका पता पुलिस टीम लगाएगी।
जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी उत्तरी
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यही वजह है कि परिवार वाले कुंभकरण को मृत नहीं मानते हैं और उसकी जांच की मांग कर रहे हैं। सीएम पोटर्ल पर शिकायत के बाद एसपी नार्थ ने एक टीम गठित कर चंडीगढ़ भेजने का निर्देश दिया है। कुंभकरण की तलाश में दौड़ रही बहनों को अब एक उम्मीद जगी है कि अब शायद उनका भाई घर वापस आएगा।
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सुमित्रा ने दिए प्रार्थना पत्र में लिखा है कि 2005 में उसका भाई कुंभकरण कमाने के लिए पंजाब गया था। बाद में पता चला कि गुलरिहा इलाके की एक युवती भी उसके साथ गई थी। उसने आकर बताया कि कुंभकरण की सर्पदंश से मौत हो गई, लेकिन उसकी लाश नहीं मिली। कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज हुआ तो विवेचक ने भी अपनी चार्जशीट में सर्पदंश से उसकी मौत की बात लिखी, लेकिन उसके शव के बारे में नहीं बता सके। बाद में सुमित्रा को चंडीगढ़ से पता चला कि उसके साथ आए भोला ने पोस्टमार्टम न कराने की बात लिखित में दी थी। सुमित्रा के अनुसार, कुंभकरण जहां काम करता था, वहीं के एक नौकर ने उसे बताया था कि आपके भाई को मालिक ने कहीं दूर भेज दिया था। अब इसी राज का सच जानने के लिए पुलिस चंडीगढ़ जाएगी।
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चार बहनों को भाई का इंतजार
कुंभकरण को खोजने के लिए उसकी चार बहनें सुमित्रा, अंगीरा, कुसुम और सुमन दौड़-भाग कर रही हैं। वहीं उसका एक भाई रामकरण और उसकी मां दुर्गावती को भी यकीन है कि उसका बेटा कुंभकरण जिंदा है। वह एक दिन घर जरूर लौटेगा। भाई को खोजने के दौरान ही कुंभकरण के पिता की मौत हो गई। इसके बाद से ही बहनें चंडीगढ़ और गोरखपुर में अफसरों के दफ्तर के चक्कर लगा रही हैं।
एक मामला आया है। महिला के प्रार्थना पत्र की जांच के बाद एक टीम चंडीगढ़ भेजी जा रही है। कुंभकरण जिंदा है या मर गया है, इसका पता पुलिस टीम लगाएगी।
जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी उत्तरी