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Gorakhpur News: एडल्ट एजुकेशन में एक ही छात्र, किया टॉप... कोर्स अब बंद
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डीडीयू: अंतिम बैच में चार छात्रों ने लिया था प्रवेश, तीन ने बीच में ही छोड़ दी थी पढ़ाई
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षांत समारोह में अजब-गजब का मामला सामने आया। प्रौढ़ शिक्षा एवं सतत प्रसार विभाग (एडल्ट एजुकेशन) के अंतिम बैच में सिर्फ एक ही छात्र था। इस बैच के नारायण दत्त पाठक ने स्वाभाविक रूप से टॉप किया है। सोमवार को कुलाधिपति ने स्वर्ण पदक देकर उन्हें सम्मानित किया। अब विभाग के साथ यह कोर्स भी बंद हो गया है।
एडल्ट एजुकेशन के शिक्षक के रूप में डॉ. धर्मव्रत तिवारी और डॉ. आशुतोष दीक्षित करीब एक दशक पहले सेवानिवृत्त हो गए थे। उनके बाद किसी की नियुक्ति इस विभाग में नहीं हुई लेकिन प्रवेश लिया जाता रहा। विभाग में शिक्षक नहीं होने के कारण छात्रों की रुचि घटती चली गई। सत्र 2023-24 में महज चार छात्रों ने इस विषय में प्रवेश लिया था।
दो छात्रों ने पहले ही वर्ष में पढ़ाई छोड़ दी। एक अन्य छात्र ने तीसरे सेमेस्टर में परीक्षा नहीं दी। सत्र 2024-25 में इस विषय में प्रवेश ही बंद कर दिया गया था। उस बैच के अंतिम छात्र नारायण दत्त पाठक ने टॉपर के रूप में कुलाधिपति के हाथों स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
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अधिक समर्पण के साथ कार्यों की मिलेगी प्रेरणा
टॉपर नारायण दत्त पाठक ने कहा कि यह सम्मान केवल मेहनत का परिणाम नहीं बल्कि सामाजिक प्रयासों की स्वीकृति है। वह शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। स्वर्ण पदक अधिक समर्पण के साथ शिक्षा प्रसार के लिए कार्य करने की प्रेरणा देगा।
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वर्जनप्रौढ़ शिक्षा एवं सतत प्रसार विभाग का यह अंतिम बैच था। इस बैच में प्रवेश लेने वाले अन्य विद्यार्थियों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी। इस विभाग के छात्रों को शिक्षाशास्त्र के शिक्षक ही पढ़ाते थे।
- प्रो. सुनीता दुबे, संकायाध्यक्ष, शिक्षाशास्त्र, डीडीयू
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षांत समारोह में अजब-गजब का मामला सामने आया। प्रौढ़ शिक्षा एवं सतत प्रसार विभाग (एडल्ट एजुकेशन) के अंतिम बैच में सिर्फ एक ही छात्र था। इस बैच के नारायण दत्त पाठक ने स्वाभाविक रूप से टॉप किया है। सोमवार को कुलाधिपति ने स्वर्ण पदक देकर उन्हें सम्मानित किया। अब विभाग के साथ यह कोर्स भी बंद हो गया है।
एडल्ट एजुकेशन के शिक्षक के रूप में डॉ. धर्मव्रत तिवारी और डॉ. आशुतोष दीक्षित करीब एक दशक पहले सेवानिवृत्त हो गए थे। उनके बाद किसी की नियुक्ति इस विभाग में नहीं हुई लेकिन प्रवेश लिया जाता रहा। विभाग में शिक्षक नहीं होने के कारण छात्रों की रुचि घटती चली गई। सत्र 2023-24 में महज चार छात्रों ने इस विषय में प्रवेश लिया था।
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दो छात्रों ने पहले ही वर्ष में पढ़ाई छोड़ दी। एक अन्य छात्र ने तीसरे सेमेस्टर में परीक्षा नहीं दी। सत्र 2024-25 में इस विषय में प्रवेश ही बंद कर दिया गया था। उस बैच के अंतिम छात्र नारायण दत्त पाठक ने टॉपर के रूप में कुलाधिपति के हाथों स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
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अधिक समर्पण के साथ कार्यों की मिलेगी प्रेरणा
टॉपर नारायण दत्त पाठक ने कहा कि यह सम्मान केवल मेहनत का परिणाम नहीं बल्कि सामाजिक प्रयासों की स्वीकृति है। वह शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। स्वर्ण पदक अधिक समर्पण के साथ शिक्षा प्रसार के लिए कार्य करने की प्रेरणा देगा।
वर्जनप्रौढ़ शिक्षा एवं सतत प्रसार विभाग का यह अंतिम बैच था। इस बैच में प्रवेश लेने वाले अन्य विद्यार्थियों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी। इस विभाग के छात्रों को शिक्षाशास्त्र के शिक्षक ही पढ़ाते थे।
- प्रो. सुनीता दुबे, संकायाध्यक्ष, शिक्षाशास्त्र, डीडीयू