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Gorakhpur News: अब मटर की दाल में भी मिलावट... धंधेबाज खपा रहे थे प्रतिबंधित खेसारी दाल

Mon, 01 Sep 2025 01:19 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 01 Sep 2025 01:19 AM IST
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Gorakhpur News: Now pea dal is also adulterated... Traders were selling banned Khesari dal
महेवा मंडी के थोक विक्रेता और पिपराइच में फुटकर विक्रेता के यहां से मई में लिए गए थे सैंपल
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राज्य प्रयोगशाला की तीन महीने बाद आई रिपोर्ट, खराब मिली गुणवत्ता, असुरक्षित घोषित
गोरखपुर। अब बाजार में मटर दाल में खेसारी दाल मिलाकर बेचा जा रहा है, जबकि खेसारी दाल की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। महेवा मंडी से पीपीगंज में बिकने जा रही मटर की दाल में खेसारी की दाल मिलाए जाने की पुष्टि हुई है। दाल की गुणवत्ता भी बेहद खराब मिली है। दाल हमीरपुर से मंगाई गई थी। राज्य प्रयोगशाला लखनऊ से आई रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में इस नमूने को सबस्टैंडर्ड और असुरक्षित घोषित किया गया है।
मिलावट के खिलाफ अभियान के दौरान बीते 19 मई को खाद्य सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने महेवा मंडी स्थित थोक विक्रेता साईं जी ट्रेडर्स और पिपराइच के खुदरा विक्रेता अमरनाथ गुप्ता के यहां से मटर दाल के नमूने संग्रहित किए थे। यह दाल मेसर्स वीके पल्स, हमीरपुर द्वारा निर्मित पाई गई थी। नमूने को राज्य प्रयोगशाला लखनऊ में जांच के लिए भेजा गया था। इसकी रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा मानकों के विपरीत पाई गई है।
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जांच में पाया गया कि नमूने में गंभीर दोष वाले बीज 17.6 प्रतिशत हैं, जबकि इसकी मानक सीमा एक प्रतिशत है। हल्के दोष वाले बीज 17.12 प्रतिशत पाए गए, जबकि इसकी मानक सीमा सात प्रतिशत ही है। इसके साथ ही खेसारी दाल की मिलावट 16.57 प्रतिशत पाई गई जो पूरी तरह प्रतिबंधित है। रिपोर्ट के अनुसार, यह नमूने अवमानक एवं असुरक्षित घोषित किए गए हैं। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डाॅ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि शिकायत मिली थी कि महेवा मंडी से खेसारी की दाल की बिक्री की जा रही है। इसके आधार पर 19 मई को दाल से भरे लोडर को रोककर जांच की गई थी।
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बन सकता है लकवा का कारण
जांच में बीटा एन आक्सालिल एल अल्फा, बीटा डायमिनोप्रोपिओनिक एसिड (बीटा-ओडीएपी) की मात्रा 0.242 प्रतिशत मिली। यह मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। यह पदार्थ तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर स्थायी लकवा जैसे गंभीर रोगों का कारण बन सकता है। डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर विक्रेता अमरनाथ गुप्ता, आपूर्तिकर्ता श्री साईं जी ट्रेडर्स और निर्माता व वितरक मेसर्स वीके पल्सेस को नोटिस जारी किया है। वे 30 दिन के भीतर नमूने की रेफरल लैब में जांच का अनुरोध कर सकते हैं। इसके लिए 18 प्रतिशत जीएसटी सहित 13 हजार 570 रुपये जमा करने होंगे। यदि समय से अपील नहीं की गई तो अग्रिम कार्रवाई की संस्तुति किए जाने का प्रावधान है।
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ऐसे करें पहचान
- खेसारी दाल के दाने प्रायः चपटे व चौकोर होते हैं।
- पानी में डालने पर इनका रंग धूसर/सफेद दिखता है।
- स्वाद में हल्की कड़वाहट व कसैलापन होता है।
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