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Gorakhpur News: अब इंस्पेक्टर करेंगे साइबर अपराधों से संबंधित मामलों की विवेचना
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इंस्पेक्टर न होने की दशा में सीओ अपने सर्किल के दूसरे इंस्पेक्टर से कराएंगे जांच
एसओ की सहायक विवेचक के रूप में रहेगी भूमिका, प्रत्येक सेल में एक दरोगा और दो कांस्टेबलों की होगी नियुक्ति
गोरखपुर। साइबर के बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने और पीड़ितों को त्वरित सहायता देने के लिए जिले के सभी थानों में साइबर सेल गठित किए गए हैं। प्र्रत्येक सेल में दो दरोगा और दो कांस्टेबलों की नियुक्ति की जाएगी। यही नहीं साइबर अपराधों से संबंधित सभी विवेचना इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी करेंगे। यदि किसी थाने में इंस्पेक्टर नहीं हैं तो क्षेत्राधिकारी अपने सर्किल के दूसरे इंस्पेक्टर से विवेचना कराएंगे।
वर्तमान समय में संपत्ति से जुड़े पारंपरिक अपराधों की तुलना में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में इस बात की जरूरत महसूस की जा रही थी कि थाने स्तर पर त्वरित कार्रवाई हो, ताकि पीड़ित को इधर-उधर भटकना न पड़े। इसके लिए जिले के सभी थानों में साइबर सेल का गठन किया गया है। साइबर क्राइम से संबंधित प्रशिक्षण लेकर लौटे पुलिसकर्मियों की वहां ड्यूटी लगाई जाएगी। इससे सीधे तौर पर पीड़ित की मदद मिल सकेगी।
थाने के साइबर सेल में मौजूद पुलिस कर्मी एक हेल्प डेस्क पर बैठेंगे। वह थाने पर आने वाले पीड़ितों की शिकायतों को 1930 के जरिये एनसीआरपी पर दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही थाने पर मिलने वाली शिकायतों को पोर्टल पर भी रिपोर्ट करेंगे। इसके अलावा साइबर अपराध समन्वय केंद्र जैसे समन्वय, सहयोग, प्रतिबिंब, एसीएमईसी का संचालन एवं उससे संबंधित डेटा का विश्लेषण कर कार्रवाई करेंगे। साइबर अपराध की घटनाओें में आने वाले मोबाइल नंबरों व ईएमईआई को ब्लॉक करने के लिए प्रपत्र तैयार करेंगे। इसके बाद साइबर मामलों की विवेचना इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी करेंगे। थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर नहीं हैं तो वे सह विवेचक के रूप में काम करेंगे।
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एसओ की सहायक विवेचक के रूप में रहेगी भूमिका, प्रत्येक सेल में एक दरोगा और दो कांस्टेबलों की होगी नियुक्ति
गोरखपुर। साइबर के बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने और पीड़ितों को त्वरित सहायता देने के लिए जिले के सभी थानों में साइबर सेल गठित किए गए हैं। प्र्रत्येक सेल में दो दरोगा और दो कांस्टेबलों की नियुक्ति की जाएगी। यही नहीं साइबर अपराधों से संबंधित सभी विवेचना इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी करेंगे। यदि किसी थाने में इंस्पेक्टर नहीं हैं तो क्षेत्राधिकारी अपने सर्किल के दूसरे इंस्पेक्टर से विवेचना कराएंगे।
वर्तमान समय में संपत्ति से जुड़े पारंपरिक अपराधों की तुलना में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में इस बात की जरूरत महसूस की जा रही थी कि थाने स्तर पर त्वरित कार्रवाई हो, ताकि पीड़ित को इधर-उधर भटकना न पड़े। इसके लिए जिले के सभी थानों में साइबर सेल का गठन किया गया है। साइबर क्राइम से संबंधित प्रशिक्षण लेकर लौटे पुलिसकर्मियों की वहां ड्यूटी लगाई जाएगी। इससे सीधे तौर पर पीड़ित की मदद मिल सकेगी।
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थाने के साइबर सेल में मौजूद पुलिस कर्मी एक हेल्प डेस्क पर बैठेंगे। वह थाने पर आने वाले पीड़ितों की शिकायतों को 1930 के जरिये एनसीआरपी पर दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही थाने पर मिलने वाली शिकायतों को पोर्टल पर भी रिपोर्ट करेंगे। इसके अलावा साइबर अपराध समन्वय केंद्र जैसे समन्वय, सहयोग, प्रतिबिंब, एसीएमईसी का संचालन एवं उससे संबंधित डेटा का विश्लेषण कर कार्रवाई करेंगे। साइबर अपराध की घटनाओें में आने वाले मोबाइल नंबरों व ईएमईआई को ब्लॉक करने के लिए प्रपत्र तैयार करेंगे। इसके बाद साइबर मामलों की विवेचना इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी करेंगे। थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर नहीं हैं तो वे सह विवेचक के रूप में काम करेंगे।
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