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Gorakhpur News: अब जेल में मुलाकात के लिए कैदी का भी देना होगा आधारकार्ड

Fri, 24 Oct 2025 01:10 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Oct 2025 01:10 AM IST
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Gorakhpur News: Now, for meeting in jail, the prisoner will also have to provide his Aadhaar card.
जेल सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए नई व्यवस्था की गई लागू- वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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कैदियों व मुलाकातियों की पहचान अब ई-सृजन डाटा से होगी लिंक, एनआईसी करेगा सिस्टम का मेंटेनेंस
गोरखपुर। जेल प्रशासन अब पूरी तरह डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। अब किसी भी कैदी से मिलने आने वाले व्यक्ति को अपना आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा। साथ ही कैदी का आधार कार्ड नंबर भी रिकॉर्ड में जोड़ा जाएगा। गोरखपुर जेल में यह व्यवस्था जल्द ही प्रभावी हो जाएगी।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डीके पांडेय ने बताया कि यह कदम सुरक्षा और पहचान सत्यापन को और मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है।उन्होंने बताया कि ई-सृजन डाटा सिस्टम में अब हर बंदी की पूरी जानकारी लिंक की जा रही है। इस डाटा में कैदी का नाम, पता, केस की जानकारी, जेल में बिताया गया समय, ट्रायल की स्थिति और अब आधार कार्ड विवरण भी शामिल किया जाएगा। यह पूरा सिस्टम नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) की ओर से संचालित किया जाता है।
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वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि मुलाकातियों की पहचान के लिए पिछले कई वर्षों से आधार कार्ड की फोटो कॉपी ली जा रही थी, लेकिन अब इसे और सख्त किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत मुलाकाती का बायोमेट्रिक सत्यापन भी संभव बनाया जाएगा ताकि किसी भी तरह की फर्जी पहचान या धोखाधड़ी की आशंका खत्म की जा सके। उन्होंने कहा कि जेल सुरक्षा एक अत्यंत संवेदनशील विषय है। मुलाकात के दौरान कई बार गलत पहचान या दूसरे के नाम से प्रवेश के मामले सामने आते रहे हैं। इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अब जेल प्रशासन पूरी तरह से आधार आधारित सत्यापन व्यवस्था लागू कर रहा है।
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डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर होगा हर कैदी का रिकॉर्ड
इस प्रणाली से न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था दुरूस्त होगी, बल्कि कैदियों के रिकॉर्ड को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया जा सकेगा। ई-सृजन पोर्टल के जरिये जेल अधिकारियों को कैदियों के व्यवहार, स्वास्थ्य, सुनवाई की तारीखों और अन्य कानूनी पहलुओं की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। भविष्य में इस व्यवस्था को पुलिस विभाग और न्यायालयों से भी लिंक करने की योजना है, ताकि आरोपियों के रिकॉर्ड और केस स्थिति की मॉनिटरिंग में आसानी हो सके।

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कोट
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद जेल में मुलाकात की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और सत्यापित पहचान आधारित होगी, जिससे सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। यह प्रणाली राज्य स्तर पर एकीकृत डाटा तैयार करेगी, जिससे किसी कैदी के ट्रांसफर, रिहाई या अन्य कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी।
- डीके पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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