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Gorakhpur News: पछतावा नहीं, दादी ने जिंदगी बना थी नर्क
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कलावती हत्याकांड ..
दादी की हत्या की आरोपी पोती खुशी बोली- पढ़ाई छुड़वाकर खेतों में झोंका, बोलीं...कोई लड़का सेट कर ले
गोरखपुर। बचपन में मां के साथ बंगाल से गोरखपुर आई खुशी के हाथों में किताब की जगह हंसिया थमा दी गई। ताने सुने, अपमान झेला और आखिरकार गुस्से व पीड़ा के बीच अपनी 60 वर्षीय दादी कलावती की हत्या कर जेल चली गई। जेल जाने से पहले पुलिस की पूछताछ में खुशी ने बताया कि उसे कोई पछतावा नहीं है, उन्होंने (दादी) मेरी जिंदगी के 15 साल नर्क बना दी।
खुशी ने बताया कि वह महज तीन साल की थी जब मां उत्तरा देवी उसे लेकर बंगाल से गोरखपुर आ गईं। दादी हमेशा उसे “बंगालन” कहकर ताने मारती थीं। बताया, मेरे दोनों भाई पढ़ते-खेलते थे, लेकिन मुझे खेतों में घास काटने भेजा जाता था। जब 9वीं में पढ़ने की जिद की तो दादी ने किताबें छीन लीं और कहा कि पढ़ाई छोड़, कोई लड़का सेट कर ले, वही तुझे पैसे देगा। रक्षाबंधन के दिन से ही दोनों के बीच विवाद बढ़ा हुआ था। 25 सितंबर को जब मां उतरा यादव बैंक गई थीं, दादी कलावती खुशी को फिर खेतों में घास कटवाने ले गईं। वहां उन्होंने अपशब्द कहे। खुशी ने बताया कि दादी ने कहा कि मेरे बेटे की कमाई खा रही है, काम नहीं करती। कहो तो मैं किसी लड़के से बात करूं। उस दिन खुशी चुप रही लेकिन अंदर गुस्सा उबल रहा था। दोपहर 1:30 बजे जब दादी घर लौटकर खाट पर लेटीं, खुशी ने चुपचाप गड़ासा उठाया और वार कर दिया। तीन वारों में दादी की गर्दन अलग हो गई। खुशी ने कहा, कि उस वक्त सब थम गया था। मैं बस बैठी रही।
एक दरी बनी पर्दाफाश की कड़ी
पुलिस ने शव को एक बोरे में बंद पाया, जिसकी गर्दन दरी से लपेटी गई थी। जब मां उत्तरा देवी से दरी के बारे में पूछा गया तो उसने अनजान बताया। लेकिन जब वही दरी चाचा राजेश को दिखाई गई तो उसने पहचान लिया। उन्होंने कहा कि यह दरी मैं राजकोट से लाया था। बस यहीं से पुलिस का शक गहराया। 12 अक्तूबर को मां-बेटी को थाने बुलाया गया। पूछताछ में खुशी टूट गई और उसने पूरी कहानी कबूल कर ली।
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जेल में जागती रही पूरी रात
पहली रात खुशी ने जेल में एक पल की भी नींद नहीं ली। जेलर अरुण कुमार ने बताया कि खुशी और उसकी मां को महिला बैरक में रखा गया है। खुशी की काउंसलिंग कराई जा रही है। खुशी गुमसुम रहती है और कहती है कि अब तो कुछ भी बाकी नहीं, मेरा बचपन, मेरी पढ़ाई और भविष्य सब खत्म।
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दादी की हत्या की आरोपी पोती खुशी बोली- पढ़ाई छुड़वाकर खेतों में झोंका, बोलीं...कोई लड़का सेट कर ले
गोरखपुर। बचपन में मां के साथ बंगाल से गोरखपुर आई खुशी के हाथों में किताब की जगह हंसिया थमा दी गई। ताने सुने, अपमान झेला और आखिरकार गुस्से व पीड़ा के बीच अपनी 60 वर्षीय दादी कलावती की हत्या कर जेल चली गई। जेल जाने से पहले पुलिस की पूछताछ में खुशी ने बताया कि उसे कोई पछतावा नहीं है, उन्होंने (दादी) मेरी जिंदगी के 15 साल नर्क बना दी।
खुशी ने बताया कि वह महज तीन साल की थी जब मां उत्तरा देवी उसे लेकर बंगाल से गोरखपुर आ गईं। दादी हमेशा उसे “बंगालन” कहकर ताने मारती थीं। बताया, मेरे दोनों भाई पढ़ते-खेलते थे, लेकिन मुझे खेतों में घास काटने भेजा जाता था। जब 9वीं में पढ़ने की जिद की तो दादी ने किताबें छीन लीं और कहा कि पढ़ाई छोड़, कोई लड़का सेट कर ले, वही तुझे पैसे देगा। रक्षाबंधन के दिन से ही दोनों के बीच विवाद बढ़ा हुआ था। 25 सितंबर को जब मां उतरा यादव बैंक गई थीं, दादी कलावती खुशी को फिर खेतों में घास कटवाने ले गईं। वहां उन्होंने अपशब्द कहे। खुशी ने बताया कि दादी ने कहा कि मेरे बेटे की कमाई खा रही है, काम नहीं करती। कहो तो मैं किसी लड़के से बात करूं। उस दिन खुशी चुप रही लेकिन अंदर गुस्सा उबल रहा था। दोपहर 1:30 बजे जब दादी घर लौटकर खाट पर लेटीं, खुशी ने चुपचाप गड़ासा उठाया और वार कर दिया। तीन वारों में दादी की गर्दन अलग हो गई। खुशी ने कहा, कि उस वक्त सब थम गया था। मैं बस बैठी रही।
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एक दरी बनी पर्दाफाश की कड़ी
पुलिस ने शव को एक बोरे में बंद पाया, जिसकी गर्दन दरी से लपेटी गई थी। जब मां उत्तरा देवी से दरी के बारे में पूछा गया तो उसने अनजान बताया। लेकिन जब वही दरी चाचा राजेश को दिखाई गई तो उसने पहचान लिया। उन्होंने कहा कि यह दरी मैं राजकोट से लाया था। बस यहीं से पुलिस का शक गहराया। 12 अक्तूबर को मां-बेटी को थाने बुलाया गया। पूछताछ में खुशी टूट गई और उसने पूरी कहानी कबूल कर ली।
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जेल में जागती रही पूरी रात
पहली रात खुशी ने जेल में एक पल की भी नींद नहीं ली। जेलर अरुण कुमार ने बताया कि खुशी और उसकी मां को महिला बैरक में रखा गया है। खुशी की काउंसलिंग कराई जा रही है। खुशी गुमसुम रहती है और कहती है कि अब तो कुछ भी बाकी नहीं, मेरा बचपन, मेरी पढ़ाई और भविष्य सब खत्म।