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Gorakhpur News: जीडीए की 15 कॉलोनियों के हस्तांतरण पर नगर निगम का इन्कार

Wed, 19 Feb 2025 01:17 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 19 Feb 2025 01:17 AM IST
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Gorakhpur News: Municipal Corporation refuses to transfer 15 colonies of GDA
बोर्ड बैठक में प्रस्ताव को पार्षदों ने बहुमत से किया नामंजूर
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गोरखपुर। जीडीए की 15 कॉलोनियों के हस्तांतरण को नगर निगम बोर्ड ने इन्कार कर दिया। पार्षदों ने इसका विरोध किया जिसके बाद इसे अस्वीकृत कर दिया गया। बृहस्पतिवार को गोरखपुर विकास प्राधिकरण की 127वीं बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव लाया जाएगा। इसमें यदि ये स्वीकृत हो भी गया तब भी हस्तांतरित नहीं हो सकेगा।
अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्र ने सोमवार को निगम सदन की 10वीं बैठक में प्राधिकरण द्वारा निर्मित विभिन्न कॉलोनियों को नगर निगम गोरखपुर को हस्तांतरण किए जाने के संबंध में प्रस्ताव लाया। इसमें वसुंधरा इन्क्लेव प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय आवासीय योजना, लोहिया इन्क्लेव आवासीय योजना, वैशाली आवासीय योजना, यशोधरा कुंज आवासीय योजना, अमरावती निकुंज आवासीय योजना, कारपोरेट योजना, बुद्ध विहार आवासीय योजना पार्ट-ए, बुद्ध विहार आवासीय योजना पार्ट-बी, बुद्ध विहार आवासीय योजना पार्ट-सी आम्रपाली आवासीय योजना, सिद्धार्थपुरम विस्तार आवासीय योजना, गौतम विहार विस्तार आवासीय योजना, शास्त्रीनगर योजना, गोलघर स्थित जीडीए टावर, लेक व्यू अपार्टमेंट शामिल हैं।
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प्रस्ताव में बताया कि निगम के निर्माण, जलकल, स्वास्थ्य, पथ प्रकाश और संपत्तिकर से संबंधित विभागों से प्रस्ताव प्रस्तुत कर प्राधिकरण से धनराशि की मांग की गई है ताकि इंफ्रास्ट्रक्चरल गैप को पूरा किया जा सके। बेतियाहाता से पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने प्रस्ताव का विरोध किया। कहा कि प्राधिकरण की कॉलोनियों में सीवर लाइन नहीं पड़ी है। प्राधिकरण भी कार्यदायी संस्था है, वह अपनी कॉलोनियों की सभी खामियां पूरा कर नगर निगम को सौंपे। विश्वजीत के समर्थन में पार्षद शिवेंद्र मिश्रा, अजय राय, सौरभ विश्वकर्मा, शाश्वत अग्रवाल, पूनम सिंह, पिंटू सिंह समेत अन्य ने भी विरोध कर अस्वीकृत कर दिया। 22 नवंबर को ही नगर निगम में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन और नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के नेतृत्व में बैठक हुई थी जिसमें कॉलोनियों के हस्तांतरण पर सहमति बन गई थी। सात दिसंबर 2024 तक काॅलोनियों के हस्तांतरण को लेकर अभिलेख संबंधी कार्रवाई भी पूरी होनी थी।
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काॅलोनियों के हस्तांतरण से प्राधिकरण, नगर निगम के साथ ही वहां रहने वाले हजारों परिवारों को भी लाभ होगा। काॅलोनियों की बार-बार मरम्मत में आने वाला प्राधिकरण का खर्च बचेगा तो वहीं, नगर निगम संपत्तिकर वसूलने के साथ रखरखाव भी करता।
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