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Gorakhpur News: चार साल में ही एमजीयूजी के पास उपलब्धियों की लंबी शृंखला
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक जुलाई को करेंगी अकादमिक भवन, ऑडिटोरियम, पंचकर्म केंद्र का लोकार्पण व गर्ल्स हॉस्टल का शिलान्यास
गोरखपुर। स्थापना के चार साल के भीतर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के नाम उपलब्धियों की लंबी शृंखला है। पूरे प्रदेश में इसकी पहचान समयानुकूल, रोजगारपरक शिक्षा तथा आधुनिक एवं प्राचीन चिकित्सा के संगम के रूप में सुदृढ़ हुई है। 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों लोकार्पित इस विश्वविद्यालय में एक जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन होने जा रहा है। राष्ट्रपति यहां अकादमिक भवन, करीब पंद्रह सौ लोगों के बैठने की क्षमता के ऑडिटोरियम, ग्यारह कॉटेज वाले विश्व स्तरीय पंचकर्म केंद्र का लोकार्पण और एक हजार क्षमता के गर्ल्स हॉस्टल का शिलान्यास करेंगी।
एमजीयूजी मॉडर्न मेडिकल एजुकेशन, आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा, नर्सिंग शिक्षा, फार्मेसी शिक्षा के साथ स्नातक और परा स्नातक के अत्याधुनिक रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के संचालन वाले एक बड़े राष्ट्रीय केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। यहां के आयुर्वेद कॉलेज में बीएएमएस की पढ़ाई विश्वविद्यालय स्थापना के पहले सत्र से ही हो गई थी। जबकि मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स का संचालन पिछले सत्र से हुआ है। यही नहीं, नर्सिंग एवं पैरा मेडिकल संकाय में दर्जनभर रोजगारदायी पाठ्यक्रम पूर्ण क्षमता से संचालित हैं। विश्वविद्यालय में एलॉयड हेल्थ साइंसेज फार्मेसी, एग्रीकल्चर, व्यवसाय प्रबंधन से संबंधित डिप्लोमा से लेकर मास्टर डिग्री तक के दो दर्जन पाठ्यक्रम संचालित हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह बताते हैं कि यहां के सभी पाठ्यक्रम रोजगारपरक हैं और उनकी बहुत मांग है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में यहां पाठ्यक्रम ऐसे हैं, जो समाज के लिए लाभकारी, विद्यार्थी के लिए सहज रोजगारदायी हैं। शिक्षा, चिकिसा, कृषि अनुसंधान, रोजगार व ग्राम्य विकास के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने कई संस्थानों के साथ एमओयू किया है। इन एमओयू के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में विश्व स्तरीय शोध अनुसंधान के साथ ही स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा।
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कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव कहते हैं कि विश्वविद्यालय की नींव में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व महंत अवेद्यनाथ के विचार हैं, जिनका मानना था कि दासता से मुक्ति, स्वावलंबन व सामाजिक विकास के लिए शिक्षा ही सबसे सशक्त माध्यम है। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ भी इसी वैचारिक परंपरा के संवाहक हैं। सीएम योगी की मंशा 2032 तक गोरखपुर को ''''''''नॉलेज सिटी'''''''' के रूप में ख्यातिलब्ध कराने की है और इसमें एमजीयूजी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को अग्रसर है।
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गोरखपुर। स्थापना के चार साल के भीतर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के नाम उपलब्धियों की लंबी शृंखला है। पूरे प्रदेश में इसकी पहचान समयानुकूल, रोजगारपरक शिक्षा तथा आधुनिक एवं प्राचीन चिकित्सा के संगम के रूप में सुदृढ़ हुई है। 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों लोकार्पित इस विश्वविद्यालय में एक जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन होने जा रहा है। राष्ट्रपति यहां अकादमिक भवन, करीब पंद्रह सौ लोगों के बैठने की क्षमता के ऑडिटोरियम, ग्यारह कॉटेज वाले विश्व स्तरीय पंचकर्म केंद्र का लोकार्पण और एक हजार क्षमता के गर्ल्स हॉस्टल का शिलान्यास करेंगी।
एमजीयूजी मॉडर्न मेडिकल एजुकेशन, आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा, नर्सिंग शिक्षा, फार्मेसी शिक्षा के साथ स्नातक और परा स्नातक के अत्याधुनिक रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के संचालन वाले एक बड़े राष्ट्रीय केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। यहां के आयुर्वेद कॉलेज में बीएएमएस की पढ़ाई विश्वविद्यालय स्थापना के पहले सत्र से ही हो गई थी। जबकि मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स का संचालन पिछले सत्र से हुआ है। यही नहीं, नर्सिंग एवं पैरा मेडिकल संकाय में दर्जनभर रोजगारदायी पाठ्यक्रम पूर्ण क्षमता से संचालित हैं। विश्वविद्यालय में एलॉयड हेल्थ साइंसेज फार्मेसी, एग्रीकल्चर, व्यवसाय प्रबंधन से संबंधित डिप्लोमा से लेकर मास्टर डिग्री तक के दो दर्जन पाठ्यक्रम संचालित हैं।
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विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह बताते हैं कि यहां के सभी पाठ्यक्रम रोजगारपरक हैं और उनकी बहुत मांग है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में यहां पाठ्यक्रम ऐसे हैं, जो समाज के लिए लाभकारी, विद्यार्थी के लिए सहज रोजगारदायी हैं। शिक्षा, चिकिसा, कृषि अनुसंधान, रोजगार व ग्राम्य विकास के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने कई संस्थानों के साथ एमओयू किया है। इन एमओयू के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में विश्व स्तरीय शोध अनुसंधान के साथ ही स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा।
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कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव कहते हैं कि विश्वविद्यालय की नींव में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व महंत अवेद्यनाथ के विचार हैं, जिनका मानना था कि दासता से मुक्ति, स्वावलंबन व सामाजिक विकास के लिए शिक्षा ही सबसे सशक्त माध्यम है। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ भी इसी वैचारिक परंपरा के संवाहक हैं। सीएम योगी की मंशा 2032 तक गोरखपुर को ''''''''नॉलेज सिटी'''''''' के रूप में ख्यातिलब्ध कराने की है और इसमें एमजीयूजी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को अग्रसर है।