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Gorakhpur News: नाथपंथ की परंपरा से जुड़े चिह्नों के संरक्षण के लिए बनाएं म्यूजियम

Sun, 15 Sep 2024 02:58 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2024 02:58 AM IST
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Gorakhpur News: Make a museum to preserve the symbols related to the tradition of Nathpanth.
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय ऋषियों-संतों की परंपरा सदैव जोड़ने वाली रही है। महायोगी गुरु गोरखनाथ की गुरुता भी सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए प्रतिष्ठित है। संत साहित्य की परंपरा, इसकी श्रृंखला गुरु गोरखनाथ के साहित्य से आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नाथपंथ की परंपरा से जुड़े चिह्नों के संरक्षण के लिए एक म्यूजियम की आवश्यकता है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के महायोगी गुरु गोरखनाथ शोधपीठ इस दिशा में पहल कर सकता है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन में ‘समरस समाज के निर्माण में नाथपंथ का अवदान’ विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने शोधपीठ से अपील की कि वह नाथपंथ की इनसाइक्लोपीडिया में नाथपंथ से जुड़े सभी पहलुओं, नाथ योगियों के चिह्नों को इकट्ठा करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि पीतांबर दत्त ने गोरखवाणी को संकलित किया और इसके लिए उन्हें हिंदी में डीलिट् की उपाधि प्राप्त हुई।
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सीएम योगी ने समाजिक समरसता और समतामूलक समाज को लेकर गोस्वामी तुलसीदास, मलिक मुहम्मद जायसी सहित संतों की पद्धतियों, साहित्य के कुछ उद्धरण भी दिए। उन्होंने कहा कि संत रामानंद ने उपासना विधि की एक विशिष्ट पद्धति को बढ़ाया, लेकिन छुआछूत को कभी महत्व नहीं दिया। एक तरफ रविदास उनके शिष्य थे तो दूसरी तरफ कबीरदास।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि संत-ऋषि परंपरा ने प्राचीन काल से ही समतामूलक और समरस समाज को महत्व दिया है। हमारे संत-ऋषि इस बात पर जोर देते हैं कि भौतिक अस्पृश्यता साधना के साथ राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए बाधक है। अस्पृश्यता को दूर करने के लिए ध्यान दिया गया होता तो देश कभी गुलाम नहीं होता।



तमिलनाडु में मिली नाथपंथ की पांडुलिपियां



सीएम योगी ने अयोध्या में गत दिनों तमिलनाडु के एक प्रमुख संत से हुई मुलाकात का उल्लेख करते हुए बताया कि उक्त संत से पता चला कि उन्हें तमिलनाडु के सुदूर क्षेत्रों में नाथपंथ की पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। यहां गोरखनाथ से जुड़े कई साधना स्थल और नाथपंथ की परंपराएं आज भी विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की परंपरा में जिस मंजूनाथ का उल्लेख आता है, वह मंजूनाथ गोरखनाथ ही हैं। महाराष्ट्र में संत ज्ञानेश्वर दास की परंपरा भी मत्स्येंद्रनाथ, गोरखनाथ और निवृत्तिनाथ की कड़ी है। महाराष्ट्र में रामचरितमानस की तर्ज पर नवनाथों की पाठ की परंपरा है। पंजाब, सिंध, त्रिपुरा, असम, बंगाल आदि राज्यों के साथ ही समूचे वृहत्तर भारत और नेपाल, बांग्लादेश, तिब्बत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान समेत अनेक देशों में नाथपंथ का विस्तार देखने को मिलेगा।



देश को जोड़ने की व्यावहारिक भाषा है हिंदी



मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी लोगों को राजभाषा हिंदी दिवस की बधाई देते हुए कहा कि हिंदी देश को जोड़ने की एक व्यावहारिक भाषा है। इसका मूल देववाणी संस्कृत है। मुख्यमंत्री ने भारतेंदु हरिश्चंद्र के ‘निज भाषा उन्नति’ वाले उद्धरण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र का भाषा के प्रति यह भाव आज भी आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि यदि भाव और भाषा खुद की नहीं होगी तो हर स्तर पर प्रगति बाधित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने देश को जोड़ने के लिए हिंदी को जिस रूप में देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है, वह अभिनंदनीय है।



सर्वसमाज के कल्याण का चिंतन पूंज है नाथपंथ : प्रो. श्रीप्रकाश मणि



विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि नाथपंथ सर्वसमाज के कल्याण का चिंतन पुंज है। यह ऐसा पंथ है जो सर्वसमाज के लिए है और सर्वसमाज का है। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि नाथपंथ के मूल में ही सामाजिक समरसता अनुप्राणित है। कहा कि आज समाज भाषावाद, जातिवाद, क्षेत्रवाद आदि के कारण खंडित हो रहा है। समाज में समरसता का भाव न होना राष्ट्रीयता के लिए संकट है। ऐसी परिस्थिति में नाथपंथ के विचार हमारे लिए पथप्रदर्शक हैं। उद्घाटन सत्र का संचालन आयोजन सचिव संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने किया।




इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव भाषा एवं हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एमपी अग्रवाल, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, प्रदीप शुक्ल, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पूर्व मेयर अंजू चौधरी, महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ के उपनिदेशक डॉ. कुशलनाथ मिश्र आदि उपस्थित रहे।
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