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Gorakhpur News: अभिलेखों में छेड़छाड़ के मामले में एसटीएफ जांच के लिए शासन को लिखा पत्र

Fri, 24 Oct 2025 01:13 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Oct 2025 01:13 AM IST
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Gorakhpur News: Letter written to the government for STF investigation in the case of tampering of records
गोरखपुर विश्वविद्यालय ने पहले ही बर्खास्त शिक्षिका पर कैंट थाने में दर्ज करा दिया है केस
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अभिलेखों में छेड़छाड़ की जांच के लिए विवि ने भी बनाई है कमेटी
गोरखपुर। शैक्षणिक अभिलेखों में छेड़छाड़ कर अंक बढ़ाने के मामले में गोरखपुर विश्वविद्यालय ने बर्खास्त शिक्षिका प्रीति जायसवाल और विवि के अज्ञात कर्मचारियों पर केस दर्ज कराया है। मामले की जांच अब एसटीएफ से कराने के लिए विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है। साथ ही इस तरह के अन्य मामलों की जांच के लिए विवि ने अपनी एक आंतरिक कमेटी भी बनाई है।
परीक्षा नियंत्रक कुलदीप सिंह की तहरीर पर प्रीति जायसवाल, डीडीयू के अभिलेख विभाग के कर्मचारी और सेंट एंड्रयूज कॉलेज के अज्ञात कर्मचारियों पर कैंट पुलिस ने केस दर्ज किया है। विश्वविद्यालय ने वर्ष 2000 से 2022 तक के सभी प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। इसमें दो-कर्मचारियों की मौत हो चुकी है।
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इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने सेंट एंड्रयूज कॉलेज को भी कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच एसटीएफ से कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भी लिखा है। इसके अलावा अंकपत्र में छेड़छाड़ और कागजों की हेराफेरी के मामलों की जांच के लिए विश्वविद्यालय ने एक आंतरिक कमेटी भी बनाई है। यह कमेटी अपनी जांच कर कुलपति को रिपोर्ट सौंपेगी।
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यह है मामला
डीडीयू के परीक्षा नियंत्रक डॉ. कुलदीप सिंह ने कैंट पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अंकपत्र सत्यापन की मांग के बाद कुलपति के आदेश पर गठित जांच समिति ने कैंट इलाके की रहने वाली प्रीति जायसवाल के बीए (वर्ष 1998, 1999, 2000) और बीएड (वर्ष 2001) के अभिलेखों की जांच की थी। समिति ने पाया कि सेंट एंड्रयूज कॉलेज केंद्र से संबद्ध बीए भाग तीन (2000) के अंक विश्वविद्यालय के गोपनीय अनुभाग में दर्ज अंकों से भिन्न हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय रिकॉर्ड में मनोविज्ञान विषय में क्रमशः 41, 06, 47 और 26 अंक दर्ज थे, जबकि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से उपलब्ध कराए गए अंकपत्र में इन्हें बढ़ाकर 62, 51, 57 और 34 अंक दिखाया गया है। इसी प्रकार राजनीति शास्त्र के अंकों में भी भारी अंतर पाया गया।
जांच समिति ने स्पष्ट किया कि यह अंकपत्र फर्जी एवं पूर्णतया फर्जी है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय के अभिलेख कक्ष में बीए भाग एक (1998) की सारणीकरण पंजिका का एक पृष्ठ (अनुक्रमांक 128671 से 128700 तक) गायब मिला, जबकि बीए भाग दो (1999) में अंकों से छेड़छाड़ और बीए भाग तीन (2000) में पृष्ठ बदला हुआ पाया गया।



वर्जन
अभिलेखों में छेड़छाड़ के मामले में एसटीएफ से जांच कराने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। इस तरह के जितने भी मामले हैं, उनकी जांच के लिए विशेष कमेटी बनाई गई है। जो भी दोषी होगा, उसपर सख्त कार्रवाई होगी। वहीं, फर्जी मार्कशीट के मामले की भी जांच की जा रही है।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय
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