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Gorakhpur News: सूर्यकुंड धाम पोखरे में ऑक्सीजन की कमी...फिर मरीं मछलियां
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मत्स्य विभाग के अनुसार धूप नहीं होने से पोखरे में रुक गई है प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया
नगर निगम की तरफ से पंपिंग सेट लगाकर पानी को निकालकर दोबारा भरा गया
गोरखपुर। सूर्यकुंड धाम पोखरे में गंदगी, ऊपर तल पर फैले तेल और धूप नहीं निकलने की वजह से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया ही रुक जा रही है। इसी वजह से शुक्रवार को भी तालाब में मछलियां मरीं। मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों ने पहुंचकर पोखरे में ताजा पानी डालने का सुझाव दिया। इसके बाद नगर निगम ने पंपिंग सेट लगाकर पानी निकालकर दोबारा तालाब में डाला।
जानकारी के अनुसार, छठ पूजा के अगले दिन पोखरे में मछलियों के मरने पर आसपास के लोगों ने मत्स्य विभाग और नगर निगम को सूचना दी थी। कर्मचारियों के सुझाव पर तालाब में केले का तना काटकर डाला गया। शुक्रवार को भी मछलियों के मरने का सिलसिला नहीं थमा तो जिला प्रशासन और नगर निगम को फिर सूचित किया गया।
सूर्यकुंड धाम जीर्णोद्धार समिति के अध्यक्ष अमरदीप गुप्ता ने बताया कि छठ पूजा के दौरान बारिश होने के कारण दीपक का तेल पोखरे की ऊपरी सतह पर फैल गया। बृहस्पतिवार से मछलियां मरने लगीं। शुक्रवार को भी मछलियां मरीं। लोगों ने बताया कि पूजन सामग्रियों के अलावा शादी-विवाह के अवशेषों को भी लोग पोखरे में फेंक देते हैं। समिति के सचिव शीतल कुमार मिश्रा ने अफसरों को सूचना दी। इसके बाद नगर निगम की ओर से तीन पंपिंग सेट लगाकर दूषित पानी को निकाल कर स्वच्छ पानी भरने का कार्य किया जा रहा है।
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वर्जन
सूर्यकुंड पोखरे में गंदगी है। पोखरे में मछलियों की संख्या अधिक है। तीन दिन तक धूप नहीं होने की वजह से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया रुक गई है, इसीलिए मछलियां मर रही हैं। पोखरे से मछलियां निकालकर उन्हें नदी में छोड़ना होगा। इसके अलावा ताल की सफाई करानी होगी।
- ब्रजेश कुमार, उप निदेशक मत्स्य
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नगर निगम की तरफ से पंपिंग सेट लगाकर पानी को निकालकर दोबारा भरा गया
गोरखपुर। सूर्यकुंड धाम पोखरे में गंदगी, ऊपर तल पर फैले तेल और धूप नहीं निकलने की वजह से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया ही रुक जा रही है। इसी वजह से शुक्रवार को भी तालाब में मछलियां मरीं। मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों ने पहुंचकर पोखरे में ताजा पानी डालने का सुझाव दिया। इसके बाद नगर निगम ने पंपिंग सेट लगाकर पानी निकालकर दोबारा तालाब में डाला।
जानकारी के अनुसार, छठ पूजा के अगले दिन पोखरे में मछलियों के मरने पर आसपास के लोगों ने मत्स्य विभाग और नगर निगम को सूचना दी थी। कर्मचारियों के सुझाव पर तालाब में केले का तना काटकर डाला गया। शुक्रवार को भी मछलियों के मरने का सिलसिला नहीं थमा तो जिला प्रशासन और नगर निगम को फिर सूचित किया गया।
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सूर्यकुंड धाम जीर्णोद्धार समिति के अध्यक्ष अमरदीप गुप्ता ने बताया कि छठ पूजा के दौरान बारिश होने के कारण दीपक का तेल पोखरे की ऊपरी सतह पर फैल गया। बृहस्पतिवार से मछलियां मरने लगीं। शुक्रवार को भी मछलियां मरीं। लोगों ने बताया कि पूजन सामग्रियों के अलावा शादी-विवाह के अवशेषों को भी लोग पोखरे में फेंक देते हैं। समिति के सचिव शीतल कुमार मिश्रा ने अफसरों को सूचना दी। इसके बाद नगर निगम की ओर से तीन पंपिंग सेट लगाकर दूषित पानी को निकाल कर स्वच्छ पानी भरने का कार्य किया जा रहा है।
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वर्जन
सूर्यकुंड पोखरे में गंदगी है। पोखरे में मछलियों की संख्या अधिक है। तीन दिन तक धूप नहीं होने की वजह से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया रुक गई है, इसीलिए मछलियां मर रही हैं। पोखरे से मछलियां निकालकर उन्हें नदी में छोड़ना होगा। इसके अलावा ताल की सफाई करानी होगी।
- ब्रजेश कुमार, उप निदेशक मत्स्य