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Gorakhpur News: कल आएगी आमी नदी के पानी की जांच रिपोर्ट, फैक्टरियों पर होगी कार्रवाई

Thu, 07 Nov 2024 01:41 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2024 01:41 AM IST
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Gorakhpur News: Investigation report of Aami river water will come tomorrow, action will be taken against factories
गोरखपुर। दिवाली के दिन काली हुई आमी नदी के पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम होने की आशंका है। इसकी जांच के लिए पानी का सैंपल भेजा गया है। उम्मीद है कि शुक्रवार को इसकी रिपोर्ट आएगी। इसके बाद नदी के किनारे स्थित फैक्टरियों को नोटिस भेजा जाएगा। नदी में प्रदूषित पानी गिराने वाली फैक्टरियों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
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बरसात में आमी नदी की सेहत सुधरी थी। लेकिन 30 अक्तूबर को अचानक नदी में किसी फैक्टरी से बड़ी मात्रा में दूषित पानी छोड़ दिया गया। अगले दिन मगहर से लेकर उनवल तक नदी का पानी एकदम काला पड़ गया। अगले दिन बड़ी मात्रा में मछलियां मरकर पानी के ऊपर बहने लगीं। नदी से उठती दुर्गंध के बाद लोगों ने इसकी शिकायत प्रशासन से की।
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बह रही मरी मछलियों को मछुआरों ने जाल डालकर निकाल लिया और नदी के किनारे सुखाकर बाजार में बेच दिया। मामला शासन स्तर तक पहुंचा, तब जाकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कर्मचारियों को भेजकर नदी के पानी का सैंपल मंगवाया। मौके पर गए कर्मचारियों ने भी देखा कि दुर्गंध के चलते नदी के किनारे रुकना कठिन हो गया था। जगह-जगह मरी मछलियां पड़ी थीं।
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अजीत कुमार सुमन ने बताया कि शुक्रवार तक रिपोर्ट आने की संभावना है। इसके बाद नदी के किनारे की फैक्टरियाें को नोटिस भेजकर जवाब मांगा जाएगा। पता कराया जा रहा है कि किस फैक्टरी का पानी नदी में छोड़ा गया था।

आंकड़ों में साफ है आमी, विशेषज्ञ जता रहे हैरानी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जनवरी से सितंबर तक आमी नदी के पानी की जो रिपोर्ट दी है, उससे विशेषज्ञ हैरत में हैं। एमएमएमयूटी के प्रोफेसर और पर्यावरणविद डॉ. गोविंद पांडेय बताते हैं कि नदी की रिपोर्ट में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा 7 से 8 मिलीग्राम प्रति लीटर के सर्वोच्च स्तर वाला दर्शाया गया है, जबकि इस पर तापमान और नदी में पाए जाने वाले कार्बनिक पादपों का सीधा असर होता है। मतलब यह कि तेज गर्मी पड़ने पर घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। आमी नदी का अब कोई प्राकृतिक जलस्रोत नहीं है। नदी में नालों और फैक्टरियों का दूषित पानी गिराया जाता है। जून में जब तापमान 40 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक होता है और नदी की तलहटी में पाए जाने वाले पादप भी ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं तो घुलित ऑक्सीजन कम होगा, लेकिन आंकड़ों में इस पर खास असर नहीं है। घुलित ऑक्सीजन की मात्रा 4 मिलीग्राम प्रति लीटर या उससे अधिक होने पर जलीय जीव नहीं मरते। ऐसा तभी होगा, जब घुलित ऑक्सीजन 3 से भी कम हो जाए, जबकि नदी के आंकड़े इससे कहीं बेहतर है। इसलिए विभाग की तरफ से उपलब्ध कराए गए आंकड़े और नदी की वर्तमान स्थिति में कोई तालमेल नहीं है।
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