फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Gorakhpur News: India's knowledge tradition is thousands of years old

Gorakhpur News: भारत की ज्ञान परंपरा हजारों वर्ष पुरानी

Sun, 07 Sep 2025 02:24 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 07 Sep 2025 02:24 AM IST
विज्ञापन
Gorakhpur News: India's knowledge tradition is thousands of years old
गोरखनाथ मंदिर स्थित महंत दिग्विजय नाथ स्मृति सभागार में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ महाराज और ब
ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित हुई संगोष्ठी
विज्ञापन


गोरखपुर। ऋग्वेद के मंत्र में कहा गया है कि भारतीय संस्कृति व ज्ञान परंपरा सबसे प्राचीन है जिसमें पूरे विश्व के कल्याण की कामना है। विश्व कल्याण की यह भावना भारत की सभी भाषाओं व साहित्य में उपलब्ध है। इसका उदाहरण कोरोना काल में हमने देखा कि भारत ने जो वैक्सीन बनाई, उसको उन लोगों को भी भेज दिया जिनसे राजनयिक संबंध भी नहीं थे। भारत के ऋषि कहते हैं कि हमारा ज्ञान अंतिम नहीं है। वह कहते हैं कि विश्व से जो भी विचार आएं, वह हमारे विचार से जुड़ जाएं।

ये बातें गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 56वीं एवं महंत अवेद्यनाथ की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय संगोष्ठी के दूसरे दिन ''''भारत की ज्ञान परंपरा'''' विषय पर बोलते हुए मुख्य वक्ता महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी बिहार के पूर्व कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कहीं। उन्होंने कहा कि आज समय है भारत को अपने अतीत से जुड़ने का। आज हमें अपने उन सब प्रकार की विद्याओं की भाषा देववाणी संस्कृत को जानने का भी समय है।
विज्ञापन

मुख्य अतिथि दुग्धेश्वरनाथ महादेव मठ गाजियाबाद के पीठाधीश्वर महंत नारायण गिरि ने कहा कि भारत भूमि ही ऐसी है जहां विश्व के कल्याण का उद्घोष किया जाता है। भारतीय ज्ञान परंपरा में वृक्षों, नदियों व पशु-पक्षियों में भी देवता की दृष्टि से उनकी पूजा करने का विधान है। मानव कल्याण के लिए गुरु गोरखनाथ ने षडदर्शन तथा हठयोग की परंपरा का विकास किया। यह भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रमुख अंग है। गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से लगातार सनातन संस्कृति व भारतीय ज्ञान परंपरा के उत्थान के लिए कार्य किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विशिष्ट वक्ता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संस्कृत विभाग के आचार्य प्रो. संतोष कुमार शुक्ल ने कहा कि भारतीयों की ओर से अपनी मातृभाषाओं और विशेषतः संस्कृत भाषा में सृजित समस्त ज्ञान ही भारतीय ज्ञान परंपरा कहलाता है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों में रोम, यूनान (ग्रीस), चीन तथा कई अन्य देशों से विद्यार्थी आकर अध्ययन करते थे।
काशी से आए जगतगुरु विष्णुस्वामी संप्रदायाचार्य संतोषाचार्य ''''सतुआ बाबा'''' ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा ने जिन-जिन आचार्यों को तैयार किया, वे न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया को सुखी व समृद्ध रखने का सूत्र दिया है। गोरक्षपीठ में भारत की ज्ञान परंपरा का ध्वज हमेशा लहराता रहता है।


भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व पटल पर लाने का कार्य कर रही गोरक्षपीठ
हनुमानगढ़ी अयोध्या से आए महंत राजूदास ने कहा कि गोरक्षपीठ निरंतर भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व पटल पर लाने का कार्य करती रही है। आगरा से आए ब्रह्मचारी दासलाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा वेद मूलक है। स्वागत एवं प्रस्ताविकी करते हुए महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सदस्य डॉ. रामजन्म सिंह ने कहा कि हमारे गुरुकुलों में 14 प्रकार की विद्याओं की शिक्षा दी जाती थी। वैदिक मंगलाचरण डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी, गोरक्षाष्टक पाठ आदित्य पांडेय तथा संचालन डॉ. भगवान सिंह ने किया। कार्यक्रम में अयोध्या से महंत राम लखन दास, महंत रवींद्र दास, महंत राम मिलन दास, चित्रकूट से महंत शशिभूषणदास, देवीपाटन से महंत मिथिलेशनाथ प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed