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Gorakhpur News: पता नहीं कैसे मासूमाें को मार डाला..कलेजा भी नहीं कांपा

Wed, 09 Oct 2024 05:20 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 09 Oct 2024 05:20 AM IST
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Gorakhpur News: 
I don't know how innocent people were killed... even my heart didn't tremble
गोरखपुर। बिंदु ने जो किया है, भगवान भी उसे माफ नहीं करेंगे। उसे बच्चियों को नहीं मारना चाहिए था। पता नहीं कैसे मार डाली, उसका कलेजा भी नहीं कांपा। इसी रास्ते रोजाना बच्चियां जाती थीं। अब यहां के बच्चे भी खोजते हैं कि शीतल और नैना कहां गईं। अपने साथ एक और मां की गोद को भी सूना कर दिया। ठीक हुआ कि वह अब इस दुनिया में नहीं है वरना यह कलंक झेली नहीं पाती।
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गोरखनाथ इलाके के पार्वतीपुरम मोहल्ले में मासूम बेटी और भतीजी की हत्या कर ट्रेन के आगे कूदने वाली बिंदु की मौत के बाद ऐसी ही चर्चा हो रही है। मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे मोहल्ले में एक गुमटी के पास बैठीं महिलाएं बिंदु और उसके घरवालों के बारे में जिक्र कर रही थीं। शोभा ने कहा कि बिंदु और उसका परिवार मोहल्ले के लोगों से कम ही मतलब रखते हैं। रोज शाम को बच्चों को इसी रास्ते वह ले जाती थी। कभी किसी से बात नहीं करती थी, पर घर में उसके झगड़े और चिल्लाने से पूरा मोहल्ला परेशान था।
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बगल में बैठीं देवी ने कहा- स्कूल से आने के बाद बच्चे दोनों मासूम शीतल और नैना के बारे में पूछते हैं। सही कहें तो इस घटना से हर कोई डर गया है। अब किस पर कोई भरोसा करें। कुछ पल के लिए बच्चे घर से दूर जा रहे हैं तो लोग उन्हें खोजना शुरू कर दे रहे हैं।
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पास में बैठी महिलाएं बिंदु को कोसने लगीं। बिंदू के घर जाने वाले रास्ते पर एक पेड़ के किनारे तीन-चार लोग खड़े थे। रमेश ने कहा कि खुद तो चली गई, दो मासूमों को भी ले गई। पता नहीं, क्या सनक सवार था उस पर। इस पर अजय ने कहा-अगर उसका सही से इलाज हुआ होता तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं घटती। मुझे तो अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि शीतल और नैना नहीं रहे। घर के बच्चे उनके साथ खेलते थे, अब उन्हें कैसे समझाएं कि वे अब कभी खेलने नहीं आएंगे।
बातचीत
बिंदु के मन में क्या चल रहा था वही जाने पर उसने परिवार को बर्बाद कर दिया। वह कभी लोगों से बात नहीं करती थी। अपने काम से मतलब रखती थी। मैं तो बहुत डर गई हूं, इस घटना के बाद से ही अपने बहू से रोज बात करती हूं।
गंगा देवी
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इस घटना ने सभी को डरा दिया है। सामान्य से दिखने वाले व्यक्ति के अंदर क्या चल रहा है, यह कैसे पता चलेगा। लोगों को बच्चों की चिंता ज्यादा बढ़ गई है।
डब्लू गुप्ता

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बच्चों के बीमार होने पर तुरंत लेकर भागती थी अस्पताल

बिंदु के घर पर परिवार के लोग गुमसुम बैठे थे। देवर खुशवंत ने कहा-भाभी दोनों बच्चियों को बहुत प्यार करती थीं। बच्चे अगर बीमार हो जाएं तो उन्हें सबसे पहले अस्पताल लेकर भागती थीं। उनका व्यवहार कभी अच्छा रहता था, तो कभी लड़ने-झगड़ने लगती थीं। रातभर सोती नहीं थी। पति रवि ने बताया-बिंदु को डॉक्टर से लेकर सोखा तक के पास गए। उसके इलाज में पांच लाख रुपये भी खर्च हो गए। उसे अपनी दवाओं और डॉक्टर के बारे में जानकारी रहती थी। अक्सर दवाओं के लिए पैसे मांगा करती थी। जिद्दी बहुत थी, जो बात एक बार कह देती, उसे पूरा करके ही मानती थी। ननद नेहा बोल पड़ी- अब ज्यादा क्या कहा जाए। उसने ऐसा कदम उठा दिया जो जीवन भर दुख देता रहेगा, आखिर उन मासूमों का क्या कसूर था।

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नैना के जन्म के बाद से बदल गया था व्यवहार
बिंदु की मां रूक्मिणी ने फोन पर बताया-पहले बिंदु ऐसी नहीं थी। उसने किसी तरह की जिद भी नहीं की। नैना के जन्म के बाद से उसका व्यवहार बदल गया था। तभी से उसका इलाज चल रहा था। अक्सर फोन किया करती थी, हालचाल और मेरी दवाओं के बारे में पूछती थी। अंतिम बार रक्षाबंधन पर बिना बताए आई थी। अपने मन से आती- जाती थी। कभी ससुराल की किसी परेशानी के बारे में नहीं बताया। दो दिन पहले ही उससे बात हुई थी।
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