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Gorakhpur News: डूब क्षेत्र में कैसे बन रहे मकान-दुकान-सरकारी अस्पताल...खंगाले जा रहे दस्तावेज
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एक्शन शुरूः जीडीए उपाध्यक्ष ने अवैध निर्माण की सीलिंग और ध्वस्तीकरण के दिए निर्देश
प्रभारी मुख्य अभियंता की अगुवाई में टीम ने हार्बर्ट बांध के किनारे हुए निर्माण को ध्वस्त कराया
डीएम ने पूरे मामले पर मांगी है रिपोर्ट, एनजीटी के नोटिस के बाद चर्चा में आया है प्रकरण
गोरखपुर। राप्ती नदी के डूब क्षेत्र में मकान और दुकानों के अलावा सरकारी अस्पताल निर्माण का मामला सामने आने के बाद जीडीए ने पुराना रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। प्रारंभिक छानबीन में पता चला है कि 50 बेड वाला आयुर्वेदिक अस्पताल 2022 में यहां स्वीकृत हुआ था। आयुर्वेद विभाग से इससे जुड़ी और जानकारी मांगी गई है। इसके लिए जीडीए ने डूब क्षेत्र में बन रहे नए मकानों-दुकानों को नोटिस देना शुरू कर दिया है। अवैध प्लाटिंग ध्वस्त कराई जा रहीं हैं। इससे डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। जीडीए के अभियंता अवैध निर्माण की पूरी सूची तैयार कर रहे हैं।
नदियों-जलाशयों के प्राकृतिक स्वरूप को बचाए रखने के लिए उनके प्रवाह क्षेत्र को साफ रखना जरूरी है। पर्यावरणविद् नदी को भी एक जीवित इकाई मानते हैं। कहा जाता है कि नदी के प्रवाह क्षेत्र में अगर अवरोध होता है, वह अपने लिए नए रास्ते तलाश करती है। ऐसा होने पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, अधिकांश जगह नदियों के प्रवाह क्षेत्र में लोगों ने घर बना लिए हैं। इस स्थिति को देखते हुए एनजीटी ने डूब क्षेत्र में निर्माण पर रोक लगा रखी है। गोरखपुर में भी राप्ती नदी के दोनों किनारे डूब क्षेत्र के रूप में चिन्हित हैं, जिस पर प्रतिबंध के बावजूद कई अवैध कालोनियां विकसित हो गईं हैं। लालडिग्गी के सामने हार्बर्ट बांध के दूसरी तरफ 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल निर्माणाधीन है। प्रकरण चर्चा में आने के बाद अब इस अस्पताल समेत अन्य अवैध निर्माण की पत्रावलियां खंगाली जा रही हैं।
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डूब क्षेत्र में ऑक्सीजन प्लांट के लिए बनाया था प्लॉट, चला बुलडोजर
गोरखपुर। डूब क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण और प्लाटिंग पर जीडीए ने सख्त रुख अपनाया है। उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन के निर्देश पर जीडीए की टीम ने बृहस्पतिवार को राजघाट क्षेत्र के बसंतपुर और मंझरिया इलाके में कई अवैध निर्माणों को ध्वस्त कराया। प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह की अगुवाई में बनी टीम ने बसंतपुर में परमानंद साहनी की ओर से की जा रही अवैध प्लाटिंग और बाउंड्रीवाल को तोड़ दिया। उल्लेखनीय है कि इस स्थल पर 2 मार्च 2024 को भी कार्रवाई की गई थी, इसके बावजूद पुनः निर्माण किया जा रहा था। इसी प्रकार मंझरिया में करीब 1200 वर्ग मीटर भूमि पर की जा रही अवैध प्लाटिंग ध्वस्त की गई। टीम ने ईंटों से किए गए डिमार्केशन को हटाकर कार्रवाई पूरी की। घुनघुन कोठा रोड पर दीपक सिंह की ओर से तीन एकड़ भूमि को बड़े भूखंडों में विभाजित कर ‘ऑक्सीजन प्लांट’ के नाम से विकसित करने की प्रक्रिया पर भी रोक लगाई गई। उपेंद्र की ओर से 220 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बन रहे व्यावसायिक निर्माण और गोविंद कुमार साहनी की ओर से 150 वर्ग मीटर में बन रहे भवन पर भी कार्रवाई की गई। टीम ने आठ अन्य अनधिकृत निर्माणों को भी चिह्नित किया है, जिनके विरुद्ध चालान की कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन की ओर से नामित मजिस्ट्रेट, क्षेत्रीय पुलिस बल और पीएसी के सहयोग से यह पूरी कार्यवाही सम्पन्न हुई।
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कोट
महायोजना-2031 में चिन्हित डूब क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे सभी अवैध निर्माणों को या तो तत्काल ध्वस्त किया जाएगा या चालान की कार्रवाई की जाएगी। यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि अब तक कितने लोगों ने डूब क्षेत्र में अवैध मकान बना रखे हैं। इन सब पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए
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प्रभारी मुख्य अभियंता की अगुवाई में टीम ने हार्बर्ट बांध के किनारे हुए निर्माण को ध्वस्त कराया
डीएम ने पूरे मामले पर मांगी है रिपोर्ट, एनजीटी के नोटिस के बाद चर्चा में आया है प्रकरण
गोरखपुर। राप्ती नदी के डूब क्षेत्र में मकान और दुकानों के अलावा सरकारी अस्पताल निर्माण का मामला सामने आने के बाद जीडीए ने पुराना रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। प्रारंभिक छानबीन में पता चला है कि 50 बेड वाला आयुर्वेदिक अस्पताल 2022 में यहां स्वीकृत हुआ था। आयुर्वेद विभाग से इससे जुड़ी और जानकारी मांगी गई है। इसके लिए जीडीए ने डूब क्षेत्र में बन रहे नए मकानों-दुकानों को नोटिस देना शुरू कर दिया है। अवैध प्लाटिंग ध्वस्त कराई जा रहीं हैं। इससे डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। जीडीए के अभियंता अवैध निर्माण की पूरी सूची तैयार कर रहे हैं।
नदियों-जलाशयों के प्राकृतिक स्वरूप को बचाए रखने के लिए उनके प्रवाह क्षेत्र को साफ रखना जरूरी है। पर्यावरणविद् नदी को भी एक जीवित इकाई मानते हैं। कहा जाता है कि नदी के प्रवाह क्षेत्र में अगर अवरोध होता है, वह अपने लिए नए रास्ते तलाश करती है। ऐसा होने पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, अधिकांश जगह नदियों के प्रवाह क्षेत्र में लोगों ने घर बना लिए हैं। इस स्थिति को देखते हुए एनजीटी ने डूब क्षेत्र में निर्माण पर रोक लगा रखी है। गोरखपुर में भी राप्ती नदी के दोनों किनारे डूब क्षेत्र के रूप में चिन्हित हैं, जिस पर प्रतिबंध के बावजूद कई अवैध कालोनियां विकसित हो गईं हैं। लालडिग्गी के सामने हार्बर्ट बांध के दूसरी तरफ 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल निर्माणाधीन है। प्रकरण चर्चा में आने के बाद अब इस अस्पताल समेत अन्य अवैध निर्माण की पत्रावलियां खंगाली जा रही हैं।
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डूब क्षेत्र में ऑक्सीजन प्लांट के लिए बनाया था प्लॉट, चला बुलडोजर
गोरखपुर। डूब क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण और प्लाटिंग पर जीडीए ने सख्त रुख अपनाया है। उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन के निर्देश पर जीडीए की टीम ने बृहस्पतिवार को राजघाट क्षेत्र के बसंतपुर और मंझरिया इलाके में कई अवैध निर्माणों को ध्वस्त कराया। प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह की अगुवाई में बनी टीम ने बसंतपुर में परमानंद साहनी की ओर से की जा रही अवैध प्लाटिंग और बाउंड्रीवाल को तोड़ दिया। उल्लेखनीय है कि इस स्थल पर 2 मार्च 2024 को भी कार्रवाई की गई थी, इसके बावजूद पुनः निर्माण किया जा रहा था। इसी प्रकार मंझरिया में करीब 1200 वर्ग मीटर भूमि पर की जा रही अवैध प्लाटिंग ध्वस्त की गई। टीम ने ईंटों से किए गए डिमार्केशन को हटाकर कार्रवाई पूरी की। घुनघुन कोठा रोड पर दीपक सिंह की ओर से तीन एकड़ भूमि को बड़े भूखंडों में विभाजित कर ‘ऑक्सीजन प्लांट’ के नाम से विकसित करने की प्रक्रिया पर भी रोक लगाई गई। उपेंद्र की ओर से 220 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बन रहे व्यावसायिक निर्माण और गोविंद कुमार साहनी की ओर से 150 वर्ग मीटर में बन रहे भवन पर भी कार्रवाई की गई। टीम ने आठ अन्य अनधिकृत निर्माणों को भी चिह्नित किया है, जिनके विरुद्ध चालान की कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन की ओर से नामित मजिस्ट्रेट, क्षेत्रीय पुलिस बल और पीएसी के सहयोग से यह पूरी कार्यवाही सम्पन्न हुई।
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महायोजना-2031 में चिन्हित डूब क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे सभी अवैध निर्माणों को या तो तत्काल ध्वस्त किया जाएगा या चालान की कार्रवाई की जाएगी। यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि अब तक कितने लोगों ने डूब क्षेत्र में अवैध मकान बना रखे हैं। इन सब पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए