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Gorakhpur News: होली में रंग और खानपान ने बिगाड़ी सेहत, पहुंचे अस्पताल
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होली के बाद नेत्र, मेडिसिन और इमरजेंसी विभाग में पहुंचे मरीज
रंगों से एलर्जी, उल्टी, दस्त, शराब के नशे में एक्सीडेंट के कारण वार्डों और इमरजेंसी में भीड़
गोरखपुर। होली त्योहार के दौरान खानपान और रंगों के अत्यधिक उपयोग ने लोगों की तबीयत खराब कर दी है। होली के दिन से लेकर शनिवार तक जिले के विभिन्न अस्पतालों की आपातकालीन विभाग में मरीजों की भीड़ रही। शनिवार के दिन सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में मरीजों को दिखाने की लंबी लाइन लगी रही।
एम्स, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में फूड प्वॉइजनिंग से उल्टी-दस्त, पेट दर्द, रंगों से आंखों एवं त्वचा पर एलर्जी और नशे और मारपीट में लगी चोट का इलाज कराने के लिए लोग पहुंचे। अस्पताल में पहुंचे मरीजों में सबसे ज्यादा होली पर बने पकवानों के बेहिसाब और अव्यवस्थित तौर से खाने के कारण बीमार पड़े। कई मरीजों में फूड प्वॉइजनिंग के लक्षण भी मिले। ऐसे मरीजों को दवा देकर घर भेजा गया।
इसके बाद हुड़दंग में मारपीट और रंगों से आंख और त्वचा पर हुई एलर्जी के मामले ज्यादा रहे। एम्स के इमरजेंसी इंचार्ज डॉ. अरुण पांडे ने बताया कि होली के दिन 131 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें से 70 मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि 13 को भर्ती किया गया। गंभीर मामलों में आए छह मरीजों को वेंटीलेटर स्पोर्ट पर रखा गया। इसके अलावा दो मरीज बोन फ्रैक्चर के भर्ती किए गए। एम्स में शनिवार की शाम तक 100 से ज्यादा मरीज आए। इनमें से अधिकतर मरीजों की आंखों में रंगों के कारण जलन और त्वचा में एलर्जी, पेट दर्द और दस्त की शिकायत रहीं। डॉक्टरों ने सभी को आवश्यक दवाएं देकर घर भेज दिया।
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में होली के दिन से शनिवार दोपहर कुल 130 मरीज पहुंचे। इनमें से अधिकांश मरीजों को उल्टी-दस्त, पेट में दर्द, एसीडिटी, चक्कर आने की शिकायत रही। इमरजेंसी वार्ड में तैनात ईएमओ डॉ. सहजवाज हुसैन ने बताया कि पांच एक्सीडेंट केस भी आए। सभी की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। अधिकतर मरीज रंगो के दुष्प्रभाव, खराब खानपान, अधिक मिठाइयों के सेवन के कारण बीमार पड़े। इसके अलावा 212 मरीज एंटी-रैबीज (एआरवी) वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंचे। शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 1175 मरीजों ने पंजीकरण करया। इसमें सबसे ज्यादा भीड़ चर्मरोग और मेडिसिन विभाग में रही। जिला महिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. जय कुमार ने बताया कि 21 गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया गया, जिनमें से सात की डिलीवरी शनिवार को हुई। वहीं बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 14 मरीज गंभीर हालत में भर्ती किए गए, जिसमें से अधिकतर होली हुड़दंग, मारपीट और नशे के कारण घायल हुए। वहीं इमरजेसी, चर्मरोग विभाग और मेडिसिन विभाग में यहां भी मरीजों की संख्या आठ सौ के पार रही।
एम्स के डॉ. अरुण पांडेय ने बताया कि त्योहार के दौरान लोग अक्सर खानपान में लापरवाही बरतते हैं, जिससे खाद्य जनित बीमारियां, डिहाइड्रेशन और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। लोगों को साफ पानी पीना चाहिए। बाहर के खुले खाद्य पदार्थों और ज्यादा तला भुना हुआ भोजन से बचना चाहिए। तेज रफ्तार में वाहन नही चलाना चाहिए। नशे से दूर रहना चाहिए। त्योहार के बाद भी लोग अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और किसी भी परेशानी की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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रंगों से एलर्जी, उल्टी, दस्त, शराब के नशे में एक्सीडेंट के कारण वार्डों और इमरजेंसी में भीड़
गोरखपुर। होली त्योहार के दौरान खानपान और रंगों के अत्यधिक उपयोग ने लोगों की तबीयत खराब कर दी है। होली के दिन से लेकर शनिवार तक जिले के विभिन्न अस्पतालों की आपातकालीन विभाग में मरीजों की भीड़ रही। शनिवार के दिन सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में मरीजों को दिखाने की लंबी लाइन लगी रही।
एम्स, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में फूड प्वॉइजनिंग से उल्टी-दस्त, पेट दर्द, रंगों से आंखों एवं त्वचा पर एलर्जी और नशे और मारपीट में लगी चोट का इलाज कराने के लिए लोग पहुंचे। अस्पताल में पहुंचे मरीजों में सबसे ज्यादा होली पर बने पकवानों के बेहिसाब और अव्यवस्थित तौर से खाने के कारण बीमार पड़े। कई मरीजों में फूड प्वॉइजनिंग के लक्षण भी मिले। ऐसे मरीजों को दवा देकर घर भेजा गया।
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इसके बाद हुड़दंग में मारपीट और रंगों से आंख और त्वचा पर हुई एलर्जी के मामले ज्यादा रहे। एम्स के इमरजेंसी इंचार्ज डॉ. अरुण पांडे ने बताया कि होली के दिन 131 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें से 70 मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि 13 को भर्ती किया गया। गंभीर मामलों में आए छह मरीजों को वेंटीलेटर स्पोर्ट पर रखा गया। इसके अलावा दो मरीज बोन फ्रैक्चर के भर्ती किए गए। एम्स में शनिवार की शाम तक 100 से ज्यादा मरीज आए। इनमें से अधिकतर मरीजों की आंखों में रंगों के कारण जलन और त्वचा में एलर्जी, पेट दर्द और दस्त की शिकायत रहीं। डॉक्टरों ने सभी को आवश्यक दवाएं देकर घर भेज दिया।
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में होली के दिन से शनिवार दोपहर कुल 130 मरीज पहुंचे। इनमें से अधिकांश मरीजों को उल्टी-दस्त, पेट में दर्द, एसीडिटी, चक्कर आने की शिकायत रही। इमरजेंसी वार्ड में तैनात ईएमओ डॉ. सहजवाज हुसैन ने बताया कि पांच एक्सीडेंट केस भी आए। सभी की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। अधिकतर मरीज रंगो के दुष्प्रभाव, खराब खानपान, अधिक मिठाइयों के सेवन के कारण बीमार पड़े। इसके अलावा 212 मरीज एंटी-रैबीज (एआरवी) वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंचे। शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 1175 मरीजों ने पंजीकरण करया। इसमें सबसे ज्यादा भीड़ चर्मरोग और मेडिसिन विभाग में रही। जिला महिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. जय कुमार ने बताया कि 21 गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया गया, जिनमें से सात की डिलीवरी शनिवार को हुई। वहीं बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 14 मरीज गंभीर हालत में भर्ती किए गए, जिसमें से अधिकतर होली हुड़दंग, मारपीट और नशे के कारण घायल हुए। वहीं इमरजेसी, चर्मरोग विभाग और मेडिसिन विभाग में यहां भी मरीजों की संख्या आठ सौ के पार रही।
एम्स के डॉ. अरुण पांडेय ने बताया कि त्योहार के दौरान लोग अक्सर खानपान में लापरवाही बरतते हैं, जिससे खाद्य जनित बीमारियां, डिहाइड्रेशन और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। लोगों को साफ पानी पीना चाहिए। बाहर के खुले खाद्य पदार्थों और ज्यादा तला भुना हुआ भोजन से बचना चाहिए। तेज रफ्तार में वाहन नही चलाना चाहिए। नशे से दूर रहना चाहिए। त्योहार के बाद भी लोग अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और किसी भी परेशानी की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।