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हिंदी बाजार: सराफा की सबसे बड़ी मंडी बेजार...चारों तरफ गंदगी का अंबार
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व्यापारियों ने नगर निगम पर उपेक्षा का आरोप लगाया, बोले- नहीं हो रही सुनवाई
गोरखपुर। पूर्वांचल की सबसे बड़ी सराफा मंडी हिंदी बाजार दुर्व्यवस्था की शिकार हो गई है। जिधर भी जाइए, गंदगी का अंबार नजर आता है। चारों तरफ कूड़े के ढेर लगे हैं। व्यापारियों ने नगर निगम पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
व्यापारियों ने बताया कि गंदगी की वजह से बाजार की कई गलियों में पैदल चलना दूभर है। यूरिनल तक की व्यवस्था नहीं की गई है। बाजार में आने वाली आधी आबादी को इससे दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। कूड़ेदान की व्यवस्था नहीं होने से दुकानों का कचरा सड़क पर पड़ा रहता है। नगर निगम की तरफ से बाजार में कूड़ेदान या दुकानों पर संपर्क कर कूड़ा अलग रखने और सुबह उठाने का इंतजाम नहीं है। कभी-कभार ही कूड़ा उठाने वाली गाड़ी आती है।
वर्जन
हिंदी बाजार में एक भी जगह कूड़ेदान या साफ-सफाई के इंतजाम नहीं हैं। अंबे गहना, लखन चंद गली के अलावा अन्य गलियों में तो गंदगी का अंबार लगा है। नगर निगम की लापरवाही से ही रामलीला मंचन करने वाले कलाकारों को डेंगू की बीमारी तक हो गई थी।
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-गणेश वर्मा, अध्यक्ष सराफा मंडल
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गोरखपुर। पूर्वांचल की सबसे बड़ी सराफा मंडी हिंदी बाजार दुर्व्यवस्था की शिकार हो गई है। जिधर भी जाइए, गंदगी का अंबार नजर आता है। चारों तरफ कूड़े के ढेर लगे हैं। व्यापारियों ने नगर निगम पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
व्यापारियों ने बताया कि गंदगी की वजह से बाजार की कई गलियों में पैदल चलना दूभर है। यूरिनल तक की व्यवस्था नहीं की गई है। बाजार में आने वाली आधी आबादी को इससे दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। कूड़ेदान की व्यवस्था नहीं होने से दुकानों का कचरा सड़क पर पड़ा रहता है। नगर निगम की तरफ से बाजार में कूड़ेदान या दुकानों पर संपर्क कर कूड़ा अलग रखने और सुबह उठाने का इंतजाम नहीं है। कभी-कभार ही कूड़ा उठाने वाली गाड़ी आती है।
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हिंदी बाजार में एक भी जगह कूड़ेदान या साफ-सफाई के इंतजाम नहीं हैं। अंबे गहना, लखन चंद गली के अलावा अन्य गलियों में तो गंदगी का अंबार लगा है। नगर निगम की लापरवाही से ही रामलीला मंचन करने वाले कलाकारों को डेंगू की बीमारी तक हो गई थी।
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-गणेश वर्मा, अध्यक्ष सराफा मंडल