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Gorakhpur News: सॉरी मम्मी-पापा! मेरा समय खत्म... मुझे 18 साल के लिए ही माता रानी ने भेजा था
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इंटर में पढ़ने वाली अदिति मिश्रा के शव के पास से मिले सुसाइड नोट को पढ़कर रोया हर कोई
दो दिन पहले मेंहदावल स्थित घर से आई थी अदिति
गोरखपुर। सॉरी मम्मी-पापा! मुझसे कुछ नहीं हो पाया, न तो अब हो पाएगा। आप लोग अच्छे हैं, हमेशा सपोर्ट किए, मुझसे हमेशा प्यार किया, लेकिन मेरा समय अब खत्म हो चुका है। ऐसा समझिए कि माता रानी ने बस 18 साल के लिए ही मुझे भेजा था। इतने साल मेरे लिए स्वर्ग था, मुझे आप लोगों के रूप में भगवान जो मिल गए थे।
ये बातें अदिति मिश्रा ने एक पन्ने के सुसाइड नोट में लिखा है। इसे पढ़कर घरवालों के साथ ही हर कोई रोया। अदिति ने सुसाइड नोट में माता-पिता को संबोधित करते हुए लिखा है-आप लोग इतने अच्छे हैं, मैं आप लोगों को डिजर्व नहीं करती। आपकी एक भी उम्मीद पर खरी नहीं उतरी हूं। हमेशा आपके विश्वास को तोड़ा है। लेकिन अब आप लोग कृपया रोइएगा मत, यह मेरी आपसे लास्ट विश है, आप लोग हमेशा खुश रहिएगा।
आपके पास मेरी छोटी बहन तृप्ति है, वो आप लोगों के सारे सपने पूरे करेगी। मेरा सफर यहीं तक था, लेकिन आप लोग को अभी बहुत कुछ देखना बाकी है। तृप्ति को सफल बनाना है। मैं बहुत प्यार करती हूं, वादा कीजिए कि आप हमेशा खुश रहेंगे। किसी एक के जाने से जिंदगी रुकती नहीं है।
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पापा आपसे, मां तुमसे, तृप्ति, अम्मा, बुआ, भैया, मातीरिया वाली चाची, छोटे बाबा, राजू चाचा, महिमा चाची, काव्या, अनमोल, उज्जवल, गुड़िया चाची, दीपू चाचा, उषा चाची, अनिल चाचा, तान्या, रिया, माही, सानू, श्रेया, संयोगिता चाची, दादी, सोनौरा वाले बाबा और अपने गांव व घर से बहुत प्यार करती हूं। बस अपने आप से प्यार नहीं कर पाई...आपकी रिमझिम। (अदिति को घर पर लोग प्यार से रिमझिम बुलाते थे।)
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लौट आओ बेटी...नहीं रह पाऊंगी
संतकबीरनगर के मेंहदावल स्थित कस्बे में पिता अजय के मोबाइल फोन पर दोपहर करीब 12:45 बजे बेटी की मौत की खबर आई। इसके बाद अजय, पत्नी विभा मिश्रा और अन्य रिश्तेदारों के साथ अपराह्न 02:45 बजे बेतियाहाता स्थित गर्ल्स हॉस्टल पहुंचे। वहां पर बेटी का शव काले कपड़े में लिपटा देकर विभा मिश्रा लिपटकर चीखकर रोने लगीं। वह बार-बार कह रही थीं-बेटी लौट आओ, मैं नहीं रह पाऊंगी। वहीं पिता अजय सिर पर हाथ रखकर बैठ गए।
साहब! बेटी का चीर-फाड़ न करवाइएगा
पिता अजयनाथ मिश्रा बेटी के शव के सामने बैठकर रो रहे थे। अचानक पुलिस को देखकर वह खड़े हो गए। हाथ जोड़कर निवेदन करने लगे-साहब! बेटी का चीर-फाड़ मत करवाइएगा। बहुत प्यार से बेटी को पाला। कभी उसे कोई परेशानी नहीं होने दी। यह कहकर काफी देर तक वह पुलिस से पोस्टमार्टम नहीं कराने का निवेदन करते रहे। फिर थाना प्रभारी और रिश्तेदारों के समझाने पर वह पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुए।
कमरा नंबर 86 में रहती थी अदिति
बेतियाहाता स्थित गर्ल्स हॉस्टल में अदिति कमरा नंबर 86 में रहती थी। हॉस्टल में कुल 12-13 कमरे हैं। इसमें 25 के करीब छात्राएं तैयारी कर रही हैं। वहां रहने वाली छात्राएं अदिति की मौत पर हतप्रभ थीं। एक दूसरे को पकड़ कर बार-बार रोने लग रही थीं। छात्राओं ने बताया-अदिति लोगों से ज्यादा मतलब नहीं रखती थी। वह हमेशा अपने में ही खोई रहती थी। वहीं उसके साथ कमरे में रहने वाली छात्रा ने बताया कि उससे भी वह कम ही बात करती थी। दो दिन पहले ही अदिति मेंहदावल स्थित घर से वापस आई थी।
आईएएस बनना चाहती थी अदिति
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पास रहने वाली अदिति की मौसी कल्पना और मौसा सूर्यनाथ मिश्रा घटना के कुछ ही देर बाद वहां पहुंच गए। मौसी ने कहा कि मंगलवार को जेईई मेन के रिजल्ट आने पर उनकी बात अदिति से हुई थी। उसने कहा था कि सफल नहीं हुई तो क्या हुआ, आगे आईएएस की तैयारी करेगी। वह शुरू से ही आईएएस बनना चाहती थी। अदिति के मौसा बोले-जब तबीयत खराब होती थी तब हमलोग उसे डॉक्टर को दिखाते थे। बोला भी था कि जब भी कोई परेशानी हो वह उनके घर चली आए।
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दो दिन पहले मेंहदावल स्थित घर से आई थी अदिति
गोरखपुर। सॉरी मम्मी-पापा! मुझसे कुछ नहीं हो पाया, न तो अब हो पाएगा। आप लोग अच्छे हैं, हमेशा सपोर्ट किए, मुझसे हमेशा प्यार किया, लेकिन मेरा समय अब खत्म हो चुका है। ऐसा समझिए कि माता रानी ने बस 18 साल के लिए ही मुझे भेजा था। इतने साल मेरे लिए स्वर्ग था, मुझे आप लोगों के रूप में भगवान जो मिल गए थे।
ये बातें अदिति मिश्रा ने एक पन्ने के सुसाइड नोट में लिखा है। इसे पढ़कर घरवालों के साथ ही हर कोई रोया। अदिति ने सुसाइड नोट में माता-पिता को संबोधित करते हुए लिखा है-आप लोग इतने अच्छे हैं, मैं आप लोगों को डिजर्व नहीं करती। आपकी एक भी उम्मीद पर खरी नहीं उतरी हूं। हमेशा आपके विश्वास को तोड़ा है। लेकिन अब आप लोग कृपया रोइएगा मत, यह मेरी आपसे लास्ट विश है, आप लोग हमेशा खुश रहिएगा।
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आपके पास मेरी छोटी बहन तृप्ति है, वो आप लोगों के सारे सपने पूरे करेगी। मेरा सफर यहीं तक था, लेकिन आप लोग को अभी बहुत कुछ देखना बाकी है। तृप्ति को सफल बनाना है। मैं बहुत प्यार करती हूं, वादा कीजिए कि आप हमेशा खुश रहेंगे। किसी एक के जाने से जिंदगी रुकती नहीं है।
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पापा आपसे, मां तुमसे, तृप्ति, अम्मा, बुआ, भैया, मातीरिया वाली चाची, छोटे बाबा, राजू चाचा, महिमा चाची, काव्या, अनमोल, उज्जवल, गुड़िया चाची, दीपू चाचा, उषा चाची, अनिल चाचा, तान्या, रिया, माही, सानू, श्रेया, संयोगिता चाची, दादी, सोनौरा वाले बाबा और अपने गांव व घर से बहुत प्यार करती हूं। बस अपने आप से प्यार नहीं कर पाई...आपकी रिमझिम। (अदिति को घर पर लोग प्यार से रिमझिम बुलाते थे।)
लौट आओ बेटी...नहीं रह पाऊंगी
संतकबीरनगर के मेंहदावल स्थित कस्बे में पिता अजय के मोबाइल फोन पर दोपहर करीब 12:45 बजे बेटी की मौत की खबर आई। इसके बाद अजय, पत्नी विभा मिश्रा और अन्य रिश्तेदारों के साथ अपराह्न 02:45 बजे बेतियाहाता स्थित गर्ल्स हॉस्टल पहुंचे। वहां पर बेटी का शव काले कपड़े में लिपटा देकर विभा मिश्रा लिपटकर चीखकर रोने लगीं। वह बार-बार कह रही थीं-बेटी लौट आओ, मैं नहीं रह पाऊंगी। वहीं पिता अजय सिर पर हाथ रखकर बैठ गए।
साहब! बेटी का चीर-फाड़ न करवाइएगा
पिता अजयनाथ मिश्रा बेटी के शव के सामने बैठकर रो रहे थे। अचानक पुलिस को देखकर वह खड़े हो गए। हाथ जोड़कर निवेदन करने लगे-साहब! बेटी का चीर-फाड़ मत करवाइएगा। बहुत प्यार से बेटी को पाला। कभी उसे कोई परेशानी नहीं होने दी। यह कहकर काफी देर तक वह पुलिस से पोस्टमार्टम नहीं कराने का निवेदन करते रहे। फिर थाना प्रभारी और रिश्तेदारों के समझाने पर वह पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुए।
कमरा नंबर 86 में रहती थी अदिति
बेतियाहाता स्थित गर्ल्स हॉस्टल में अदिति कमरा नंबर 86 में रहती थी। हॉस्टल में कुल 12-13 कमरे हैं। इसमें 25 के करीब छात्राएं तैयारी कर रही हैं। वहां रहने वाली छात्राएं अदिति की मौत पर हतप्रभ थीं। एक दूसरे को पकड़ कर बार-बार रोने लग रही थीं। छात्राओं ने बताया-अदिति लोगों से ज्यादा मतलब नहीं रखती थी। वह हमेशा अपने में ही खोई रहती थी। वहीं उसके साथ कमरे में रहने वाली छात्रा ने बताया कि उससे भी वह कम ही बात करती थी। दो दिन पहले ही अदिति मेंहदावल स्थित घर से वापस आई थी।
आईएएस बनना चाहती थी अदिति
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पास रहने वाली अदिति की मौसी कल्पना और मौसा सूर्यनाथ मिश्रा घटना के कुछ ही देर बाद वहां पहुंच गए। मौसी ने कहा कि मंगलवार को जेईई मेन के रिजल्ट आने पर उनकी बात अदिति से हुई थी। उसने कहा था कि सफल नहीं हुई तो क्या हुआ, आगे आईएएस की तैयारी करेगी। वह शुरू से ही आईएएस बनना चाहती थी। अदिति के मौसा बोले-जब तबीयत खराब होती थी तब हमलोग उसे डॉक्टर को दिखाते थे। बोला भी था कि जब भी कोई परेशानी हो वह उनके घर चली आए।