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Gorakhpur News: खुद को साधने की कला है बाबा गंभीरनाथ की साधना
Fri, 09 Oct 2026 03:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 09 Oct 2026 03:11 AM IST
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- योगीराज बाबा गंभीरनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
गोरखपुर। महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसड़ में योगीराज बाबा गंभीरनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा हुई। मुख्य वक्ता अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि बाबा गंभीरनाथ का जीवन आत्मानुशासन, साधना और लोक कल्याण का संदेश देता है। योग उनके लिए केवल आसन-प्राणायाम नहीं, बल्कि मन, इंद्रियों, विचार और अहंकार पर विजय पाने की साधना थी।
उन्होंने कहा कि बाबा गंभीरनाथ ने सांसारिक सुख-सुविधाओं के बजाय आध्यात्मिक सत्य की खोज को जीवन का लक्ष्य बनाया। प्रयागराज के झूंसी में गुफा साधना, अमरकंटक और गया के कपिलधारा में तपस्या तथा कैलाश-मानसरोवर की यात्रा उनके साधनामय जीवन की प्रमुख कड़ियां रहीं। नाथ परंपरा में उन्हें हठयोग, राजयोग और लययोग का महान साधक माना जाता है।
प्रो. विश्वकर्मा ने युवाओं से कहा कि तनाव, सामाजिक मीडिया और त्वरित सफलता की दौड़ के बीच बाबा गंभीरनाथ का जीवन धैर्य, संयम और चरित्र निर्माण की राह दिखाता है। उन्होंने बताया कि बाबा गंभीरनाथ ने 21 मार्च 1917 को देह त्याग दिया। गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित उनकी समाधि आज भी उनकी साधना और विरासत की स्मृति को जीवंत रखे हुए है।
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अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. मनीष कुमार त्रिपाठी ने की। संचालन रक्षा व सामरिक अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य विवेक विश्वकर्मा ने किया। शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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गोरखपुर। महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसड़ में योगीराज बाबा गंभीरनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा हुई। मुख्य वक्ता अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि बाबा गंभीरनाथ का जीवन आत्मानुशासन, साधना और लोक कल्याण का संदेश देता है। योग उनके लिए केवल आसन-प्राणायाम नहीं, बल्कि मन, इंद्रियों, विचार और अहंकार पर विजय पाने की साधना थी।
उन्होंने कहा कि बाबा गंभीरनाथ ने सांसारिक सुख-सुविधाओं के बजाय आध्यात्मिक सत्य की खोज को जीवन का लक्ष्य बनाया। प्रयागराज के झूंसी में गुफा साधना, अमरकंटक और गया के कपिलधारा में तपस्या तथा कैलाश-मानसरोवर की यात्रा उनके साधनामय जीवन की प्रमुख कड़ियां रहीं। नाथ परंपरा में उन्हें हठयोग, राजयोग और लययोग का महान साधक माना जाता है।
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प्रो. विश्वकर्मा ने युवाओं से कहा कि तनाव, सामाजिक मीडिया और त्वरित सफलता की दौड़ के बीच बाबा गंभीरनाथ का जीवन धैर्य, संयम और चरित्र निर्माण की राह दिखाता है। उन्होंने बताया कि बाबा गंभीरनाथ ने 21 मार्च 1917 को देह त्याग दिया। गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित उनकी समाधि आज भी उनकी साधना और विरासत की स्मृति को जीवंत रखे हुए है।
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अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. मनीष कुमार त्रिपाठी ने की। संचालन रक्षा व सामरिक अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य विवेक विश्वकर्मा ने किया। शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे।