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Gorakhpur News: अनफिट एंबुलेंस में ढोए जा रहे मरीज...लगाते हैं फर्जी नंबर प्लेट
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गोरखपुर। शहर में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अनफिट और कागजों से गायब एंबुलेंस में गंभीर मरीजों को ढोया जा रहा था। यही नहीं, मरीज माफिया इन एंबुलेंस पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर तीमारदारों को गुमराह कर रहे थे।
मंगलवार रात पुलिस की जांच में यह फर्जीवाड़ा खुला, जब पांच संदिग्ध एंबुलेंस पकड़ी गईं। इनमें से दो गाड़ियों का रिकॉर्ड आरटीओ कार्यालय में तक नहीं मिला।
शहर में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मंगलवार रात एसपी सिटी अभिनव त्यागी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने एंबुलेंस माफिया के खिलाफ कार्रवाई की थी। पुलिस ने अभियान चलाकर कई एंबुलेंस को रोका था। जांच में पांच एंबुलेंस संदिग्ध पाई गईं, जिन्हें तुरंत सीज कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इनमें दो ऐसी एंबुलेंस थीं जिनका रजिस्ट्रेशन नंबर ही फर्जी था और आरटीओ के रिकॉर्ड में उनका कोई अस्तित्व नहीं था। बाकी तीन गाड़ियां तकनीकी रूप से अनफिट पाई गईं। इनकी हालत ऐसी थी कि इनमें मरीजों को ले जाना सीधे-सीधे उनकी जान से खिलवाड़ करना था।
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सूत्रों ने बताया कि मरीज माफिया एंबुलेंस पर नकली नंबर प्लेट लगाकर लोगों को भरोसे में लेते हैं। बाहर से देखकर गाड़ी सामान्य एंबुलेंस जैसी लगती है, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग होती। ऐसे वाहन न तो स्वास्थ्य मानकों पर खरे उतरते हैं और न ही इन्हें आपात स्थिति में चलाने की अनुमति है।
स्वास्थ्य विभाग को लिखा पत्र : जानकारी के अनुसार, जिन तीन अस्पतालों से जुड़ी एंबुलेंस तकनीकी रूप से अनफिट पाई गई थीं, उनकी भी जांच होगी। पुलिस ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की सिफारिश की है। अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में अस्पतालों की लापरवाही साबित हुई तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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मंगलवार रात पुलिस की जांच में यह फर्जीवाड़ा खुला, जब पांच संदिग्ध एंबुलेंस पकड़ी गईं। इनमें से दो गाड़ियों का रिकॉर्ड आरटीओ कार्यालय में तक नहीं मिला।
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शहर में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मंगलवार रात एसपी सिटी अभिनव त्यागी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने एंबुलेंस माफिया के खिलाफ कार्रवाई की थी। पुलिस ने अभियान चलाकर कई एंबुलेंस को रोका था। जांच में पांच एंबुलेंस संदिग्ध पाई गईं, जिन्हें तुरंत सीज कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इनमें दो ऐसी एंबुलेंस थीं जिनका रजिस्ट्रेशन नंबर ही फर्जी था और आरटीओ के रिकॉर्ड में उनका कोई अस्तित्व नहीं था। बाकी तीन गाड़ियां तकनीकी रूप से अनफिट पाई गईं। इनकी हालत ऐसी थी कि इनमें मरीजों को ले जाना सीधे-सीधे उनकी जान से खिलवाड़ करना था।
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सूत्रों ने बताया कि मरीज माफिया एंबुलेंस पर नकली नंबर प्लेट लगाकर लोगों को भरोसे में लेते हैं। बाहर से देखकर गाड़ी सामान्य एंबुलेंस जैसी लगती है, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग होती। ऐसे वाहन न तो स्वास्थ्य मानकों पर खरे उतरते हैं और न ही इन्हें आपात स्थिति में चलाने की अनुमति है।
स्वास्थ्य विभाग को लिखा पत्र : जानकारी के अनुसार, जिन तीन अस्पतालों से जुड़ी एंबुलेंस तकनीकी रूप से अनफिट पाई गई थीं, उनकी भी जांच होगी। पुलिस ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की सिफारिश की है। अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में अस्पतालों की लापरवाही साबित हुई तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।