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Gorakhpur News: गीडा ने 500 से अधिक उद्यमियों को भेजा नोटिस..लेना होगा उत्पादनरत का सर्टिफिकेट

Fri, 20 Sep 2024 05:29 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 20 Sep 2024 05:29 AM IST
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Gorakhpur News: GIDA sent notice to more than 500 entrepreneurs...will have to take certificate of production
गोरखपुर। गीडा के 500 से अधिक उद्यमियों को नोटिस भेजकर उनसे उत्पादनरत इकाई होने का प्रमाणपत्र लेने को कहा गया है। चेतावनी दी गई है कि एक माह में प्रमाणपत्र नहीं लेने वालों का आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा। आश्चर्य यह है कि इस प्रमाणपत्र के लिए 25 से 30 साल पुरानी कंपनियों से भी उनके उत्पाद के पहले खरीद-बिक्री की रसीद मांगी गई है।
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वहीं 2012 से पहले वाली कंपनियों से भी जीएसटी प्रमाणपत्र मांगा गया है, जबकि जीएसटी 2014 के बाद लागू हुआ। उद्यमियों ने बुधवार को गीडा प्रशासन के सामने अपनी बात रखी थी। अब वे शुक्रवार को मुख्यमंत्री से मिलेंगे।
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गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की तरफ से करीब 1000 प्लॉट उद्योगों के लिए आवंटित किए गए हैं। कामर्शियल और औद्योगिक क्षेत्र के इन प्लॉटों में कार्यरत इकाइयों को उत्पादनरत का सर्टिफिकेट लेना होता है। शासन ने पिछले साल निर्देश दिया था कि 31 दिसंबर 2024 तक औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत सभी इकाइयों को उत्पादनरत सर्टिफिकेट लेना होगा। इस सर्टिफिकेट के आधार पर ही उन्हें बैंक लोन या अन्य योजनाओं में छूट का लाभ मिलेगा। इस नियम से नई इकाइयों को तो खास दिक्कत नहीं हुई, लेकिन जो इकाई 1995 से 2000 के बीच लगी हैं, उनके पास इस प्रमाणपत्र के लिए जरूरी प्रपत्र ही नहीं हैं।
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फैक्टरी मालिकों का कहना है कि उस वक्त जीएसटी का झंझट था नहीं, केवल बिजली मीटर का सीलिंग रिपोर्ट के आधार पर पंजीकरण हो जाता था। आज उन फैक्टरियों से पहले खरीद-बिक्री का बिल मांगा जा रहा है। इस तरह के बिल की लंबे समय तक रखने की कोई जरूरत होती नहीं है, लिहाजा पुरानी फैक्टरियों के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड मिल नहीं रहा है। बिना कागजात के उत्पादनरत का प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा और जिनके पास प्रमाणपत्र नहीं होगा, उनका जमीन आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा। ऐसे में उद्योगों के संचालन में दिक्कत आएगी।



कई बार उठा मामला, नहीं मिला हल



चैंबर्स ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह बताते हैं कि गीडा की फैक्टरियों के उत्पादनरत का सर्टिफिकेट लेने का मामला लखनऊ तक पहुंचाया जा चुका है। फैक्टरी चल रही है, उसका मौके पर सत्यापन करा लिया जाए। जो प्रमाणपत्र आसानी से मिलने वाले हैं, उनको आधार बनाया जाए। इसके बजाय गीडा प्रशासन ऐसे कागज की मांग कर रहा है जो उद्यमी न दे पाएं। इस प्रमाणपत्र के चक्कर में हर दिन तमाम छोटे-बड़े उद्यमी गीडा दफ्तर का चक्कर काट रहे हैं। इससे सरकार की छवि भी खराब हो रही है। शुक्रवार को उद्यमियों का प्रतिनिधिमंडल गोरखनाथ मंदिर जाकर मुख्यमंत्री से मिलेगा और पूरा प्रकरण उनके सामने रखा जाएगा।



लघु उद्योग भारती के मंडल अध्यक्ष दीपक कारीवाल का कहना है कि स्थानीय स्तर पर इस समस्या का समाधान नहीं होने पर पिछले महीने हमने मुख्य उत्पादन आयुक्त को लखनऊ जाकर ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने प्रकरण के निस्तारण की बात कही थी, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं मिला। नोटिस मिलने से उद्यमी परेशान हैं।




वर्जन



वर्ष 2012 से पहले की इकाइयों को 10 साल का समय दिया गया था। अब सभी को उत्पादनरत का सर्टिफिकेट लेना है। इसके लिए सभी इकाइयों को पत्र भेजा गया है। जिनके पास सर्टिफिकेट नहीं हैं, उन्हें जरूरी कागजात जमा करने हैं। उद्यमियों ने कुछ प्रमाणपत्र मिलने में दिक्कत की बात कही थी। इसे गीडा बोर्ड की अगली बैठक में रखा जाएगा और नियमों को सरल बनाने का प्रयास होगा।



-अनुज मलिक, सीईओ गीडा
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