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Gorakhpur News: जेल की हवा में भूत-प्रेत रफू चक्कर...बड़ों को देख अब ''''रावण'''' छूता है पैर

Sat, 13 Sep 2025 01:34 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 13 Sep 2025 01:34 AM IST
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Gorakhpur News: Ghosts and spirits are roaming around in the jail air... Now 'Ravan' touches the feet of elders
तिहरा हत्याकांडः झंगहा में परिवार के तीन लोगों की हत्या के आरोपी की मानसिक स्थिति इलाज के बाद बेहतर
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स्वभाव बदलने के बाद जेल में बंदियों के रिकॉर्ड मेंटेन करने का काम मिला



गोरखपुर। झंगहा इलाके में दादा-दादी समेत तीन लोगों की हत्या के आरोपी रामदयाल मौर्या उर्फ रावण का जेल में स्वभाव पूरी तरह बदल गया है। मानसिक रूप से विक्षिप्त रावण पर ग्रामीण भूत-प्रेत का साया बताते थे लेकिन जेल में मनोचिकित्सक ने इलाज किया, तो अब वह सामान्य हो गया है। बड़ों को देख पैर छूकर आशीर्वाद ले रहा है। इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ तो जेल प्रशासन ने उसे बंदियों के रिकॉर्ड मेंटेन करने के काम में लगाया है।



जेल सूत्रों ने बताया कि तिहरे हत्याकांड का आरोपी रावण अब सुबह उठने के बाद पूजा-पाठ करता है। उसके अंदर पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा बढ़ी है। वह किताबें मांगकर पढ़ता है। जेल में आने-जाने वाले कैदियों का रिकॉर्ड रख रहा है। बड़ों को देखते ही वह तुरंत पैर छूता है। वह जेल से छूटने के लिए भगवान राम की पूजा कर रहा है।
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कुछ समय पहले ही उसने जेल अधीक्षक से रामायण और गीता मांगी थी ताकि उसे पढ़कर अपने पाप का प्रायश्चित कर सके। जेल में मनोचिकित्सक अब भी उसका इलाज कर रहे हैं जिसका असर दिखने लगा है। वह सामान्य मनुष्य की तरह व्यवहार कर रहा है।
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दादा-दादी समेत तीन की हत्या में बंद है रावण



झंगहा थाना क्षेत्र मोतीराम अड्डा कोईरान टोला में 28 फरवरी 2025 को पोते रामदयाल मौर्य को दादा, दादा के भाई और दादी की फावड़े से हत्या करने के मामले में आरोपी बनाया गया था। पुलिस के मुताबिक तीनों के मरने तक उनके शव के पास ही बैठा रहा। मृतकों की पहचान कुबेर मौर्य (72), साधु मौर्य (75) और कुबेर की पत्नी द्रौपदी देवी (70) के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक, घर में बंधे भैंस के पड़वे को रामदयाल फावड़े से मार रहा था। इसका विरोध करने पर तीन लोगों की हत्या कर दी थी। पूछताछ में उसने बताया था कि रावण वध में बाधक बने लोगों का अंत किया। पुलिस ने गिरफ्तार कर उसे जेल भिजवाया। वहां भी उसे हर कोई रावण नजर आने लगा। कुछ लोगों पर हमला भी कर दिया था। इस वजह से जेल में उसे बंदी रावण कहकर बुलाने लगे थे।



भूत-प्रेत का कराते थे इलाज



ग्रामीण बताते हैं कि रावण में शुरुआत में कुछ असामान्य लक्षण दिखे थे लेकिन उस समय घर के लोग भूत-प्रेत समझ उसका टोटका कराते थे। इससे सकारात्मक असर नहीं पड़ा और उसकी स्थिति बिगड़ती गई। अंत में उसने वारदात को अंजाम दे दिया। जेलर अरुण कुमार ने बताया कि जेल में आने के बाद इसका इलाज शुरू कराया गया। अब वह सामान्य होने लगा है। जेल के कामकाज में मदद करता है।




असामान्य लक्षण दिखे तो डॉक्टर को बताएं



जेल में रावण का इलाज करने वाले मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही ने बताया कि मानसिक समस्या किसी को भी हो सकती है। शुरुआत में ही इसके लक्षण दिखते हैं। व्यक्ति में कोई असामान्यता आए तो उसपर ध्यान दें। जैसे उसका रूटीन खराब हो रहा है। वह ज्यादा बोलने लगे या चुप रहने लगे। बिना काम के वह घूमने लगे या बातों को भूल जाए। किसी पर गुस्सा करने लगे तो सतर्क हो जाएं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत किसी मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाएं। शुरुआत में हल्की दवाओं से वह पूरी तरह ठीक हो जाएगा। यदि स्थिति ज्यादा बिगड़ गई है तो इलाज में समय लगेगा लेकिन वह पूरी तरह ठीक हो जाएगा। भूत-प्रेत समझने या इस तरह की समस्याओं को नजरअंदाज करने से स्थिति खराब हो सकती है। उन्होंने बताया कि जेल में भी बंदियों का इलाज किया जाता है जिसका सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। रावण ने इलाज में सहयोग किया जिसके बाद अब वह सामान्य होने लगा है।
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