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Gorakhpur News: पनीर-घी से लेकर सूजी-मैदा तक मिलावटी...त्योहार में रहें अलर्ट
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खाद्य सुरक्षा विभाग ने 10 महीने में लिए 582 सैंपल की कराई जांच
259 में मिलावट, 26 नमूने असुरक्षित, 16 नियम विरुद्ध
गोरखपुर। मिलावटखोरों ने फायदे के लिए गोरखपुर के लोगों की सेहत को खतरे में डाल दिया है। शहर में बिक रहे पनीर-घी से लेकर सूजी और मैदा तक में मिलावट की जा रही है। स्थिति यह है कि बीते साल अप्रैल से इस साल जनवरी के बीच 10 महीने में जो 582 सैंपल लिए गए, उसमें से 259 नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई है। वहीं 26 नमूनों की रिपोर्ट असुरक्षित और 13 नमूनों की रिपोर्ट में खाद्य सामग्री मानक के विरुद्ध पाई गई है। इन आंकड़ों में दशहरा-दिवाली में लिए गए नमूने भी शामिल हैं। लगातार कार्रवाई के बावजूद धंधेबाजों ने होली में भी मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री के लिए सामान जमा करना शुरू कर दिया है।
गोरखपुर जिले की आबादी 50 लाख पार कर गई है। शहर में करीब 22 लाख लोग रहते हैं। जैसे-जैसे शहर का विकास हो रहा है, उसी अनुपात खाने-पीने के सामान की भी खपत हो रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग में 200 बड़े रेस्टोरेंट व करीब 5000 चाय व मिठाई की छोटी दुकानें पंजीकृत हैं। वहीं खाद्य सामग्री श्रेणी में करीब 13500 दुकानें पंजीकृत हैं। शहर में महेवा औ साहबगंज मंडी के अलावा खोवा मंडी भी है। दुकानों पर अच्छी क्वालिटी की खाद्य सामग्री से अधिक मिलावटी माल भरा पड़ा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बीते साल दशहरा से दिवाली और छठ पूजा के दौरान करीब हर दिन छापा मारा और दुकानों से नमूने लिए। इन नमूनों की रिपोर्ट बताती है कि शहर में किस कदर मिलावटी सामग्री भरी है।
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सबसे खराब खोवा-पनीर
पिछले साल दिवाली के आसपास शाहपुर इलाके की एक डेयरी पर छापा पड़ा। यहां बड़े पैमाने पर नकली घी बनाने का कारखाना पकड़ा गया था। यहां मिले पनीर का नमूना फेल हो गया है। वहीं खोवा और घी के नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार है। वहीं कूड़ाघाट इलाके से लिए मैदा व सूजी का नमूना फेल हो चुका है। पनीर और खोवा के कई और नमूने भी फेल हुए हैं। इसके अलावा दाल, सूजी, बेसन आदि के कुल 16 नमूने असुरक्षित श्रेणी में आए हैं। सबसे ज्यादा मिलावट की रिपोर्ट भी पनीर और खोवा में ही आई है।
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होली के लिए अभी से भेजने लगे हैं सामान
बड़े पैमाने पर नमूने फेल होने के बावजूद धंधेबाजों ने होली की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों का बताया है कि खोवा मंडी में अभी से कानपुर से नकली खोवा की खेप आने लगी है, जिसे सस्ते रेट पर दूसरे बाजारों में भेजा जा रहा है। गोरखपुर से कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज जिलों में भी खोवा भेजा जा रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम जब तक इस मिलावट को पकड़ पाएगी, धंधेबाज मिलावटी खोवा से गुझिया से लेकर अन्य मिठाई बाजार में बेच चुके होंगे। यह मिलावटी मिठाई और गुझिया खाकर लोग बीमार होंगे। खोवा की तरह ही नमकीन, सूजी, बेसन आदि की खेप भी अभी से भेजी जा रही है।
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वर्जन
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम लगातार छापा मारकर मिलावटखोरों पर कार्रवाई कर रही है। लोगों को खुद भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि वह जो खरीद रहे हैं, उसकी गुणवत्ता कितनी ठीक है। कोई सामग्री अगर वास्तविक लागत से भी कम मूल्य पर बिक रही है तो फिर उसकी शुद्धता संदिग्ध रहेगी, इसका ध्यान रखें। होली से पहले ही जांच शुरू करा दी गई है।
- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य
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259 में मिलावट, 26 नमूने असुरक्षित, 16 नियम विरुद्ध
गोरखपुर। मिलावटखोरों ने फायदे के लिए गोरखपुर के लोगों की सेहत को खतरे में डाल दिया है। शहर में बिक रहे पनीर-घी से लेकर सूजी और मैदा तक में मिलावट की जा रही है। स्थिति यह है कि बीते साल अप्रैल से इस साल जनवरी के बीच 10 महीने में जो 582 सैंपल लिए गए, उसमें से 259 नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई है। वहीं 26 नमूनों की रिपोर्ट असुरक्षित और 13 नमूनों की रिपोर्ट में खाद्य सामग्री मानक के विरुद्ध पाई गई है। इन आंकड़ों में दशहरा-दिवाली में लिए गए नमूने भी शामिल हैं। लगातार कार्रवाई के बावजूद धंधेबाजों ने होली में भी मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री के लिए सामान जमा करना शुरू कर दिया है।
गोरखपुर जिले की आबादी 50 लाख पार कर गई है। शहर में करीब 22 लाख लोग रहते हैं। जैसे-जैसे शहर का विकास हो रहा है, उसी अनुपात खाने-पीने के सामान की भी खपत हो रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग में 200 बड़े रेस्टोरेंट व करीब 5000 चाय व मिठाई की छोटी दुकानें पंजीकृत हैं। वहीं खाद्य सामग्री श्रेणी में करीब 13500 दुकानें पंजीकृत हैं। शहर में महेवा औ साहबगंज मंडी के अलावा खोवा मंडी भी है। दुकानों पर अच्छी क्वालिटी की खाद्य सामग्री से अधिक मिलावटी माल भरा पड़ा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बीते साल दशहरा से दिवाली और छठ पूजा के दौरान करीब हर दिन छापा मारा और दुकानों से नमूने लिए। इन नमूनों की रिपोर्ट बताती है कि शहर में किस कदर मिलावटी सामग्री भरी है।
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सबसे खराब खोवा-पनीर
पिछले साल दिवाली के आसपास शाहपुर इलाके की एक डेयरी पर छापा पड़ा। यहां बड़े पैमाने पर नकली घी बनाने का कारखाना पकड़ा गया था। यहां मिले पनीर का नमूना फेल हो गया है। वहीं खोवा और घी के नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार है। वहीं कूड़ाघाट इलाके से लिए मैदा व सूजी का नमूना फेल हो चुका है। पनीर और खोवा के कई और नमूने भी फेल हुए हैं। इसके अलावा दाल, सूजी, बेसन आदि के कुल 16 नमूने असुरक्षित श्रेणी में आए हैं। सबसे ज्यादा मिलावट की रिपोर्ट भी पनीर और खोवा में ही आई है।
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होली के लिए अभी से भेजने लगे हैं सामान
बड़े पैमाने पर नमूने फेल होने के बावजूद धंधेबाजों ने होली की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों का बताया है कि खोवा मंडी में अभी से कानपुर से नकली खोवा की खेप आने लगी है, जिसे सस्ते रेट पर दूसरे बाजारों में भेजा जा रहा है। गोरखपुर से कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज जिलों में भी खोवा भेजा जा रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम जब तक इस मिलावट को पकड़ पाएगी, धंधेबाज मिलावटी खोवा से गुझिया से लेकर अन्य मिठाई बाजार में बेच चुके होंगे। यह मिलावटी मिठाई और गुझिया खाकर लोग बीमार होंगे। खोवा की तरह ही नमकीन, सूजी, बेसन आदि की खेप भी अभी से भेजी जा रही है।
वर्जन
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम लगातार छापा मारकर मिलावटखोरों पर कार्रवाई कर रही है। लोगों को खुद भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि वह जो खरीद रहे हैं, उसकी गुणवत्ता कितनी ठीक है। कोई सामग्री अगर वास्तविक लागत से भी कम मूल्य पर बिक रही है तो फिर उसकी शुद्धता संदिग्ध रहेगी, इसका ध्यान रखें। होली से पहले ही जांच शुरू करा दी गई है।
- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य