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Gorakhpur News: पूर्व निदेशक को हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
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गोरखपुर। एम्स गोरखपुर के प्रभारी कार्यकारी निदेशक और एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक रहे डॉ. जीके पाल को पटना हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। चर्चा है कि हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी है। डॉ. पॉल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से की गई कार्रवाई को कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी।
गोरखपुर एम्स के प्रभारी कार्यकारी निदेशक रहने के दौरान डॉ. जीके पाल ने अपने बेटे डॉ. औरव पॉल को पीजी में दाखिला दिया था। इस पर आपत्ति करते हुए किसी ने स्वास्थ्य मंत्रालय में शिकायत की तो जांच शुरू हो गई। इसके बाद डॉ. औरव पाल ने अपना दाखिला वापस ले लिया था। इस मामले में गठित कमेटी ने जब जांच की तो यह तथ्य प्रकाश में आए कि डॉ. औरव पाल ने पिछड़ी जाति का जो सर्टिफिकेट लगाया था, उसमें वार्षिक आय आठ लाख रुपये से कम दर्शाई गई थी, जबकि उनके माता-पिता की सलाना आय 43 लाख रुपये है। इस पर डॉ. जीके पाल ने यह कहते हुए अपना बचाव किया था कि वे सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और बेटे की गलती की सजा उन्हें नहीं दी जा सकती। लेकिन कोर्ट ने इन दोनों दलील को स्वीकार नहीं किया है।
इस संबंध में पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल से संपर्क कर उनका पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल पाया।
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गोरखपुर एम्स के प्रभारी कार्यकारी निदेशक रहने के दौरान डॉ. जीके पाल ने अपने बेटे डॉ. औरव पॉल को पीजी में दाखिला दिया था। इस पर आपत्ति करते हुए किसी ने स्वास्थ्य मंत्रालय में शिकायत की तो जांच शुरू हो गई। इसके बाद डॉ. औरव पाल ने अपना दाखिला वापस ले लिया था। इस मामले में गठित कमेटी ने जब जांच की तो यह तथ्य प्रकाश में आए कि डॉ. औरव पाल ने पिछड़ी जाति का जो सर्टिफिकेट लगाया था, उसमें वार्षिक आय आठ लाख रुपये से कम दर्शाई गई थी, जबकि उनके माता-पिता की सलाना आय 43 लाख रुपये है। इस पर डॉ. जीके पाल ने यह कहते हुए अपना बचाव किया था कि वे सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और बेटे की गलती की सजा उन्हें नहीं दी जा सकती। लेकिन कोर्ट ने इन दोनों दलील को स्वीकार नहीं किया है।
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इस संबंध में पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल से संपर्क कर उनका पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल पाया।