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Gorakhpur News: चार सालों में कम हो गया 4.51 वर्ग किलोमीटर वन आवरण
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विश्व वन दिवस
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
सात सालों के अंदर वन विभाग ने अन्य विभागों के साथ रोपे हैं पौने तीन करोड़ पौधे
गोरखपुर। शहर से लेकर गांव तक किए गए पौधरोपण के बाद भी जिले की हरियाली बढ़ नहीं पाई है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जिले का वन आवरण चार सालों में बढ़ने के बजाए 4.51 वर्ग किलोमीटर कम हो गया है। हालांकि इन सात सालों के अंदर जिले में कई ऐसी परियोजनाएं चल रही है, जिसकी वजह से 80 से 100 साल पुराने सैकड़ों पेड़ काट दिए गए हैं।
यह रिपोर्ट 2023 में जारी की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में वन आवरण क्षेत्रफल 76 वर्ग किलोमीटर था, जो 2019 में बढ़कर 79 वर्ग किलोमीटर पहुंच गया था। इन सबके बीच 2021 में महज 0.06 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद वन विभाग ने यह उम्मीद पाल रखी थी कि 2023 में 74.49 वर्ग किलोमीटर हो गया। अब वन विभाग ने पिछले तीन वर्षों में करीब 1.5 करोड़ पौधे लगाए हैं। ऐसे में विभाग को उम्मीद है कि अगली सर्वे रिपोर्ट में जिले का वन आवरण बढ़ेगा।
खुले जंगल का क्षेत्रफल जिले में 2021 में 28 वर्ग किलोमीटर था, जो 2023 में घटकर 24.91 वर्ग किलोमीटर रह गया है। जबकि मध्यम घनत्व वाला जंगल 23 वर्ग किलोमीटर में था, जो घटकर 21.60 वर्ग किलोमीटर हो गया है। अधिक घनत्व वाले जंगलों की बात करें तो इसमें मामूली अंतर आया है।
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कोट...
जिले में हरियाली बढ़ाने के लिए वृहद स्तर पर पौधरोपण किए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में करीब डेढ़ करोड़ पौधे लगाए गए हैं। जब पौधे धीरे-धीरे बढ़ेंगे तो यह धरातल पर दिखाई देंगे। जिले में सात सालों के अंदर विकास के कई काम हुए हैं। इस दौरान कई पेड़ भी काटने पड़े हैं। इसके बदले में पौधे भी रोपे गए हैं।
- विकास यादव, डीएफओ
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फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
सात सालों के अंदर वन विभाग ने अन्य विभागों के साथ रोपे हैं पौने तीन करोड़ पौधे
गोरखपुर। शहर से लेकर गांव तक किए गए पौधरोपण के बाद भी जिले की हरियाली बढ़ नहीं पाई है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जिले का वन आवरण चार सालों में बढ़ने के बजाए 4.51 वर्ग किलोमीटर कम हो गया है। हालांकि इन सात सालों के अंदर जिले में कई ऐसी परियोजनाएं चल रही है, जिसकी वजह से 80 से 100 साल पुराने सैकड़ों पेड़ काट दिए गए हैं।
यह रिपोर्ट 2023 में जारी की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में वन आवरण क्षेत्रफल 76 वर्ग किलोमीटर था, जो 2019 में बढ़कर 79 वर्ग किलोमीटर पहुंच गया था। इन सबके बीच 2021 में महज 0.06 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद वन विभाग ने यह उम्मीद पाल रखी थी कि 2023 में 74.49 वर्ग किलोमीटर हो गया। अब वन विभाग ने पिछले तीन वर्षों में करीब 1.5 करोड़ पौधे लगाए हैं। ऐसे में विभाग को उम्मीद है कि अगली सर्वे रिपोर्ट में जिले का वन आवरण बढ़ेगा।
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खुले जंगल का क्षेत्रफल जिले में 2021 में 28 वर्ग किलोमीटर था, जो 2023 में घटकर 24.91 वर्ग किलोमीटर रह गया है। जबकि मध्यम घनत्व वाला जंगल 23 वर्ग किलोमीटर में था, जो घटकर 21.60 वर्ग किलोमीटर हो गया है। अधिक घनत्व वाले जंगलों की बात करें तो इसमें मामूली अंतर आया है।
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कोट...
जिले में हरियाली बढ़ाने के लिए वृहद स्तर पर पौधरोपण किए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में करीब डेढ़ करोड़ पौधे लगाए गए हैं। जब पौधे धीरे-धीरे बढ़ेंगे तो यह धरातल पर दिखाई देंगे। जिले में सात सालों के अंदर विकास के कई काम हुए हैं। इस दौरान कई पेड़ भी काटने पड़े हैं। इसके बदले में पौधे भी रोपे गए हैं।
- विकास यादव, डीएफओ