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Gorakhpur News: आबादी के बीच 30 साल से चल रही उर्वरक फैक्टरी कराई गई बंद, जांच समिति गठित
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तबियत बिगड़ने पर बच्चों को एंबुलेंस से ले जाते
फैक्टरी से निकले एसिड से हर साल बर्बाद होती हैं सैकड़ों एकड़ फसलें, गैस स्पार्किंग की वजह से हादसे का डर
कुछ साल पहले भी ग्रामीणों के विरोध पर बंद कराई गई थी, बाद में हो गई शुरू
गोरखपुर। चौरीचौरा क्षेत्र के देवकहिया गांव में आबादी के नजदीक हानिकारक केमिकल उत्सर्जन वाली फैक्टरी 30 वर्षों से संचालित है। फैक्टरी से निकलने वाले एसिड से हर साल किसानों की सैकड़ों एकड़ खेती बर्बाद हो जाती है। इसके अलावा अचानक गैस स्पार्किंग की वजह से हादसे का डर रहता है।
बताया जा रहा है कि लोगों के विरोध पर इसे पहले भी एक बार बंद कराया गया था लेकिन कुछ दिन बाद ही खोल दिया गया। अब हादसे के बाद फिर बंद कराते हुए जांच समिति गठित की गई है। यह टीम एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी।
ग्राम प्रधान मैनेजर शर्मा ने बताया कि यह प्लांट पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। एसिड व गैस रिसाव का हर वक्त खतरा रहता है। फसलें खराब हो रही हैं लेकिन न जाने किसके आदेश पर इसका संचालन किया जा रहा है। ग्रामीण विदेशी भारती ने बताया कि इस प्लांट की वजह से आसपास के ग्रामीणों की दशा खराब है। फैक्टरी से निकलने वाले एसिड से किसानों की फसल जल जाती है। परेशान ग्रामीण पहले भी हंगामा कर चुके हैं। कुछ वर्ष पहले ग्रामीण सीएम योगी से मिलने गए थे। तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद डीएम के निर्देश पर इसे बंद किया गया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में फैक्टरी का संचालन मानक के विपरीत मिला था।
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एडीएम ने भेजी फैक्टरी बंद करने की रिपोर्ट
इस घटना के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम चौरीचौरा ने फैक्टरी से जहरीली गैस निकलने की सूचना के आधार पर प्रोडक्शन मैनेजर सूरज राज को फैक्टरी तत्काल प्रभाव से बंद करवाने का निर्देश दिया। एसडीएम ने डीएम को भेजी अपनी रिपोर्ट में भी इस बात का उल्लेख किया है कि लगभग 30 वर्षों से अधिक समय से पुरानी फैक्टरी आबादी के नजदीक है।
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गैस रिसाव की जांच करेगी तीन सदस्यीय समिति
एसडीएम की आख्या के बाद डीएम दीपक मीणा ने फैक्टरी से गैस रिसाव की जांच के लिए एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्र की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है। इसमें क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी गोरखपुर और सहायक निदेशक कारखाना गोरखपुर को सदस्य बनाया गया है। जांच समिति को निर्देशित किया गया है कि तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर संपूर्ण तथ्यों की जांच करते हुए अपनी रिपोर्ट एक सप्ताह में प्रस्तुत करें।
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कुछ साल पहले भी ग्रामीणों के विरोध पर बंद कराई गई थी, बाद में हो गई शुरू
गोरखपुर। चौरीचौरा क्षेत्र के देवकहिया गांव में आबादी के नजदीक हानिकारक केमिकल उत्सर्जन वाली फैक्टरी 30 वर्षों से संचालित है। फैक्टरी से निकलने वाले एसिड से हर साल किसानों की सैकड़ों एकड़ खेती बर्बाद हो जाती है। इसके अलावा अचानक गैस स्पार्किंग की वजह से हादसे का डर रहता है।
बताया जा रहा है कि लोगों के विरोध पर इसे पहले भी एक बार बंद कराया गया था लेकिन कुछ दिन बाद ही खोल दिया गया। अब हादसे के बाद फिर बंद कराते हुए जांच समिति गठित की गई है। यह टीम एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी।
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ग्राम प्रधान मैनेजर शर्मा ने बताया कि यह प्लांट पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। एसिड व गैस रिसाव का हर वक्त खतरा रहता है। फसलें खराब हो रही हैं लेकिन न जाने किसके आदेश पर इसका संचालन किया जा रहा है। ग्रामीण विदेशी भारती ने बताया कि इस प्लांट की वजह से आसपास के ग्रामीणों की दशा खराब है। फैक्टरी से निकलने वाले एसिड से किसानों की फसल जल जाती है। परेशान ग्रामीण पहले भी हंगामा कर चुके हैं। कुछ वर्ष पहले ग्रामीण सीएम योगी से मिलने गए थे। तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद डीएम के निर्देश पर इसे बंद किया गया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में फैक्टरी का संचालन मानक के विपरीत मिला था।
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एडीएम ने भेजी फैक्टरी बंद करने की रिपोर्ट
इस घटना के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम चौरीचौरा ने फैक्टरी से जहरीली गैस निकलने की सूचना के आधार पर प्रोडक्शन मैनेजर सूरज राज को फैक्टरी तत्काल प्रभाव से बंद करवाने का निर्देश दिया। एसडीएम ने डीएम को भेजी अपनी रिपोर्ट में भी इस बात का उल्लेख किया है कि लगभग 30 वर्षों से अधिक समय से पुरानी फैक्टरी आबादी के नजदीक है।
गैस रिसाव की जांच करेगी तीन सदस्यीय समिति
एसडीएम की आख्या के बाद डीएम दीपक मीणा ने फैक्टरी से गैस रिसाव की जांच के लिए एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्र की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है। इसमें क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी गोरखपुर और सहायक निदेशक कारखाना गोरखपुर को सदस्य बनाया गया है। जांच समिति को निर्देशित किया गया है कि तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर संपूर्ण तथ्यों की जांच करते हुए अपनी रिपोर्ट एक सप्ताह में प्रस्तुत करें।