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Gorakhpur News: दिल्ली की फैक्टरी में बनी नकलीं दवाओं की देश भर में हुई है सप्लाई
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यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान में भी हो रही तलाश
गोरखपुर के अलावा वाराणसी की दवा मंडी से जुटाई जा रही है जानकारी
गोरखपुर। दो दिन पहले दिल्ली में पकड़ी गई नकली दवा की फैक्टरी से यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान में बड़े पैमाने पर दवाइयां भेजी जाती थीं। कारखाना संचालन में गोरखपुर और देवरिया के युवक का हाथ था। वहीं मार्केटिंग की जिम्मेदारी मुरादाबाद के युवक के पास थी। आरंभिक छानबीन में यह भी पता लगा है कि दवा कंपनी का संचालन करने वालों ने करीब पांच साल तक हरियाणा के जींद शहर में एक फैक्टरी में नौकरी की थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने गोरखपुर और वाराणसी की दवा मंडी से इसकी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
पूर्वांचल में दवाओं की दो सबसे बड़ी मंडी वाराणसी और गोरखपुर है। गोरखपुर की भालोटिया मार्केट में करीब 300 दुकानें हैं। यहां से शहर के अलावा आसपास के जिलों और बिहार के गोपालगंज, छपरा, पश्चिमी चंपारण आदि जिलों को दवाएं भेजी जाती हैं। वहीं वाराणसी की दवा मंडी से भी बड़ी मात्रा में बिहार में दवाएं भेजी जाती हैं। दिल्ली में दो दिन पहले जिस नकली दवा कंपनी का खुलासा हुआ था, उससे जुड़े दो नाम गोरखपुर निवासी राजेश मिश्रा और देवरिया निवासी प्रेमशंकर प्रजापति की चर्चा यहां भी शुरू हो गई है। दवा कारोबार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में बनने वाली इन नकली दवाओं की खपत गोरखपुर समेत पूरे यूपी के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान में भी होने की आशंका है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने यह जानकारी जुटानी शुरू की है कि, दिल्ली की इस फर्म से कहां-कहां दवाएं भेजी गई हैं। प्रारंभिक छानबीन में यह बात सामने आई है कि दवाओं की बिक्री का पूरा नियंत्रण इस फर्म से जुड़े मुरादाबाद निवासी मोहम्मद आलम के पास था। मोहम्मद आलम के कई अकाउंट से लेन-देन की बात भी सामने आने की चर्चा है।
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पांच साल तक एक दवा कंपनी में काम कर चुके हैं राजेश और प्रेमशंकर
इस नकली फैक्टरी के संचालक राजेश के बारे में चर्चा है कि वह केमिस्ट है और पहले जींद में रहता था। वह एक दवा कंपनी में नौकरी करता था। बाद में उसने खुद ही पीडी बेस्ड दवाएं बनवानी शुरू कर दी। बाद में इस धंधे में उसके साथ प्रेमशंकर प्रजापति भी शामिल हो गया। बाद में इन दोनों ने औरों के साथ मिलकर खुद की फैक्टरी खोल ली। इसमें हर काम की जिम्मेदारी अलग-अलग हाथों में दे दी गई।
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दवा मंडी से खोज रहे कनेक्शन
दिल्ली की इस नकली फैक्टरी में ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाएं बनती थीं। इसे 60 प्रतिशत मुनाफे पर थोक विक्रेताओं को दिया जाता था। कम रेट में मिलने की वजह से फुटकर विक्रेता 30 फीसदी तक छूट देकर आराम से ये दवाएं बेच रहे थे। भालोटिया से जुड़े एक व्यापारी ने बताया कि इस तरह के धंधे में एक मार्केट में एक बार में ही बड़ी मात्रा में दवाएं भेज दी जाती हैं, जिन्हें धीरे-धीरे महीने भर में खपाया जाता है। जब तक इसकी चर्चा शुरू होती है, तब तक धंधेबाज किसी अन्य मार्केट में पहुंच चुके होते हैं। इस वजह से एक मार्केट में धंधेबाजों की अगली खेप छह महीने बाद ही आती है, जिससे धंधेबाज आसानी से पकड़ में नहीं आते।
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कोट
दिल्ली में पकड़ी गई नकली कंपनी से गोरखपुर की मंडी में दवा भेजने की कोई बात अभी तक सामने नहीं आई है। फिर भी मार्केट की हलचल पर नजर रखी जा रही है। राजेश मिश्रा के बारे में यहां से कोई जानकारी नहीं मांगी गई है।
- पूरन चंद, सहायक आयुक्त औषधि- गोरखपुर
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गोरखपुर के अलावा वाराणसी की दवा मंडी से जुटाई जा रही है जानकारी
गोरखपुर। दो दिन पहले दिल्ली में पकड़ी गई नकली दवा की फैक्टरी से यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान में बड़े पैमाने पर दवाइयां भेजी जाती थीं। कारखाना संचालन में गोरखपुर और देवरिया के युवक का हाथ था। वहीं मार्केटिंग की जिम्मेदारी मुरादाबाद के युवक के पास थी। आरंभिक छानबीन में यह भी पता लगा है कि दवा कंपनी का संचालन करने वालों ने करीब पांच साल तक हरियाणा के जींद शहर में एक फैक्टरी में नौकरी की थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने गोरखपुर और वाराणसी की दवा मंडी से इसकी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
पूर्वांचल में दवाओं की दो सबसे बड़ी मंडी वाराणसी और गोरखपुर है। गोरखपुर की भालोटिया मार्केट में करीब 300 दुकानें हैं। यहां से शहर के अलावा आसपास के जिलों और बिहार के गोपालगंज, छपरा, पश्चिमी चंपारण आदि जिलों को दवाएं भेजी जाती हैं। वहीं वाराणसी की दवा मंडी से भी बड़ी मात्रा में बिहार में दवाएं भेजी जाती हैं। दिल्ली में दो दिन पहले जिस नकली दवा कंपनी का खुलासा हुआ था, उससे जुड़े दो नाम गोरखपुर निवासी राजेश मिश्रा और देवरिया निवासी प्रेमशंकर प्रजापति की चर्चा यहां भी शुरू हो गई है। दवा कारोबार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दिल्ली में बनने वाली इन नकली दवाओं की खपत गोरखपुर समेत पूरे यूपी के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान में भी होने की आशंका है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने यह जानकारी जुटानी शुरू की है कि, दिल्ली की इस फर्म से कहां-कहां दवाएं भेजी गई हैं। प्रारंभिक छानबीन में यह बात सामने आई है कि दवाओं की बिक्री का पूरा नियंत्रण इस फर्म से जुड़े मुरादाबाद निवासी मोहम्मद आलम के पास था। मोहम्मद आलम के कई अकाउंट से लेन-देन की बात भी सामने आने की चर्चा है।
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पांच साल तक एक दवा कंपनी में काम कर चुके हैं राजेश और प्रेमशंकर
इस नकली फैक्टरी के संचालक राजेश के बारे में चर्चा है कि वह केमिस्ट है और पहले जींद में रहता था। वह एक दवा कंपनी में नौकरी करता था। बाद में उसने खुद ही पीडी बेस्ड दवाएं बनवानी शुरू कर दी। बाद में इस धंधे में उसके साथ प्रेमशंकर प्रजापति भी शामिल हो गया। बाद में इन दोनों ने औरों के साथ मिलकर खुद की फैक्टरी खोल ली। इसमें हर काम की जिम्मेदारी अलग-अलग हाथों में दे दी गई।
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दवा मंडी से खोज रहे कनेक्शन
दिल्ली की इस नकली फैक्टरी में ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाएं बनती थीं। इसे 60 प्रतिशत मुनाफे पर थोक विक्रेताओं को दिया जाता था। कम रेट में मिलने की वजह से फुटकर विक्रेता 30 फीसदी तक छूट देकर आराम से ये दवाएं बेच रहे थे। भालोटिया से जुड़े एक व्यापारी ने बताया कि इस तरह के धंधे में एक मार्केट में एक बार में ही बड़ी मात्रा में दवाएं भेज दी जाती हैं, जिन्हें धीरे-धीरे महीने भर में खपाया जाता है। जब तक इसकी चर्चा शुरू होती है, तब तक धंधेबाज किसी अन्य मार्केट में पहुंच चुके होते हैं। इस वजह से एक मार्केट में धंधेबाजों की अगली खेप छह महीने बाद ही आती है, जिससे धंधेबाज आसानी से पकड़ में नहीं आते।
कोट
दिल्ली में पकड़ी गई नकली कंपनी से गोरखपुर की मंडी में दवा भेजने की कोई बात अभी तक सामने नहीं आई है। फिर भी मार्केट की हलचल पर नजर रखी जा रही है। राजेश मिश्रा के बारे में यहां से कोई जानकारी नहीं मांगी गई है।
- पूरन चंद, सहायक आयुक्त औषधि- गोरखपुर