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फर्जी प्रवेश प्रकरण : ढाई साल बाद एमएमएमयूटी दर्ज कराएगा पहला केस
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जाली दस्तावेज बनाकर दो वर्षों में 40 विद्यार्थियों को बीटेक में प्रवेश दिए जाने का मामला
प्रबंध बोर्ड की बैठक में पूर्व आउटसोर्सिंग कर्मचारी पर एफआईआर दर्ज कराने की मिली अनुमति
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय प्रशासन ने फर्जी प्रवेश प्रकरण में पहला एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रवेश प्रकोष्ठ में कार्यरत तत्कालीन आउटसोर्सिंग कर्मचारी अवनीश मणि त्रिपाठी के कई खिलाफ कई साक्ष्य मिले हैं। इस आधार पर केस दर्ज कराने के लिए बुधवार को प्रबंध बोर्ड ने अनुमति दे दी है।
करीब ढाई वर्ष पहले जनवरी 2023 में मामले के खुलासे के बाद करीब कई महीने तक अलग-अलग बिंदुओं पर कई समितियों ने जांच की थी। उसमें तीन शिक्षकों और पांच कर्मचारियों के नाम सामने आए थे। किसी के खिलाफ लापरवाही के साक्ष्य थे तो किसी की संलिप्तता पाई गई थी। पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराकर उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश करने की तैयारी भी कर ली थी लेकिन उसी दौरान निष्कासित छात्र हाईकोर्ट चले गए थे। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी कार्रवाई को हाईकोर्ट के फैसले के बाद कार्रवाई किए जाने की योजना बनाई थी।
एमएमएमयूटी प्रशासन के मुताबिक, मामले में नाम आने के बाद ही आउटसोर्सिंग कर्मचारी अवनीश मणि त्रिपाठी ने वहां से नौकरी छोड़ दी थी। उस समय उससे पूछताछ भी की गई थी। अवनीश की पूरी कुंडली विश्वविद्यालय प्रशासन के पास है। इस पूरे मामले में विधिक परामर्श लेने के बाद एफआईआर कराने का निर्णय लिया गया है।
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लिपिक पर केस के बाद बढ़ी थी हलचल
इस मामले में निलंबित लिपिक रवि मोहन श्रीवास्तव की संलिप्तता भी सामने आई थी। दिसंबर 2024 में एक छात्र ने कैंट थाने में उसके खिलाफ केस दर्ज कराया था। आरोप था कि उसने प्रवेश के लिए 2.70 लाख रुपये लिए थे। इस मामले में अप्रैल में रवि मोहन श्रीवास्तव की गिरफ्तारी भी हुई थी। केस दर्ज होने के बाद जनवरी से अप्रैल तक एमएमएमयूटी प्रशासन ने तीन बार रवि मोहन को नोटिस जारी किया था लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका था। इसके बाद बीते 11 जुलाई को लिपिक को निलंबित कर दिया गया था।
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यह है मामला
एमएमएमयूटी प्रशासन ने 10 जनवरी 2023 को खुलासा किया था कि 40 छात्र-छात्राओं ने जाली दस्तावेज के जरिये बीटेक में प्रवेश लिया था। इनमें सत्र 2020-21 के 22 व सत्र 2021-22 के 18 विद्यार्थी शामिल थे। उन सभी छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया गया था। तीन शिक्षक व पांच कर्मचारी जांच की जद में आए थे। जांच में प्रथम दृष्टया इनमें से कुछ की संलिप्तता और कुछ की लापरवाही सामने आई थी। निष्कासित छात्रों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। यह मामला अभी हाईकोर्ट में ही लंबित है।
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प्रबंध बोर्ड की बैठक में पूर्व आउटसोर्सिंग कर्मचारी पर एफआईआर दर्ज कराने की मिली अनुमति
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय प्रशासन ने फर्जी प्रवेश प्रकरण में पहला एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रवेश प्रकोष्ठ में कार्यरत तत्कालीन आउटसोर्सिंग कर्मचारी अवनीश मणि त्रिपाठी के कई खिलाफ कई साक्ष्य मिले हैं। इस आधार पर केस दर्ज कराने के लिए बुधवार को प्रबंध बोर्ड ने अनुमति दे दी है।
करीब ढाई वर्ष पहले जनवरी 2023 में मामले के खुलासे के बाद करीब कई महीने तक अलग-अलग बिंदुओं पर कई समितियों ने जांच की थी। उसमें तीन शिक्षकों और पांच कर्मचारियों के नाम सामने आए थे। किसी के खिलाफ लापरवाही के साक्ष्य थे तो किसी की संलिप्तता पाई गई थी। पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराकर उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश करने की तैयारी भी कर ली थी लेकिन उसी दौरान निष्कासित छात्र हाईकोर्ट चले गए थे। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी कार्रवाई को हाईकोर्ट के फैसले के बाद कार्रवाई किए जाने की योजना बनाई थी।
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एमएमएमयूटी प्रशासन के मुताबिक, मामले में नाम आने के बाद ही आउटसोर्सिंग कर्मचारी अवनीश मणि त्रिपाठी ने वहां से नौकरी छोड़ दी थी। उस समय उससे पूछताछ भी की गई थी। अवनीश की पूरी कुंडली विश्वविद्यालय प्रशासन के पास है। इस पूरे मामले में विधिक परामर्श लेने के बाद एफआईआर कराने का निर्णय लिया गया है।
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लिपिक पर केस के बाद बढ़ी थी हलचल
इस मामले में निलंबित लिपिक रवि मोहन श्रीवास्तव की संलिप्तता भी सामने आई थी। दिसंबर 2024 में एक छात्र ने कैंट थाने में उसके खिलाफ केस दर्ज कराया था। आरोप था कि उसने प्रवेश के लिए 2.70 लाख रुपये लिए थे। इस मामले में अप्रैल में रवि मोहन श्रीवास्तव की गिरफ्तारी भी हुई थी। केस दर्ज होने के बाद जनवरी से अप्रैल तक एमएमएमयूटी प्रशासन ने तीन बार रवि मोहन को नोटिस जारी किया था लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका था। इसके बाद बीते 11 जुलाई को लिपिक को निलंबित कर दिया गया था।
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यह है मामला
एमएमएमयूटी प्रशासन ने 10 जनवरी 2023 को खुलासा किया था कि 40 छात्र-छात्राओं ने जाली दस्तावेज के जरिये बीटेक में प्रवेश लिया था। इनमें सत्र 2020-21 के 22 व सत्र 2021-22 के 18 विद्यार्थी शामिल थे। उन सभी छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया गया था। तीन शिक्षक व पांच कर्मचारी जांच की जद में आए थे। जांच में प्रथम दृष्टया इनमें से कुछ की संलिप्तता और कुछ की लापरवाही सामने आई थी। निष्कासित छात्रों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। यह मामला अभी हाईकोर्ट में ही लंबित है।