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Gorakhpur News: हर साल कुछ घर समा जाते हैं नदी में....फूस की झोपड़ी में कटती है रात

Mon, 11 Aug 2025 01:03 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 11 Aug 2025 01:03 AM IST
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Gorakhpur News: Every year some houses get submerged in the river...nights are spent in thatched huts
मोहरीपुर-सिहोरवा मार्ग पर बलुआ गांव के सामने मुख्य सड़क पर भरा बारिश का पानी
बगहा देवार में शुरू हुई चार साल पहले सरयू नदी की कटान, अब तक 85 घर समा चुके हैं नदी में
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चिल्लूपार। बगहा देवार गांव में चार साल से सरयू नदी खेती और आबादी की जमीन को अपने में विलीन करते हुए आगे बढ़ रही है। अब तक लगभग 85 परिवार इस वजह से बेघर हो चुके हैं। गांव की मुख्य सड़क ही अब सहारा है। कोई फूस की झोपड़ी तो कोई पन्नी तानकर गुजर-बसर कर रहा है। इनके लिए मूलभूत सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हैं। मजदूरी कर परिवार का पेट भरने वाले इन लोगों को चार साल में न तो बचाने का प्रयास किया गया और न ही दूसरी जगह बसाने का। अब पहली बार विस्थापित करने के आदेश के बाद कहीं दूसरी जगह बसने की आस जगी है।

वर्ष 2020 में सरयू नदी की उग्र लहरों ने बड़हलगंज ब्लॉक के बगहा देवार गांव के गड़ेरी टोले को अपनी धारा में समाहित करना शुरू किया। वर्तमान में 12-13 के आसपास घर ही बचे हैं। लगभग 85 परिवार गांव के सटे ही संपर्क मार्ग के किनारे पन्नी तान कर गुजर-बसर करने लगे। कुछ दिन बीतने के बाद 85 कटान पीड़ितों ने झोपड़ी बना ली। मां-बाप, पति-पत्नी व बच्चों समेत छोटे से झोपड़ी में पूरा परिवार जीवनयापन कर रहा है।
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कटान पीड़ितों को दोबारा विस्थापित करने के शासन से रिपोर्ट मांगी गई है। एसडीएम गोला अमित कुमार जायसवाल की तरफ से मुख्यमंत्री आवास देने की घोषणा कर उनके दर्द पर मरहम लगाने की मौखिक कोशिश की गई। इस गांव के लगभग 85 परिवार भरोसे जमीन और आवास की आस में हैं।
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कटान पीड़ितों का दर्द

संपर्क मार्ग पर डाले हैं छप्पर, डराती है तेजी से बढ़ रही नदी
बगहा देवार गांव के गड़ेरिया टोले में सरयू की धारा से घर और खेत पानी में समाहित हो गया है। यहां के लोग परिवार समेत जीवन यापन करने के लिए गांव के पश्चिम स्थित संपर्क मार्ग के किनारे छप्पर में गुजर बसर कर रहे हैं। इस समय सड़क पर टोले की कुल 85 छप्पर हैं। गांव के गंगा पाल, रामलाल और विरेंद्र पाल का कहना है कि वर्ष 2024 में आपदा विभाग की ओर से मामूली आर्थिक सहायता मिली। जैसे-तैसे नए सिरे से झोपड़ी बनाकर गृहस्थी बसाई है। इन दिनों नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू है। नदी कटान करते सड़क के करीब आ गई है। फिर तस्वीर डरावनी हो गई है।अगर सरयू नदी की कटान ने सडक को भी काटकर अपने में समाहित कर लिया तो हम सब कहां जाएंगे।
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फूस के घर में सांप-बिच्छू का डर
सड़क के किनारे फूस की झोपड़ी डालकर रहने वाले गांव के हुकुमचंद साहनी, लालजी साहनी, गोविंद, जयनाथ व गौरी साहनी ने बताया कि रात में उजाले के लिए लगाई गई बिजली जब चली जाती है तो रोशनी के लिए मोबाइल और टाॅर्च का सहारा लेना पड़ता है। फूस के मकान में जहरीले जीव-जंतुओं का भय हर हमेशा बना रहता है। इस सबके बीच सरकार हम सभी कटान पीड़ितों को कहीं विस्थापित करके एकआवास की आस में गुजर-बसर कर रहे हैं। गांव के ही नवनाथ, प्रमोद साहनी, कन्हैया पाल, गया साहनी, चंद्रशेखर, बहादुर पाल, रमेश पाल, राहुल पाल आदि ने बताया कि सरयू नदी में पानी तेजी से बढ़ रहा है। अब तो नदी की धारा देखकर डर लगता है।
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मुआवजे के लिए लेखपाल कर रहे हैं सर्वे
इस संबंध में गोला के एसडीएम अमित कुमार जायसवाल ने बताया कि बगहा देवार के 85 कटान पीड़ित ऐसे हैं जो सड़क पर झुग्गी, झोपड़ी बनाकर अथवा पन्नी तानकर गुजर-बसर कर रहे हैं। उनकी समस्याएं प्रशासन के संज्ञान में है। वहां से रिपोर्ट मांगी गई है। मैंने रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दिया गया है। जिन कटान पीड़ितों की खेती योग्य जमीन, मकान और फसल का नुकसान होगा या हो गया है उन सभी को मुआवजा दिया जाएगा। संबंधित लेखपाल सर्वे कर रहे हैं। इस बार की कटान में जिस किसी का घर कटेगा उनकी सूची आवास के लिए विकास भवन भेजी जाएगी। संबंधित लेखपाल को निर्देश दिया गया है कि सभी कटान पीड़ितों के नाम शामिल करें और सूची उपलब्ध कराएं।


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वर्जन

सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से बगहा-गड़ेरिया संपर्क मार्ग के दोनों तरफ पानी का लेवल बढ़ गया है। विभाग के कर्मचारी बाढ़ क्षेत्र में तैनात हैं। जगह-जगह निगरानी रखी जा रही है।
- सुधांशु सिंह, सहायक अभिंयता, बाढ़ खंड, सिंचाई विभाग
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