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Gorakhpur News: विज्ञान और सूचना क्रांति में डेटा के साथ संतुलन जरूरी

Tue, 26 Aug 2025 01:20 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 26 Aug 2025 01:20 AM IST
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Gorakhpur News: Earlier the education of the state was in a bad state but today it is at the pinnacle of excellence
दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो आशुतोष शर्मा ने विद्यार्थियों को दी नसीहत
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युवाओं को जुनून के साथ करुणा भी अपनानी होगी, विज्ञान की सफलता तभी जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे
गोरखपुर। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के पूर्व सचिव एवं पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा कि आज हम विज्ञान और सूचना क्रांति के युग में जी रहे हैं। यह युग नई संभावनाओं के साथ-साथ कई चुनौतियां भी लेकर आया है। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए युवाओं को चाहिए कि वे डेटा के साथ संतुलन बनाएं, जानकारी को बुद्धिमत्ता में बदलें और अपने जुनून के साथ करुणा का भी समावेश करें। यही भावी नेतृत्व और रचनात्मक समाज की नींव है।

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 44 वें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए प्राे शर्मा ने कहा कि अब नवाचार का समय आ गया है। इससे हम आत्मनिर्भर बन पाएंगे। 2015 में देश में 100 से भी कम स्टार्टअप थे, आज 1.50 लाख से ज्यादा हैं। यह अमृत काल है, युवाओं को आने वाले 35 वर्ष में काम करके दिखाना है। इनोवेशन का मतलब है कि जो भी ज्ञान प्राप्त किया जाए वह समाज और अर्थव्यवस्था के प्रति कार्य करे।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अनुसंधान में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस क्षेत्र में भारत का विश्व में छठवां स्थान है। उन्होंने कहा कि जब भी वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले, वह कहते हैं कि विज्ञान की सफलता तभी मानी जाएगी जब यह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
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प्रो शर्मा ने विद्यार्थियों से कहा कि दीक्षांत केवल एक शैक्षणिक उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है बल्कि यह विद्यार्थियों की मेहनत, धैर्य और संकल्प का उत्सव है। यह दिन उनके जीवन की नई यात्रा का प्रतीक है जहां अपने कर्तव्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारियों को स्वीकारते हैं।

सफलता साझा होती है, असफलता व्यक्तिगत
प्रो. शर्मा ने कहा कि सफलता कभी केवल व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम नहीं होती, बल्कि यह टीमवर्क और सामूहिक सहयोग से संभव होती है। असफलता व्यक्ति की अपनी हो सकती हैं लेकिन सफलता हमेशा साझा होती हैं। यही जीवन का सबसे बड़ा पाठ है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में साहसी, सहज बने रहें और सकारात्मक बदलाव लाने का साहस रखें। यही दृष्टिकोण भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनेगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल अच्छे पेशेवर ही नहीं बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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