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Gorakhpur News: सोना मत मांगिए...जिंदगी मांगने से नहीं मेहनत से पूरी होगी
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के 44 वां दीक्षांत समारोह में उपाधि एवं मेडल प्राप्त करने वाले अभ्यर्थि
कुलाधिपति ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को उनकी भूमिका से कराया अवगत
गोरखपुर। कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल दीक्षांत समारोह में पूरी तरह शिक्षक की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने न सिर्फ विद्यार्थियों को कक्षा और लैब में नियमित जाने की सलाह दी बल्कि शिक्षकों को भी उनकी भूमिका और कर्तव्य का बोध कराया। छात्राें से कहा- आप सबके भीतर हजारों मोदी हैं। अपने अंदर की क्षमता को पहचानो और जिम्मेदारी उठाओ। वर्तमान समय के हालात पर कटाक्ष करते हुए स्वर्ण पदक विजेताओं से कहा कि सोना मत मांगिए। जिंदगी मांगने से नहीं बल्कि मेहनत से पूरी होती है।
राज्यपाल ने अपने 38 मिनट के संबोधन में जीवन के हर उन पहलुओं को सामने रखा जिससे व्यक्ति अनुशासित होकर तरक्की की राह पर आगे बढ़ सके। कहा कि हर विद्यार्थी के भीतर कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है जिसे उजागर करने में शिक्षक, परिवार और मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षण को सेवा बताते हुए कहा कि जब भी वह भ्रमण पर जाती हैं तो छात्राएं उन्हें अपनी ‘शिक्षिका’ के रूप में पहचानती हैं। यही एक शिक्षक का सबसे बड़ा गौरव है।
अनुशासन जरूरी...विरोध होगा पर डरने वाली नहीं
राज्यपाल ने कहा कि यूपी में 25 करोड़ की आबादी है और सबसे ज्यादा युवा यहीं हैं इसलिए सबसे अधिक जिम्मेदारी भी आपकी है। हमने कुछ कड़े फैसले लिए हैं। जो कॉलेज समय पर प्रैक्टिकल और अंक तालिका न भेजें, उनके खिलाफ एक्शन लें। 75 फीसदी उपस्थित छात्र की नहीं है तो परीक्षा नहीं दे पाएंगे। हम जानते हैं कि इसका विरोध होगा पर अनुशासन जरूरी है और वह डरने वाली नहीं हैं।
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बैक पेपर की व्यवस्था यूपी में ही देखा
राज्यपाल ने कहा कि बैक पेपर की व्यवस्था यूपी में ही देखा है। हर साल 2000 छात्र परीक्षा छोड़ दें फिर उनकी परीक्षा कराएं। इस व्यवस्था को भी बंद कराने की जरूरत है। इतनी सख्ती नहीं होगी तो भारत विश्वगुरु नहीं बन पाएगा।
नेपाल भ्रमण कराकर शोध कराएं
राज्यपाल ने कहा कि पड़ोसी देश नेपाल के विश्वविद्यालयों से अकादमिक सहयोग बढ़ाने की भी आवश्यकता है। साइकिल से भ्रमण करते हुए नेपाल तक जा सकते हैं वहां की भौगोलिक परिस्थितियों, रहन-सहन और बदलाव पर शोध करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि एमओयू तो हो रहे हैं पर गतिविधियां नहीं हैं। चर्चा कर इस पर प्रयास करना होगा। शोध में पुरातन छात्रों की मदद लें। कहा कि वर्ल्ड रैकिंग आपकी साख है। गोरखपुर विश्वविद्यालय में 34 विदेश छात्रों ने प्रवेश लिया है, यह उपलब्धि है। जब बेहतर ग्रेड होगा तो विदेश छात्र भी प्रवेश लेंगे।
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गोरखपुर। कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल दीक्षांत समारोह में पूरी तरह शिक्षक की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने न सिर्फ विद्यार्थियों को कक्षा और लैब में नियमित जाने की सलाह दी बल्कि शिक्षकों को भी उनकी भूमिका और कर्तव्य का बोध कराया। छात्राें से कहा- आप सबके भीतर हजारों मोदी हैं। अपने अंदर की क्षमता को पहचानो और जिम्मेदारी उठाओ। वर्तमान समय के हालात पर कटाक्ष करते हुए स्वर्ण पदक विजेताओं से कहा कि सोना मत मांगिए। जिंदगी मांगने से नहीं बल्कि मेहनत से पूरी होती है।
राज्यपाल ने अपने 38 मिनट के संबोधन में जीवन के हर उन पहलुओं को सामने रखा जिससे व्यक्ति अनुशासित होकर तरक्की की राह पर आगे बढ़ सके। कहा कि हर विद्यार्थी के भीतर कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है जिसे उजागर करने में शिक्षक, परिवार और मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षण को सेवा बताते हुए कहा कि जब भी वह भ्रमण पर जाती हैं तो छात्राएं उन्हें अपनी ‘शिक्षिका’ के रूप में पहचानती हैं। यही एक शिक्षक का सबसे बड़ा गौरव है।
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अनुशासन जरूरी...विरोध होगा पर डरने वाली नहीं
राज्यपाल ने कहा कि यूपी में 25 करोड़ की आबादी है और सबसे ज्यादा युवा यहीं हैं इसलिए सबसे अधिक जिम्मेदारी भी आपकी है। हमने कुछ कड़े फैसले लिए हैं। जो कॉलेज समय पर प्रैक्टिकल और अंक तालिका न भेजें, उनके खिलाफ एक्शन लें। 75 फीसदी उपस्थित छात्र की नहीं है तो परीक्षा नहीं दे पाएंगे। हम जानते हैं कि इसका विरोध होगा पर अनुशासन जरूरी है और वह डरने वाली नहीं हैं।
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बैक पेपर की व्यवस्था यूपी में ही देखा
राज्यपाल ने कहा कि बैक पेपर की व्यवस्था यूपी में ही देखा है। हर साल 2000 छात्र परीक्षा छोड़ दें फिर उनकी परीक्षा कराएं। इस व्यवस्था को भी बंद कराने की जरूरत है। इतनी सख्ती नहीं होगी तो भारत विश्वगुरु नहीं बन पाएगा।
नेपाल भ्रमण कराकर शोध कराएं
राज्यपाल ने कहा कि पड़ोसी देश नेपाल के विश्वविद्यालयों से अकादमिक सहयोग बढ़ाने की भी आवश्यकता है। साइकिल से भ्रमण करते हुए नेपाल तक जा सकते हैं वहां की भौगोलिक परिस्थितियों, रहन-सहन और बदलाव पर शोध करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि एमओयू तो हो रहे हैं पर गतिविधियां नहीं हैं। चर्चा कर इस पर प्रयास करना होगा। शोध में पुरातन छात्रों की मदद लें। कहा कि वर्ल्ड रैकिंग आपकी साख है। गोरखपुर विश्वविद्यालय में 34 विदेश छात्रों ने प्रवेश लिया है, यह उपलब्धि है। जब बेहतर ग्रेड होगा तो विदेश छात्र भी प्रवेश लेंगे।