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संशोधित: रजिस्ट्री दफ्तर
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रजिस्ट्री दफ्तर में अधिकारी-कर्मचारी और अधिवक्ता में विवाद...दोपहर तक बंद रहे बैनामे
अधिकारियों के हस्तक्षेप पर शुरू हुई रजिस्ट्री, डीएम के निर्देश पर एडीएम एफआर ने की बात, दोनों पक्षों में सुलह
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। रजिस्ट्री दफ्तर में शनिवार की शाम को दो सब रजिस्ट्रार और कर्मचारियों से एक अधिवक्ता का विवाद हो गया। आरोप है कि अधिवक्ता ने बदसलूकी और अधिकारी से हाथपाई भी की। सोमवार को दोनों उप निबंधक ने डीएम को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। उधर, घटना से नाराज कर्मचारियों ने सोमवार को कामकाज बंद कर दिया। दोपहर तक बैनामे नहीं हुए। डीआईजी स्टांप के निर्देश पर फिर बैनामा का काम शुरू हुआ।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार की शाम करीब पांच बजे अधिवक्ता विनय चंद और कार्यालय के संविदा कर्मचारी अवीनाश कुमार प्रजापति के बीच विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि 63 डिसमिल की रजिस्ट्री के दस्तावेज की जांच कराने को लेकर मामला गरमाया।
डीएम को दिए गए प्रार्थना पत्र में सब रजिस्टार प्रथम सुबोध कुमार राय और द्वितीय प्रसेनजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि अपने साथी के साथ आए अधिवक्ता ने कर्मचारी से मारपीट की और एआईजी स्टांप को अपशब्द कहा। विवाद बढ़ता देख कार्यालय को बंद करा लिया गया। इसकी सूचना एडीएम एफआर को दी गई, जिसके बाद वे आए और हम लोगों को सुरिक्षत कलक्ट्रेट कंपाउंड से बाहर निकाले। उधर, अधिवक्ता विनय चंद ने सारे आरोपों को निराधार बताया। कहा कि सीसीटीवी कैमरे की जांच करा ली जाए, सब कुछ सामने आ जाएगा।
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सोमवार को सुबह 10 बजे रजिस्ट्री दफ्तर में कर्मचारियों ने रजिस्ट्री का काम बंद कर दिया। रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोग परेशान हो गए। इसकी सूचना डीआईजी स्टांप मनोज शुक्ला को हुई तो उन्होंने दोनों उप निबंधक से बात की और उन्हें समझाकर रजिस्ट्री का काम शुरू कराया। हालांकि इस बीच 30 से 40 लोग रजिस्ट्री कराने आए थे पर कामकाज बंद देख लौट गए।
वर्जन
शनिवार को निबंधन कार्यालय में अधिकारी और अधिवक्ता के बीच किसी मामले को लेकर विवाद हुआ था। सोमवार को निबंधन अधिकारी और अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों को बुलाया था। दोनों पक्ष ने समझौता कर लिया है।
विनीत कुमार सिंह, एडीएम एफआर
कार्यालय में अधिवक्ता द्वारा कर्मचारियों और उप निबंधक से बदसलूकी की गई थी। इससे कर्मचारी और अधिकारी नाराज थे। सोमवार को कुछ देर तक रजिस्ट्री का काम प्रभावित हुआ। मैंने निर्देशित किया कि जनता को असुविधा नहीं होनी चाहिए। इसके बाद रजिस्ट्री का काम शुरू हो गया। -मनोज शुक्ला, डीआईजी स्टांप
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अधिकारियों के हस्तक्षेप पर शुरू हुई रजिस्ट्री, डीएम के निर्देश पर एडीएम एफआर ने की बात, दोनों पक्षों में सुलह
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। रजिस्ट्री दफ्तर में शनिवार की शाम को दो सब रजिस्ट्रार और कर्मचारियों से एक अधिवक्ता का विवाद हो गया। आरोप है कि अधिवक्ता ने बदसलूकी और अधिकारी से हाथपाई भी की। सोमवार को दोनों उप निबंधक ने डीएम को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। उधर, घटना से नाराज कर्मचारियों ने सोमवार को कामकाज बंद कर दिया। दोपहर तक बैनामे नहीं हुए। डीआईजी स्टांप के निर्देश पर फिर बैनामा का काम शुरू हुआ।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार की शाम करीब पांच बजे अधिवक्ता विनय चंद और कार्यालय के संविदा कर्मचारी अवीनाश कुमार प्रजापति के बीच विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि 63 डिसमिल की रजिस्ट्री के दस्तावेज की जांच कराने को लेकर मामला गरमाया।
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डीएम को दिए गए प्रार्थना पत्र में सब रजिस्टार प्रथम सुबोध कुमार राय और द्वितीय प्रसेनजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि अपने साथी के साथ आए अधिवक्ता ने कर्मचारी से मारपीट की और एआईजी स्टांप को अपशब्द कहा। विवाद बढ़ता देख कार्यालय को बंद करा लिया गया। इसकी सूचना एडीएम एफआर को दी गई, जिसके बाद वे आए और हम लोगों को सुरिक्षत कलक्ट्रेट कंपाउंड से बाहर निकाले। उधर, अधिवक्ता विनय चंद ने सारे आरोपों को निराधार बताया। कहा कि सीसीटीवी कैमरे की जांच करा ली जाए, सब कुछ सामने आ जाएगा।
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सोमवार को सुबह 10 बजे रजिस्ट्री दफ्तर में कर्मचारियों ने रजिस्ट्री का काम बंद कर दिया। रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोग परेशान हो गए। इसकी सूचना डीआईजी स्टांप मनोज शुक्ला को हुई तो उन्होंने दोनों उप निबंधक से बात की और उन्हें समझाकर रजिस्ट्री का काम शुरू कराया। हालांकि इस बीच 30 से 40 लोग रजिस्ट्री कराने आए थे पर कामकाज बंद देख लौट गए।
वर्जन
शनिवार को निबंधन कार्यालय में अधिकारी और अधिवक्ता के बीच किसी मामले को लेकर विवाद हुआ था। सोमवार को निबंधन अधिकारी और अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों को बुलाया था। दोनों पक्ष ने समझौता कर लिया है।
विनीत कुमार सिंह, एडीएम एफआर
कार्यालय में अधिवक्ता द्वारा कर्मचारियों और उप निबंधक से बदसलूकी की गई थी। इससे कर्मचारी और अधिकारी नाराज थे। सोमवार को कुछ देर तक रजिस्ट्री का काम प्रभावित हुआ। मैंने निर्देशित किया कि जनता को असुविधा नहीं होनी चाहिए। इसके बाद रजिस्ट्री का काम शुरू हो गया। -मनोज शुक्ला, डीआईजी स्टांप