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धनतेरस : शुभ मुहूर्त में हुई भगवान धन्वंतरि की पूजा
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छोटी दिवाली व नरक चतुर्दशी आज, जलेगा यम का एक दीया
गोरखपुर। धनतेरस को लेकर दिन में लोगों ने जमकर खरीदारी की। जबकि शाम को शुभ मुहूर्त में लोगों ने विष्णु अवतार भगवान धन्वंतरि की पूजा अर्चना की।
बताया जा रहा है कि शाम को 06: 41 बजे से शाम 07:53 बजे तक शुभ बेला में धन्वंतरि के पूजन को पूर्ण प्रशस्त समय माना गया। इसी समय के बीच लोगों ने पूजन-अर्चन किया। श्रद्धालुओं ने घर व मंदिरों में माता महालक्ष्मी व कुबेर की भी पूजा की। भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी व कुबेर को कुमकुम लगा कर फूल, दूर्वा, पान, हल्दी, पीला चावल, फल इत्यादि अर्पण किया। इसके बाद भगवान से रोगों के नाश व आरोग्यता के लिए प्रार्थना की। क्षमा याचना के बाद विधिपूर्वक आरती कर प्रसाद वितरण किया गया। भगवान धनवंतरी जयंती के शुभ अवसर पर वैद्य राजीव सिन्हा ने कहा कि देवताओं के चिकित्सक और आयुर्वेद के देवता भगवान धनवंतरी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।
छोटी दिवाली व नरक चतुर्दशी आज
छोटी दिवाली व नरक चतुर्दशी रविवार को मनाई जाएगी। शाम को यम का एक दीया लोग घर के बाहर जलाएंगे। बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत आचार्य राम नारायण त्रिपाठी ने बताया कि दीपावली पर्व का द्वितीय दिन नरक चतुर्दशी होता है, यह 19 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्योदय 6:19 बजे और त्रयोदशी तिथि का मान दिन में 01:54 बजे तक है। इसके बाद कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी और उत्तरा फाल्गुनी सायंकाल 06:52 बजे तक है। इसके बाद हस्त नक्षत्र नक्षत्र मित्र नामक औदायिक योग भी है। भगवान कृष्ण ने इसी दिन सायंकाल नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इस दिन प्रातः काल त्रयोदशी होने पर भी सूर्योदय के पूर्व स्नान करना चाहिए। इसे रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो रूप चतुर्दशी के दिन सूर्योदय के पूर्व स्नान करता है, उसे यमलोक का दर्शन नहीं करना पड़ता है। शाम को यम के नाम एक दीया घर के बाहर जलाना चाहिए।
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गोरखपुर। धनतेरस को लेकर दिन में लोगों ने जमकर खरीदारी की। जबकि शाम को शुभ मुहूर्त में लोगों ने विष्णु अवतार भगवान धन्वंतरि की पूजा अर्चना की।
बताया जा रहा है कि शाम को 06: 41 बजे से शाम 07:53 बजे तक शुभ बेला में धन्वंतरि के पूजन को पूर्ण प्रशस्त समय माना गया। इसी समय के बीच लोगों ने पूजन-अर्चन किया। श्रद्धालुओं ने घर व मंदिरों में माता महालक्ष्मी व कुबेर की भी पूजा की। भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी व कुबेर को कुमकुम लगा कर फूल, दूर्वा, पान, हल्दी, पीला चावल, फल इत्यादि अर्पण किया। इसके बाद भगवान से रोगों के नाश व आरोग्यता के लिए प्रार्थना की। क्षमा याचना के बाद विधिपूर्वक आरती कर प्रसाद वितरण किया गया। भगवान धनवंतरी जयंती के शुभ अवसर पर वैद्य राजीव सिन्हा ने कहा कि देवताओं के चिकित्सक और आयुर्वेद के देवता भगवान धनवंतरी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।
छोटी दिवाली व नरक चतुर्दशी आज
छोटी दिवाली व नरक चतुर्दशी रविवार को मनाई जाएगी। शाम को यम का एक दीया लोग घर के बाहर जलाएंगे। बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत आचार्य राम नारायण त्रिपाठी ने बताया कि दीपावली पर्व का द्वितीय दिन नरक चतुर्दशी होता है, यह 19 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्योदय 6:19 बजे और त्रयोदशी तिथि का मान दिन में 01:54 बजे तक है। इसके बाद कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी और उत्तरा फाल्गुनी सायंकाल 06:52 बजे तक है। इसके बाद हस्त नक्षत्र नक्षत्र मित्र नामक औदायिक योग भी है। भगवान कृष्ण ने इसी दिन सायंकाल नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इस दिन प्रातः काल त्रयोदशी होने पर भी सूर्योदय के पूर्व स्नान करना चाहिए। इसे रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो रूप चतुर्दशी के दिन सूर्योदय के पूर्व स्नान करता है, उसे यमलोक का दर्शन नहीं करना पड़ता है। शाम को यम के नाम एक दीया घर के बाहर जलाना चाहिए।
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