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Gorakhpur News: गैलेक्सी के रहस्य पर शोध करेंगे डीडीयू के शोधार्थी
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भौतिक विज्ञान की डाॅ. अपरा त्रिपाठी की टीम कर रही शोध
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान के शोधार्थी गैलेक्सी के रहस्य पर शोध कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने इन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।
भौतिक विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डाॅ. अपरा त्रिपाठी के नेतृत्व में शोधार्थी उन गैलेक्सी का अध्ययन करेंगे, जिनका हिस्सा तारे हैं जो एक साथ जन्मे होते हैं और आकाश गंगा में एक परिवार की तरह विचरण करते हैं। शोध का उद्देश्य यह समझना है कि तारागुच्छ आकाशगंगा की संरचना और विकास में किस प्रकार योगदान करते हैं और किस तरह समय के साथ नया परिवार विकसित कर नई गैलेक्सी का निर्माण करते हैं। शोधकर्ता अपने अध्ययन में आधुनिक सांख्यिकीय और कंम्प्यूटेशनल तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। जिससे तारागुच्छों पर पिछले अध्ययनों में पाई गई विसंगतियों को दूर किया जा सके। अध्ययन के लिए स्पेस टेलीस्कोप और ग्राउंड-आधारित आप्टिकल व इन्फ्रारेड टेलीस्कोप का उपयोग किया जाएगा।
डाॅ. अपरा त्रिपाठी ने बताया कि तारागुच्छ खगोल विज्ञान की भाषा में खगोलीय प्रयोगशाला कहे जाते हैं। ऐसा इसलिए कि यह तारागुच्छ खगोलविदों को यह समझने में मदद करते हैं कि तारे कैसे जन्म लेते हैं, विकसित होते हैं और समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि अध्ययन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह जानना होता है कि कौन से तारे किसी गैलेक्सी का हिस्सा है और कौन से दृष्टिभ्रम के कारण नजदीक दिखाई देते हैं। उनकी शोधार्थी टीम में डाॅ. सौरभ शर्मा, डाॅ. नीलम पवार, डाॅ. रामाकांत यादव और बृजेश कुमार शामिल हैं।
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कोट...
शोध-अध्ययन में विश्वविद्यालय का पूरा सहयोग रहेगा। तारागुच्छों का अध्ययन करके हमारे शोधकर्ता आकाशगंगा के विकास को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान के शोधार्थी गैलेक्सी के रहस्य पर शोध कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने इन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।
भौतिक विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डाॅ. अपरा त्रिपाठी के नेतृत्व में शोधार्थी उन गैलेक्सी का अध्ययन करेंगे, जिनका हिस्सा तारे हैं जो एक साथ जन्मे होते हैं और आकाश गंगा में एक परिवार की तरह विचरण करते हैं। शोध का उद्देश्य यह समझना है कि तारागुच्छ आकाशगंगा की संरचना और विकास में किस प्रकार योगदान करते हैं और किस तरह समय के साथ नया परिवार विकसित कर नई गैलेक्सी का निर्माण करते हैं। शोधकर्ता अपने अध्ययन में आधुनिक सांख्यिकीय और कंम्प्यूटेशनल तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। जिससे तारागुच्छों पर पिछले अध्ययनों में पाई गई विसंगतियों को दूर किया जा सके। अध्ययन के लिए स्पेस टेलीस्कोप और ग्राउंड-आधारित आप्टिकल व इन्फ्रारेड टेलीस्कोप का उपयोग किया जाएगा।
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डाॅ. अपरा त्रिपाठी ने बताया कि तारागुच्छ खगोल विज्ञान की भाषा में खगोलीय प्रयोगशाला कहे जाते हैं। ऐसा इसलिए कि यह तारागुच्छ खगोलविदों को यह समझने में मदद करते हैं कि तारे कैसे जन्म लेते हैं, विकसित होते हैं और समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि अध्ययन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह जानना होता है कि कौन से तारे किसी गैलेक्सी का हिस्सा है और कौन से दृष्टिभ्रम के कारण नजदीक दिखाई देते हैं। उनकी शोधार्थी टीम में डाॅ. सौरभ शर्मा, डाॅ. नीलम पवार, डाॅ. रामाकांत यादव और बृजेश कुमार शामिल हैं।
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कोट...
शोध-अध्ययन में विश्वविद्यालय का पूरा सहयोग रहेगा। तारागुच्छों का अध्ययन करके हमारे शोधकर्ता आकाशगंगा के विकास को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति