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बर्ड फ्लू : कौओं और नेवले से दूसरे जानवरों तक पहुंच रहा संक्रमण
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विशेषज्ञों ने चिड़ियाघर में संक्रमण का कैरियर माना, हटाने की दी सलाह
वेटलैंड में बड़ी संख्या में हैं कौवे और नेवले
गोरखपुर। पिछले दो दिनों में चार कौओं की मौत से चिड़ियाघर में हड़कंप मचा हुआ है। बर्ड फ्लू से ही इनकी मौत की आशंका जताई जा रही है। चिड़ियाघर के वेटलैंड में बड़ी संख्या में कौए, प्रवासी पक्षी और नेवले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यही संक्रमण के कैरियर हैं। इन्हीं से वायरस दूसरे वन्यजीवों तक पहुंच रहा है।
पिछले दिनों आईवीआरआई, बरेली की टीम ने भी इसे लेकर आशंका व्यक्त की थी। टीम ने चिंता जताई कि कहीं कौओं की वजह से तो चिड़ियाघर में बीमारियां नहीं फैल रही हैं। कौओं को वेटलैंड में भोजन आसानी से मिल जाता है। इसकी वजह से इनकी संख्या बढ़ती जा रही है।
पशु विशेषज्ञों के अनुसार, कौओं में भी बर्ड फ्लू के वायरस होने की आशंका 90 फीसदी रहती है। ये मांस खाते हैं और एक से दूसरी जगह जाते रहते हैं। इस दौरान कहीं जूठा मांस भी फेंक देते हैं। इसके अलावा यदि संक्रमित कौआ जानवर के पास बैठ जाए तो उससे भी संक्रमण फैल सकता है। उनके मल से भी संक्रमण की आशंका रहती है। आईवीआरआई की टीम ने कौओं को हटाने की सलाह भी दी है। हालांकि, इन्हें हटाने का अभी कोई उपाय चिड़ियाघर प्रशासन को नजर नहीं आ रहा।
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चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि जानवरों को बाड़े में नहीं निकाला जा रहा है। कौओं और नेवलों से संक्रमण फैलने की आशंका है। बाड़ों को लगातार सैनिटाइज करवाया जा रहा है।
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वेटलैंड में बड़ी संख्या में हैं कौवे और नेवले
गोरखपुर। पिछले दो दिनों में चार कौओं की मौत से चिड़ियाघर में हड़कंप मचा हुआ है। बर्ड फ्लू से ही इनकी मौत की आशंका जताई जा रही है। चिड़ियाघर के वेटलैंड में बड़ी संख्या में कौए, प्रवासी पक्षी और नेवले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यही संक्रमण के कैरियर हैं। इन्हीं से वायरस दूसरे वन्यजीवों तक पहुंच रहा है।
पिछले दिनों आईवीआरआई, बरेली की टीम ने भी इसे लेकर आशंका व्यक्त की थी। टीम ने चिंता जताई कि कहीं कौओं की वजह से तो चिड़ियाघर में बीमारियां नहीं फैल रही हैं। कौओं को वेटलैंड में भोजन आसानी से मिल जाता है। इसकी वजह से इनकी संख्या बढ़ती जा रही है।
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पशु विशेषज्ञों के अनुसार, कौओं में भी बर्ड फ्लू के वायरस होने की आशंका 90 फीसदी रहती है। ये मांस खाते हैं और एक से दूसरी जगह जाते रहते हैं। इस दौरान कहीं जूठा मांस भी फेंक देते हैं। इसके अलावा यदि संक्रमित कौआ जानवर के पास बैठ जाए तो उससे भी संक्रमण फैल सकता है। उनके मल से भी संक्रमण की आशंका रहती है। आईवीआरआई की टीम ने कौओं को हटाने की सलाह भी दी है। हालांकि, इन्हें हटाने का अभी कोई उपाय चिड़ियाघर प्रशासन को नजर नहीं आ रहा।
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चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि जानवरों को बाड़े में नहीं निकाला जा रहा है। कौओं और नेवलों से संक्रमण फैलने की आशंका है। बाड़ों को लगातार सैनिटाइज करवाया जा रहा है।