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Gorakhpur News: आवरा कुत्तों से रहें सावधान.. हर दिन डाग बाइट के 150 से अधिक केस
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गोरखपुर। गली में कोई कुत्ता या उनका झुंड दिखे तो सतर्कता बरतें। सुबह टहलने निकल रहे हैं तो हाथ में डंडा जरूर रखें। इस वक्त कुत्तों के व्यवहार में परिवर्तन आ रहा है। एक तो उन्हें भोजन नहीं मिल रहा, दूसरे यह उनका प्रजनन काल भी है। इसलिए वे उग्र बर्ताव करते हैं। ऐसे में अचानक वे हमलावर भी हो सकते हैं। जिला अस्पताल में हर दिन 150 से अधिक नए मरीजों को एंटी रैबिज का इंजेक्शन लग रहा है। एक सप्ताह में ही 879 लोगों को यहां टीका लगाया जा चुका है।
पशुओं के व्यवहार को जानने वाले लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार के डॉ. निलेश बताते हैं कि अगस्त से अक्तूबर तक कुत्तों के मिलाप का वक्त होता है। इन दिनों इनका व्यवहार उग्र होता है। अपने पार्टनर की तलाश में इधर-उधर भागने के चलते इन दिनों इन्हें भूख-प्यास भी अधिक लगती है। पहले लोग गली के आवारा कुत्तों के लिए भी घर के बाहर भोजन-पानी रखते थे, लेकिन अब शहरी इलाकों में इस तरह का चलन बिल्कुल ही बंद हो चुका है।
उन्होंने बताया कि शहरों में सफाई व्यवस्था में सुधार के चलते भी इन जानवरों को फेंका हुआ खाना कहीं मिल नहीं रहा है, जिससे ये भूखे रह जा रहे हैं। ऐसे में इनके व्यवहार में परिवर्तन स्वाभाविक है। कई बार ये किसी इंसान को देखकर उसकी तरफ भोजन-पानी मिलने की उम्मीद में भी दौड़ लगा देते हैं।
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जिला अस्पताल में हर दिन जुट रही भीड़
सीएमएस डॉ. वीके सुमन ने बताया कि हर दिन डाग बाइट के 150 से अधिक मामले आ रहे हैं। 12 अगस्त को 216 लोगों को एंटी रैबिज का इंजेक्शन लगाया गया। 13 अगस्त को 140 और 14 अगस्त को 100 लोगों को इंजेक्शन लगा। 15 अगस्त को अवकाश के चलते कोई इंजेक्शन नहीं लगा। 16 तारीख को फिर 233 लोगों और 17 तारीख को भी 190 लोगों को इंजेक्शन लगा।
ये रखें सावधानियां
पशु विज्ञानी डॉ. निलेश बताते हैं कि वैसे तो कुत्ते आम आदमी पर हमला नहीं करते, लेकिन कई बार अत्यधिक भूख या किसी अन्य परिस्थितिजन्य कारणों से हमला कर भी सकते हैं। जैसे कि अगर आप उनके बगल से गुजर रहे हैं और गलती से पैर से उनकी पूंछ दब जाए या उन्हें इस बात का आभास हो कि वहां से आप उन्हें हटाना चाहते हैं तो भी वे हमलावर हो सकते हैं। इसलिए ये सावधानी जरूर रखें..।
कुत्ते या उनके झुंड से दूरी बनाकर चलें।
अगर सुबह-शाम टहलने निकल रहे हैं तो साथ में छोटी छड़ी जरूर रखें, ताकि हमला के वक्त बचाव कर सकें।
अगर गली में कुत्ते हैं तो उनके भोजन-पानी का प्रबंध कराएं ताकि वे हमलावर न हों।
अगर कुत्ता हांफ रहा है और मुंह से लार टपक रही है तो उससे अत्यधिक सावधान रहें।
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पशुओं के व्यवहार को जानने वाले लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार के डॉ. निलेश बताते हैं कि अगस्त से अक्तूबर तक कुत्तों के मिलाप का वक्त होता है। इन दिनों इनका व्यवहार उग्र होता है। अपने पार्टनर की तलाश में इधर-उधर भागने के चलते इन दिनों इन्हें भूख-प्यास भी अधिक लगती है। पहले लोग गली के आवारा कुत्तों के लिए भी घर के बाहर भोजन-पानी रखते थे, लेकिन अब शहरी इलाकों में इस तरह का चलन बिल्कुल ही बंद हो चुका है।
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उन्होंने बताया कि शहरों में सफाई व्यवस्था में सुधार के चलते भी इन जानवरों को फेंका हुआ खाना कहीं मिल नहीं रहा है, जिससे ये भूखे रह जा रहे हैं। ऐसे में इनके व्यवहार में परिवर्तन स्वाभाविक है। कई बार ये किसी इंसान को देखकर उसकी तरफ भोजन-पानी मिलने की उम्मीद में भी दौड़ लगा देते हैं।
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जिला अस्पताल में हर दिन जुट रही भीड़
सीएमएस डॉ. वीके सुमन ने बताया कि हर दिन डाग बाइट के 150 से अधिक मामले आ रहे हैं। 12 अगस्त को 216 लोगों को एंटी रैबिज का इंजेक्शन लगाया गया। 13 अगस्त को 140 और 14 अगस्त को 100 लोगों को इंजेक्शन लगा। 15 अगस्त को अवकाश के चलते कोई इंजेक्शन नहीं लगा। 16 तारीख को फिर 233 लोगों और 17 तारीख को भी 190 लोगों को इंजेक्शन लगा।
ये रखें सावधानियां
पशु विज्ञानी डॉ. निलेश बताते हैं कि वैसे तो कुत्ते आम आदमी पर हमला नहीं करते, लेकिन कई बार अत्यधिक भूख या किसी अन्य परिस्थितिजन्य कारणों से हमला कर भी सकते हैं। जैसे कि अगर आप उनके बगल से गुजर रहे हैं और गलती से पैर से उनकी पूंछ दब जाए या उन्हें इस बात का आभास हो कि वहां से आप उन्हें हटाना चाहते हैं तो भी वे हमलावर हो सकते हैं। इसलिए ये सावधानी जरूर रखें..।
कुत्ते या उनके झुंड से दूरी बनाकर चलें।
अगर सुबह-शाम टहलने निकल रहे हैं तो साथ में छोटी छड़ी जरूर रखें, ताकि हमला के वक्त बचाव कर सकें।
अगर गली में कुत्ते हैं तो उनके भोजन-पानी का प्रबंध कराएं ताकि वे हमलावर न हों।
अगर कुत्ता हांफ रहा है और मुंह से लार टपक रही है तो उससे अत्यधिक सावधान रहें।