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अधिकाधिक संख्या में करें पेटेंट के लिए आवेदन : प्रो. जेपी सैनी
Thu, 17 Oct 2024 05:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 17 Oct 2024 05:53 AM IST
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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के आईपी सेल की ओर से बुधवार को पेटेंट जागरूकता पर ‘पेटेंट फाइलिंग एंड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स’ विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह प्रयास है कि सभी विभाग अधिकाधिक संख्या में पेटेंट के लिए आवेदन करें। पेटेंट प्रक्रिया में विश्वविद्यालय शोधकर्ताओं की मदद करेगा। प्रत्येक विभाग के लिए न्यूनतम 10 पेटेंट आवेदन फाइल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विश्वास है कि सभी विभाग यह लक्ष्य प्राप्त करने में सफल होंगे।
मुख्य वक्ता आईपी नेशन लॉ फर्म के आशीष शर्मा ने बताया कि बौद्धिक संपदा कई प्रकार की होती है। कोई नया विचार, आविष्कार, साहित्यिक रचना, ट्रेड मार्क, औद्योगिक डिजाइन, पेटेंट आदि। आमतौर पर शोधकर्ताओं को जानकारी नहीं होती है कि वे क्या पेटेंट करा सकते हैं और क्या नहीं। इस वजह से बहुत से शोधार्थी पेटेंट के लिए आवेदन नहीं करते हैं। कोई वस्तु पेटेंट हो सकती है अथवा नहीं इसके तीन आधार होते हैं। एक, नई बनी वस्तु पहले से उपलब्ध वस्तुओं से कितनी अलग है। दूसरा, नई वस्तु की औद्योगिक उपयोगिता कितनी है। तीसरा, वह कितनी अप्रकट है। सरकार ने पेटेंट आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाया है। वर्ष 2023 में प्रतिदिन औसतन 247 पेटेंट आवेदन फाइल किए गए। प्रत्येक शोधकर्ता को पेटेंट अवश्य लेना चाहिए। उन्होंने पेटेंट आवेदन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
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इससे पूर्व अधिष्ठाता शोध प्रो राकेश कुमार ने स्वागत वक्तव्य दिया। प्रो. आरके यादव ने संचालन व डॉ. नवदीप सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह प्रयास है कि सभी विभाग अधिकाधिक संख्या में पेटेंट के लिए आवेदन करें। पेटेंट प्रक्रिया में विश्वविद्यालय शोधकर्ताओं की मदद करेगा। प्रत्येक विभाग के लिए न्यूनतम 10 पेटेंट आवेदन फाइल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विश्वास है कि सभी विभाग यह लक्ष्य प्राप्त करने में सफल होंगे।
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मुख्य वक्ता आईपी नेशन लॉ फर्म के आशीष शर्मा ने बताया कि बौद्धिक संपदा कई प्रकार की होती है। कोई नया विचार, आविष्कार, साहित्यिक रचना, ट्रेड मार्क, औद्योगिक डिजाइन, पेटेंट आदि। आमतौर पर शोधकर्ताओं को जानकारी नहीं होती है कि वे क्या पेटेंट करा सकते हैं और क्या नहीं। इस वजह से बहुत से शोधार्थी पेटेंट के लिए आवेदन नहीं करते हैं। कोई वस्तु पेटेंट हो सकती है अथवा नहीं इसके तीन आधार होते हैं। एक, नई बनी वस्तु पहले से उपलब्ध वस्तुओं से कितनी अलग है। दूसरा, नई वस्तु की औद्योगिक उपयोगिता कितनी है। तीसरा, वह कितनी अप्रकट है। सरकार ने पेटेंट आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाया है। वर्ष 2023 में प्रतिदिन औसतन 247 पेटेंट आवेदन फाइल किए गए। प्रत्येक शोधकर्ता को पेटेंट अवश्य लेना चाहिए। उन्होंने पेटेंट आवेदन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।
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इससे पूर्व अधिष्ठाता शोध प्रो राकेश कुमार ने स्वागत वक्तव्य दिया। प्रो. आरके यादव ने संचालन व डॉ. नवदीप सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।