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Gorakhpur News: बर्ड फ्लू संक्रमण के बीच चिड़ियाघर के पास डंप होंगे कुर्बानी के अवशेष
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प्राणि उद्यान ने चिंता जताते हुए नगर निगम को लिखा था पत्र
गोरखपुर। चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू संक्रमण की वजह से बाघिन शक्ति समेत कुछ पक्षियों की मौत हो चुकी है। कौओं से संक्रमण फैलने की चर्चाएं चल रही हैं। इस बीच बकरीद पर कुर्बानी के पशुओं के अवशेष चिड़ियाघर की चहारदीवारी के पास डंप किए जाएंगे। चिड़ियाघर प्रशासन ने पहले ही नगर निगम को पत्र लिख कर एतराज भी जताया था। इसके बावजूद शुक्रवार की रात वहां करीब 20 गढ्ढे बनाए गए।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान के निदेशक विकास यादव ने बताया कि चिड़ियाघर में 400 से अधिक वन्यजीव संरक्षित हैं। पिछले वर्षों के अनुभवों का संज्ञान लेते हुए पहले ही नगर निगम को पत्र लिख कर एतराज और चिंता व्यक्त किया था। आश्वासन भी मिला था कि ऐसा नहीं किया जाएगा। बारिश के बाद दुर्गंध के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। कचरे और अवशेषों से उठने वाली बदबू से वन्यजीव विचलित हो जाते हैं, जिससे उनके बीमार पड़ने की आशंका बनी रहती है।
चिड़ियाघर की चहारदीवारी के साथ एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में तकरीबन 150 एकड़ भूमि गोरखपुर वन प्रभाग की देखरेख में है। आसपास के लोगों के विरोध के बावजूद यहीं पर पिछले कई सालों से बकरीद पर कुर्बानी के पशुओं के अवशेष डंप किए जाते रहे हैं। एकला बांध पर 1000 किलोग्राम प्रति घंटे की क्षमता का बना पशु शव दाह गृह तकनीकी खामियों के कारण पिछले डेढ़ माह से बंद पड़ा है।
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वर्जन...
कुर्बानी के अवशेष इस बार शहर के अलग-अलग स्थानों पर निस्तारण वैज्ञानिक विधि से डंप किए जाएंगे। चिड़ियाघर के पास केवल 20 प्रतिशत अवशेष ही डंप होंगे। नौसड़ में पशु शवदाह गृह का संचालन भी एक दो दिन में शुरू हो जाएगा।
- गौरव सिंह सोगरवाल, नगर आयुक्त
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गोरखपुर। चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू संक्रमण की वजह से बाघिन शक्ति समेत कुछ पक्षियों की मौत हो चुकी है। कौओं से संक्रमण फैलने की चर्चाएं चल रही हैं। इस बीच बकरीद पर कुर्बानी के पशुओं के अवशेष चिड़ियाघर की चहारदीवारी के पास डंप किए जाएंगे। चिड़ियाघर प्रशासन ने पहले ही नगर निगम को पत्र लिख कर एतराज भी जताया था। इसके बावजूद शुक्रवार की रात वहां करीब 20 गढ्ढे बनाए गए।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान के निदेशक विकास यादव ने बताया कि चिड़ियाघर में 400 से अधिक वन्यजीव संरक्षित हैं। पिछले वर्षों के अनुभवों का संज्ञान लेते हुए पहले ही नगर निगम को पत्र लिख कर एतराज और चिंता व्यक्त किया था। आश्वासन भी मिला था कि ऐसा नहीं किया जाएगा। बारिश के बाद दुर्गंध के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। कचरे और अवशेषों से उठने वाली बदबू से वन्यजीव विचलित हो जाते हैं, जिससे उनके बीमार पड़ने की आशंका बनी रहती है।
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चिड़ियाघर की चहारदीवारी के साथ एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में तकरीबन 150 एकड़ भूमि गोरखपुर वन प्रभाग की देखरेख में है। आसपास के लोगों के विरोध के बावजूद यहीं पर पिछले कई सालों से बकरीद पर कुर्बानी के पशुओं के अवशेष डंप किए जाते रहे हैं। एकला बांध पर 1000 किलोग्राम प्रति घंटे की क्षमता का बना पशु शव दाह गृह तकनीकी खामियों के कारण पिछले डेढ़ माह से बंद पड़ा है।
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कुर्बानी के अवशेष इस बार शहर के अलग-अलग स्थानों पर निस्तारण वैज्ञानिक विधि से डंप किए जाएंगे। चिड़ियाघर के पास केवल 20 प्रतिशत अवशेष ही डंप होंगे। नौसड़ में पशु शवदाह गृह का संचालन भी एक दो दिन में शुरू हो जाएगा।
- गौरव सिंह सोगरवाल, नगर आयुक्त