{"_id":"6710588d2829a12d220ceae9","slug":"gorakhpur-news-aiims-will-prevent-dengue-and-chikungunya-becomes-third-arl-institute-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-718146-2024-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: डेंगू और चिकनगुनिया की रोकथाम करेगा एम्स, बना तीसरा एआरएल संस्थान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: डेंगू और चिकनगुनिया की रोकथाम करेगा एम्स, बना तीसरा एआरएल संस्थान
Thu, 17 Oct 2024 05:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 17 Oct 2024 05:51 AM IST
विज्ञापन
गोरखपुर। एम्स डेंगू और चिकनगुनिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए शीर्ष रेफरल प्रयोगशाला (एआरएल) वाला राज्य का तीसरा संस्थान बन गया है। इसके माइक्रोबायोलॉजी विभाग को डेंगू और चिकनगुनिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए एआरएल के रूप में मंजूरी दी गई है। यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र की पहल का हिस्सा है।
डेंगू और चिकनगुनिया दोनों रोग एडीज मच्छर के माध्यम से फैलते हैं और गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। डेंगू रक्तस्रावी बुखार और शॉक सिंड्रोम जैसी जानलेवा जटिलताओं का कारण भी बन सकता है। चिकनगुनिया जोड़ों में दर्द का कारण बनता है जो महीनों या सालों तक बना रह सकता है, जिससे संक्रमित व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ता है। इन बीमारियों के प्रसार को रोकना और नियंत्रित करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है, और इस लड़ाई में प्रभावी निदान और निगरानी महत्वपूर्ण घटक हैं।
अब माइक्रोबायोलॉजी विभाग पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसके एक प्रमुख केंद्र के रूप में काम करने के साथ वेक्टर जनित रोगों से निपटने के लिए राष्ट्रीय प्रयास में नैदानिक सहायता के साथ योगदान करेगी। यह एपेक्स रेफरल प्रयोगशाला की भूमिका में समय पर और सटीक निदान प्रदान करने, परिसंचारी वायरस उपभेदों की पहचान करने के लिए सीरो-निगरानी करने और डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों के प्रबंधन में प्रहरी अस्पतालों की क्षमता को बढ़ाएगा। एसजीपीजीआई और केजीएमयू लखनऊ सहित अन्य प्रमुख संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा। एम्स के कार्यकारी निदेशक प्रो. अजय सिंह इस उपलब्धि के लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग को हार्दिक बधाई दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डेंगू और चिकनगुनिया दोनों रोग एडीज मच्छर के माध्यम से फैलते हैं और गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। डेंगू रक्तस्रावी बुखार और शॉक सिंड्रोम जैसी जानलेवा जटिलताओं का कारण भी बन सकता है। चिकनगुनिया जोड़ों में दर्द का कारण बनता है जो महीनों या सालों तक बना रह सकता है, जिससे संक्रमित व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ता है। इन बीमारियों के प्रसार को रोकना और नियंत्रित करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है, और इस लड़ाई में प्रभावी निदान और निगरानी महत्वपूर्ण घटक हैं।
विज्ञापन
अब माइक्रोबायोलॉजी विभाग पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसके एक प्रमुख केंद्र के रूप में काम करने के साथ वेक्टर जनित रोगों से निपटने के लिए राष्ट्रीय प्रयास में नैदानिक सहायता के साथ योगदान करेगी। यह एपेक्स रेफरल प्रयोगशाला की भूमिका में समय पर और सटीक निदान प्रदान करने, परिसंचारी वायरस उपभेदों की पहचान करने के लिए सीरो-निगरानी करने और डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों के प्रबंधन में प्रहरी अस्पतालों की क्षमता को बढ़ाएगा। एसजीपीजीआई और केजीएमयू लखनऊ सहित अन्य प्रमुख संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा। एम्स के कार्यकारी निदेशक प्रो. अजय सिंह इस उपलब्धि के लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग को हार्दिक बधाई दी है।
विज्ञापन