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एम्स: कोर्ट जाने के बाद भी नहीं मिली छात्रा को राहत, केवल चार दिन बताई उपस्थिति
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गोरखपुर। एम्स गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज की जिस छात्रा को चार साल से कम उपस्थिति बताकर परीक्षा से वंचित रखा गया है, उसे कोर्ट के निर्देशों के बावजूद राहत नहीं दी गई। जबकि, उसके बैच के ही एक छात्र का मेडिकल ग्राउंड मंजूर करते हुए परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिल गई।
2020 बैच की इस छात्रा के पिता ने कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. अजय कुमार सिंह को घटना की जानकारी देते हुए बेटी की मदद की अपील की है। छात्रा के पिता का कहना है कि कोविड के कारण वर्ष 2020 के छात्रों की अटेंडेंस पूरी नहीं हो पाई थी। मामला न्यायालय में गया तो न्यायाधीश ने तात्कालिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए छात्रों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर देने को कहा था। बाद में अन्य छात्र-छात्राओं को तो मौका दिया गया, लेकिन केवल एक छात्रा को उससे वंचित कर दिया गया। कोर्ट में छात्रा की उपस्थिति भी केवल चार दिन की बताई गई। छात्रा के पिता का कहना है कि अध्यापकों ने कोर्ट में जो जानकारी दी, उसके अनुसार 1042 दिन क्लास चलने का जिक्र करते हुए उसकी उपस्थिति को 11 प्रतिशत ही माना गया, जबकि ऐसा संभव नहीं है।
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एक प्रोफेसर पर लगाया आरोप
छात्रा का कहना है कि एम्स से हटाए जा चुके एक प्रोफेसर ने ही उसकी गलत अटेंडेंस बनवाई थी। छात्रा का आरोप है कि उसके बैच के ही एक छात्र को लगातार आठ महीने अनुपस्थित रहने और गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई, जबकि उसे परीक्षा से बाहर रखा गया। यह सब कुछ उसी हटाए गए प्रोफेसर के इशारे पर तत्कालीन जिम्मेदारों ने किया था। इसकी शिकायत उसने तब एम्स प्रेसिडेंट से भी की थी।
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2020 बैच की इस छात्रा के पिता ने कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. अजय कुमार सिंह को घटना की जानकारी देते हुए बेटी की मदद की अपील की है। छात्रा के पिता का कहना है कि कोविड के कारण वर्ष 2020 के छात्रों की अटेंडेंस पूरी नहीं हो पाई थी। मामला न्यायालय में गया तो न्यायाधीश ने तात्कालिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए छात्रों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर देने को कहा था। बाद में अन्य छात्र-छात्राओं को तो मौका दिया गया, लेकिन केवल एक छात्रा को उससे वंचित कर दिया गया। कोर्ट में छात्रा की उपस्थिति भी केवल चार दिन की बताई गई। छात्रा के पिता का कहना है कि अध्यापकों ने कोर्ट में जो जानकारी दी, उसके अनुसार 1042 दिन क्लास चलने का जिक्र करते हुए उसकी उपस्थिति को 11 प्रतिशत ही माना गया, जबकि ऐसा संभव नहीं है।
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एक प्रोफेसर पर लगाया आरोप
छात्रा का कहना है कि एम्स से हटाए जा चुके एक प्रोफेसर ने ही उसकी गलत अटेंडेंस बनवाई थी। छात्रा का आरोप है कि उसके बैच के ही एक छात्र को लगातार आठ महीने अनुपस्थित रहने और गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई, जबकि उसे परीक्षा से बाहर रखा गया। यह सब कुछ उसी हटाए गए प्रोफेसर के इशारे पर तत्कालीन जिम्मेदारों ने किया था। इसकी शिकायत उसने तब एम्स प्रेसिडेंट से भी की थी।
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