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एम्स: गंभीर मरीजों को सेंट्रल आईसीयू में मिलेगा विशेष उपचार
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गोरखपुर। एम्स में आने वाले अति गंभीर मरीजों को ट्रामा एंड इमरजेंसी के बजाय सीधे सेंट्रल आईसीयू में भर्ती किया जाएगा। वहां अलग-अलग रोग के लिए विशेष जांच के साथ विशेषज्ञ सुविधाएं भी मौजूद होंगी। एम्स गोरखपुर ऐसी सुविधा देने वाला पूर्वांचल का पहला चिकित्सा संस्थान होगा। मंगलवार को कार्यकारी निदेशक ने इसका दौरा कर चल रही तैयारियों की जानकारी ली।
सरकारी क्षेत्र में एम्स चिकित्सा का सबसे बड़ा संस्थान है। एम्स के पास हर तरह की विशेषज्ञता मौजूद होती है। आम आदमी के लिए एम्स से रेफर होने का मतलब यह है कि उसका इलाज अब बेहद मुश्किल है। हालांकि गोरखपुर एम्स में अभी इस तरह की विशेषज्ञता नहीं है। इस वजह से आए दिन यहां मरीज व उनके तीमारदार हंगामा करते थे। कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. अजय कुमार सिंह ने ट्रामा एंड इमरजेंसी वार्ड में बेड बढ़वाने व ओटी बढ़वाने के अलावा चिकित्सकों की संख्या भी बढ़वा दी है, जिसके बाद अब वहां से मरीजों का रेफर होना बंद हो चुका है। अब इससे भी एडवांस चिकित्सा की व्यवस्था हो रही है। इसके लिए एनेस्थीसिया विभाग में सेंट्रल आईसीयू बनाया जा रहा है। यह आईसीयू 10 बेड का होगा जिसे बाद में 15 बेड तक बढ़ाया जाएगा।
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समय प्रबंधन से मिलेगा लाभ
मंगलवार को कार्यकारी निदेशक ने मेजर ओटी कॉम्प्लेक्स और निर्माणाधीन सेंट्रल आईसीयू का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रो. अजय कुमार सिंह ने कहा कि ओटी कॉम्प्लेक्स के प्रत्येक भाग का उपयोग प्री-ऑपरेटिव तैयारी से लेकर पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी तक किया जाएगा। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की उपलब्धता और समन्वय को सुव्यवस्थित करके, सर्जिकल शेड्यूल का बेहतर प्रबंधन हो सकता है। सही समायोजन से मरीजों की प्रतीक्षा का समय कम होता है। सेंट्रल आईसीयू के बारे में बताया कि यह अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक से लैस है, जिसमें उन्नत निगरानी प्रणाली, वेंटिलेटर और जीवन रक्षक उपकरण शामिल हैं। इसे अति गंभीर मरीजों के लिए बनाया जा रहा है। आईसीयू गहन देखभाल सेवाओं के लिए एक केंद्रीकृत केंद्र के रूप में काम करेगा, जिससे बेहतर समन्वय, संसाधन आवंटन और मरीज की जरूरतों के लिए तत्काल काम होगा। इससे गंभीर मरीजों को 24 घंटे बेहतर उपचार मिल सकेगा।
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सरकारी क्षेत्र में एम्स चिकित्सा का सबसे बड़ा संस्थान है। एम्स के पास हर तरह की विशेषज्ञता मौजूद होती है। आम आदमी के लिए एम्स से रेफर होने का मतलब यह है कि उसका इलाज अब बेहद मुश्किल है। हालांकि गोरखपुर एम्स में अभी इस तरह की विशेषज्ञता नहीं है। इस वजह से आए दिन यहां मरीज व उनके तीमारदार हंगामा करते थे। कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. अजय कुमार सिंह ने ट्रामा एंड इमरजेंसी वार्ड में बेड बढ़वाने व ओटी बढ़वाने के अलावा चिकित्सकों की संख्या भी बढ़वा दी है, जिसके बाद अब वहां से मरीजों का रेफर होना बंद हो चुका है। अब इससे भी एडवांस चिकित्सा की व्यवस्था हो रही है। इसके लिए एनेस्थीसिया विभाग में सेंट्रल आईसीयू बनाया जा रहा है। यह आईसीयू 10 बेड का होगा जिसे बाद में 15 बेड तक बढ़ाया जाएगा।
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समय प्रबंधन से मिलेगा लाभ
मंगलवार को कार्यकारी निदेशक ने मेजर ओटी कॉम्प्लेक्स और निर्माणाधीन सेंट्रल आईसीयू का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रो. अजय कुमार सिंह ने कहा कि ओटी कॉम्प्लेक्स के प्रत्येक भाग का उपयोग प्री-ऑपरेटिव तैयारी से लेकर पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी तक किया जाएगा। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की उपलब्धता और समन्वय को सुव्यवस्थित करके, सर्जिकल शेड्यूल का बेहतर प्रबंधन हो सकता है। सही समायोजन से मरीजों की प्रतीक्षा का समय कम होता है। सेंट्रल आईसीयू के बारे में बताया कि यह अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक से लैस है, जिसमें उन्नत निगरानी प्रणाली, वेंटिलेटर और जीवन रक्षक उपकरण शामिल हैं। इसे अति गंभीर मरीजों के लिए बनाया जा रहा है। आईसीयू गहन देखभाल सेवाओं के लिए एक केंद्रीकृत केंद्र के रूप में काम करेगा, जिससे बेहतर समन्वय, संसाधन आवंटन और मरीज की जरूरतों के लिए तत्काल काम होगा। इससे गंभीर मरीजों को 24 घंटे बेहतर उपचार मिल सकेगा।
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