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Gorakhpur News: नवंबर से फिर चालू होगा एबीसी सेंटर, आवारा कुत्तों का होगा बंध्याकरण
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नगर निगम ने फर्म का किया चयन, अगले हफ्ते जारी होगा वर्क ऑर्डर
गोरखपुर। शहर में आवारा कुत्तों के उत्पात पर जल्द ही लगाम लगने की उम्मीद है। लंबे समय से बंद पड़ा एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर अब नवंबर से फिर से शुरू होने जा रहा है। नगर निगम ने इसके संचालन की जिम्मेदारी पीलीभीत की संस्था सोसाइटी फॉर ह्यूमन एंड एनिमल वेलफेयर को सौंपी है। अगले सप्ताह तक फर्म को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद यहां आवारा कुत्तों का बंध्याकरण किया जाएगा।
गुलरिहा के अमवा गांव स्थित सेंटर नौ सितंबर से बंद था। इसके बंद होने के बाद से शहर में निराश्रित और आक्रामक कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हालत यह है कि रोजाना करीब 300 लोग जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवा रहे हैं। रिहायशी इलाकों की गलियों में कुत्तों के झुंड घूमने से लोग रात में बाहर निकलने से डरते हैं।
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. रोबिन चंद्रा ने बताया कि नई फर्म के चयन के बाद नवंबर से बंध्याकरण और रेबीज रोधी टीकाकरण का कार्य दोबारा शुरू हो जाएगा। निगम का लक्ष्य है कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित की जाए और लोगों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
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गोरखपुर। शहर में आवारा कुत्तों के उत्पात पर जल्द ही लगाम लगने की उम्मीद है। लंबे समय से बंद पड़ा एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर अब नवंबर से फिर से शुरू होने जा रहा है। नगर निगम ने इसके संचालन की जिम्मेदारी पीलीभीत की संस्था सोसाइटी फॉर ह्यूमन एंड एनिमल वेलफेयर को सौंपी है। अगले सप्ताह तक फर्म को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद यहां आवारा कुत्तों का बंध्याकरण किया जाएगा।
गुलरिहा के अमवा गांव स्थित सेंटर नौ सितंबर से बंद था। इसके बंद होने के बाद से शहर में निराश्रित और आक्रामक कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हालत यह है कि रोजाना करीब 300 लोग जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवा रहे हैं। रिहायशी इलाकों की गलियों में कुत्तों के झुंड घूमने से लोग रात में बाहर निकलने से डरते हैं।
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नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. रोबिन चंद्रा ने बताया कि नई फर्म के चयन के बाद नवंबर से बंध्याकरण और रेबीज रोधी टीकाकरण का कार्य दोबारा शुरू हो जाएगा। निगम का लक्ष्य है कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित की जाए और लोगों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
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