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Gorakhpur News: सड़क हादसों को रोकने में गोरखपुर समेत 65 जिले फिसड्डी

Sun, 20 Jul 2025 12:49 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jul 2025 12:49 AM IST
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Gorakhpur News: 65 districts including Gorakhpur are lagging behind in preventing road accidents
पिछले साल के अपेक्षा छह माह में 18 प्रतिशत बढ़ी मृतकों की संख्या
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प्रदेश सरकार ने नाराजगी जाहिर करते हुए सभी जिलों से छह बिंदु पर मांगा जवाब
25830 हादसों में 14205 लोगों की हो चुकी है मौत, 19430 हुए घायल
गोरखपुर। प्रदेश सरकार के लाख कवायदों के बाद भी सड़क हादसे में मृतकों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। आलम यह है कि पिछले साल के अपेक्षा बीते छह माह (जनवरी-जून 2025) में 18 प्रतिशत मृतकों की संख्या में वृद्धि हुई है। सड़क हादसों में मृतकों की संख्या को रोकने में गोरखपुर समेत प्रदेश के 65 जिले फिसड्डी साबित हुए हैं।
यातायात निदेशालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, बीते छह माह में हुए 25830 हादसों में 14205 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 19430 लोग घायल हुए हैं। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने नाराजगी जाहिर करते हुए छह बिंदुओं पर जवाब तलब किया है।
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यातायात विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में वर्ष 2024 में 22391 सड़क हादसे में 12043 की मौत हुई, जबकि 16363 लोग घायल हुए थे। इस साल महज छह माह में ही 25830 हादसों में 14205 लोगों की जान चली गई, जबकि 19430 लोग घायल हुए हैं। इसमें सिर्फ गोरखपुर में ही छह माह में हुए 609 हादसे में 239 लोगों की मौत हुई है। जबकि 395 लोग घायल हुए हैं।
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खास बात यह है कि हादसे में घायल लोगों की जानकारी तो विभाग के पास है पर बाद में कितने लोगों की मौत हो गई, इसका डाटा नहीं है। पुलिस, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, स्वास्थ्य विभाग में समन्वय स्थापित न होने और सार्थक प्रयास नहीं करने के चलते मृतकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।


हादसों को रोकने के लिए हर माह लखनऊ में होती है बैठक
प्रदेश में सर्वाधिक हादसे वाले जिलों में दुर्घटनाएं व मृतकाें की संख्या में कमी लाने के लिए लखनऊ में हर माह बैठक की जाती है। बैठकों में प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारी, कप्तान, मंडलायुक्त, उप परिवहन आयुक्त, संभागीय परिवहन अधिकारी समेत अन्य अफसर मौजूद रहते हैं। इसके बाद भी कोई सार्थक कदम नहीं उठाया जा रहा है।

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छह बिंदुओं पर एक सप्ताह के भीतर मांगा जवाब
सड़क हादसों में मृतकों की संख्या में कमी लाने के लिए परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने एक सप्ताह के भीतर छह बिंदुओं पर जवाब तलब किया है।
सड़क हादसों और मृतकों की संख्या में वृद्धि के वास्तविक कारण क्या हैं।
हादसों को रोकने के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए।
पूर्व में दिए गए निर्देशों का क्रियान्वयन क्यों नहीं हो पाया।
जिला स्तर से कौन सी रणनीति अथवा योजना तैयार की गई है।
पुलिस, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य विभागों में समन्वय में क्या कठिनाइयां आ रही हैं।
हादसों को रोकने के लिए क्या सहयोग ओर संसाधनों की आवश्यकता है।
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मृतकों की संख्या रोकने में ये जिले रहे फिसड्डी
महोबा, भदोही, चित्रकूट, रायबरेली, प्रयागराज, मिर्जापुर, देवरिया, सोनभद्र, एटा, मुरादाबाद, हाथरस, बलरामपुर, मैनपुरी, कन्नौज, हरदोई, चंदौली, सिद्धार्थनगर, झांसी, महाराजगंज, बस्ती, फतेहगढ़, इटावा, हापुड, जौनपुर, आगरा, कासगंज, जालौन, संतकबीरनगर, पीलीभीत, बाराबंकी, बदांयू, अमेठी, अलीगढ़, वाराणसी, फतेहपुर, मथुरा, उन्नाव, आजमगढ़, सीतापुर, लखनऊ, गाजीपुर, कानपुर देहात, कौशांबी, अयोध्या, अम्बेडकरनगर, गाेंडा, रामपुर, बांदा, कानपुर नगर, सहारनपुर, प्रतापगढ़, गोरखपुर, संभल, बहराइच, श्रावस्ती, ललितपुर, सुल्तानपुर, हमीरपुर, बिजनौर, बुलन्दशहर, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, गौतमबुद्धनगर।
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